Impeachment proceedings begin against Justice Yashwant Verma
Impeachment proceedings begin against Justice Yashwant Verma –
संदर्भ:
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने हेतु प्राप्त बहुदलीय नोटिस को स्वीकार करते हुए, उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया।
गठित जांच समिति में निम्न सदस्य शामिल हैं:
- न्यायमूर्ति अरविंद कुमार – सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश
- न्यायमूर्ति मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव – मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
- बी. वी. आचार्य – कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता
लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि समिति शीघ्र ही अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने का प्रस्ताव, जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने तक, लंबित रहेगा।
महाभियोग और उसकी प्रक्रिया–
‘महाभियोग’ शब्द का अर्थ है- किसी पद पर कार्यरत व्यक्ति को उस पद से हटाने के लिए अपनाई जाने वाली औपचारिक प्रक्रिया, जिसके बाद वह उस पद से जुड़ी सभी शक्तियों और जिम्मेदारियों से वंचित हो जाता है। संक्षेप में, पद से हटाने की पूरी प्रक्रिया को ही महाभियोग कहा जाता है।
भारतीय संदर्भ में महाभियोग शब्द दो स्थितियों में प्रयुक्त होता है:
- राष्ट्रपति का महाभियोग
- न्यायाधीशों की पद से हटाने की प्रक्रिया – हालांकि भारतीय संविधान में न्यायाधीशों को हटाने के लिए महाभियोग शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है।
भारत में न्यायाधीशों को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया:
- अनुच्छेद 124(4) – सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने से संबंधित प्रावधान।
- अनुच्छेद 218 – उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने से संबंधित प्रावधान।
हटाने के आधार: न्यायाधीश को केवल इन दो आधारों पर ही हटाया जा सकता है:
- सिद्ध दुराचार: पद पर रहते हुए जानबूझकर किया गया अनुचित आचरण, भ्रष्टाचार, ईमानदारी की कमी, या कोई ऐसा अपराध जिसमें नैतिक पतन शामिल हो।
- अक्षम्यता: कोई चिकित्सकीय स्थिति जिसके कारण न्यायाधीश अपने कर्तव्यों का पालन न कर सके, जिसमें शारीरिक या मानसिक अक्षम्यता दोनों शामिल हैं।
न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया:
न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 सर्वोच्च न्यायालय (SC) और उच्च न्यायालय (HC) के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया को विनियमित करता है।
प्रक्रिया की शुरुआत: लोकसभा में कम से कम 100 सांसद या राज्यसभा में कम से कम 50 सांसद इस संबंध में प्रस्ताव (Motion) पर हस्ताक्षर करें।
- लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) या राज्यसभा सभापति (Chairman) विचार एवं परामर्श के बाद प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं।
- यदि प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो तीन-सदस्यीय जांच समिति (Committee of Inquiry) का गठन किया जाता है।
जांच समिति:
- सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (CJI) या कोई अन्य SC न्यायाधीश
- किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
- एक विशिष्ट विधिवेत्ता (Distinguished Jurist)
ये आरोपों की जांच करते है, और आरोपों का निर्धारण और साक्ष्यों की जांच, गवाहों से पूछताछ और प्रतिपरीक्षण, रिपोर्ट तैयार कर लोकसभा अध्यक्ष/राज्यसभा सभापति को सौंपना
संसद में मतदान: प्रत्येक सदन में प्रस्ताव तभी पारित होगा जब:
- उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से अनुमोदन मिले और सदन की कुल सदस्य संख्या के 50% से अधिक सदस्य पक्ष में हों
- यदि दोनों सदन प्रस्ताव को पारित कर दें, तो राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं।
कार्यवाही की समाप्ति: यदि समिति न्यायाधीश को निर्दोष पाती है, तो कार्यवाही यहीं समाप्त हो जाती है और मामला आगे नहीं बढ़ता।