Inauguration of Namo Bharat Corridor
संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ नमो भारत कॉरिडोर (दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ RRTS) के अंतिम खंडों (सराय काले खां-न्यू अशोक नगर और मेरठ दक्षिण-मोदीपुरम) का उद्घाटन कर इसे राष्ट्र को समर्पित किया।
नमो भारत कॉरिडोर के बारे मे:
- परिचय: यह भारत की पहली क्षेत्रीय त्वरित पारगमन प्रणाली (RRTS) है, जिसका संचालन ‘नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन’ (NCRTC) द्वारा किया जा रहा है।
- लंबाई और मार्ग: कुल 82.15 किमी लंबा कॉरिडोर, जो सराय काले खां (दिल्ली) को मोदीपुरम (मेरठ) से जोड़ता है।
- गति: इसकी डिजाइन गति 180 किमी/घंटा और परिचालन गति 160 किमी/घंटा है, जो इसे भारत की सबसे तेज़ शहरी ट्रेन प्रणाली बनाती है।
- मेरठ मेट्रो के साथ एकीकरण: विश्व में पहली बार, क्षेत्रीय रेल (RRTS) और स्थानीय मेट्रो (Meerut Metro) एक ही बुनियादी ढांचे (ट्रैक और स्टेशन) पर संचालित हो रही हैं।
- मेरठ मेट्रो: 23 किमी लंबा कॉरिडोर, 13 स्टेशन और 120 किमी/घंटा की गति के साथ यह भारत की सबसे तेज मेट्रो प्रणाली है।
- प्रमुख स्टेशन और कनेक्टिविटी:
- मल्टी-मोडल हब: सराय काले खां (दिल्ली) स्टेशन को हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन, दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन और ISBT से जोड़ा गया है।
- मेरठ के स्टेशन: मेरठ दक्षिण, शताब्दी नगर, बेगमपुल और मोदीपुरम जैसे स्टेशन RRTS और मेट्रो दोनों के लिए ‘इंटरचेंज’ का कार्य करते हैं।
- मल्टी-मोडल एकीकरण: यह परियोजना ‘पीएम गति शक्ति’ नेशनल मास्टर प्लान का हिस्सा है:
- ETCS लेवल-2 सिग्नलिंग: भारत में पहली बार इस उन्नत यूरोपीय सिग्नलिंग प्रणाली का उपयोग किया गया है।
- रोलिंग स्टॉक: इन ट्रेनों का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ के तहत गुजरात के सावली में किया गया है।
- स्वचालित किराया संग्रह (AFC): इसमें QR आधारित टिकट और ‘नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड’ (NCMC) का उपयोग किया जाता है।
इसका महत्व:
- शहरी विकेंद्रीकरण: यह कॉरिडोर दिल्ली पर जनसंख्या के बढ़ते दबाव को कम करने और मेरठ जैसे शहरों को ‘सब-सेंटर’ के रूप में विकसित करने में सहायक होगा।
- ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD): कॉरिडोर के आसपास रियल एस्टेट और व्यावसायिक गतिविधियों में भारी उछाल देखा जा रहा है। मेरठ में भूमि की दरों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
- पर्यावरणीय लाभ: निजी वाहनों पर निर्भरता कम होने से प्रतिदिन लगभग 1 लाख वाहनों की सड़क यात्रा कम होगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन (CO2) में भारी कमी आने का अनुमान है।
- क्षेत्रीय समानता: यह नेटवर्क शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंच को सुगम बनाकर क्षेत्रीय विकास में समानता (Spatial Equity) लाता है।

