India-Bangladesh Friendship Pipeline
संदर्भ:
हाल ही में मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल संकट के बीच, भारत ने अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के तहत बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल की पहली खेप भेजी।
भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन (IBFP) के बारे में:
- परिचय: भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन (IBFP) एक रणनीतिक सीमा-पार ऊर्जा परियोजना है, जो भारत के सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) को बांग्लादेश के पारबतिपुर (दिनाजपुर) से जोड़ती है।
- समझौता: इस परियोजना की नींव 2017 में रखी गई थी जब नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) और बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) ने एक दीर्घकालिक बिक्री-खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसका औपचारिक उद्घाटन 18 मार्च 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन पीएम शेख हसीना द्वारा किया गया।
- भौगोलिक विस्तार (लंबाई): पाइपलाइन की कुल लंबाई 131.5 किलोमीटर है। रणनीतिक रूप से इसे दो भागों में विभाजित किया गया है: भारत में 5 किमी (पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में) और बांग्लादेश में 126.5 किमी (दिनाजपुर जिले के पारबतिपुर तक)।
- उत्पाद और क्षमता: यह विशेष रूप से हाई-स्पीड डीजल (HSD) के परिवहन के लिए बनाई गई है। इसकी वर्तमान क्षमता 1 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) है, जिसे आवश्यकतानुसार भविष्य में बढ़ाया जा सकता है।
- लागत और वित्तपोषण: कुल परियोजना लागत लगभग ₹377.08 करोड़ है। भारत ने अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत बांग्लादेश के हिस्से की लागत (लगभग ₹285 करोड़) को अनुदान सहायता (Grant-in-aid) के रूप में वहन किया है।
- स्रोत और आपूर्ति केंद्र: डीजल का मुख्य स्रोत असम की नुमालीगढ़ रिफाइनरी (NRL) है। वहां से ईंधन सिलीगुड़ी स्थित मार्केटिंग टर्मिनल पहुँचता है, जहाँ से पाइपलाइन इसे सीधे बांग्लादेश के पारबतिपुर हेड डिपो तक पहुँचाती है।
- परिवहन दक्षता (समय और दूरी): पाइपलाइन से पहले, डीजल रेल वैगनों के माध्यम से लगभग 512 किलोमीटर की दूरी तय करके भेजा जाता था। पाइपलाइन ने इस दूरी को घटाकर 131 किमी कर दिया है, जिससे परिवहन समय हफ्तों से घटकर घंटों में रह गया है।
- तकनीकी विशेषताएं (SCADA System): यह पाइपलाइन अत्याधुनिक स्कैडा (SCADA) सिस्टम से लैस है, जो वास्तविक समय में रिसाव का पता लगाने और दबाव की निगरानी करने में सक्षम है, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
महत्व:
- आर्थिक प्रभाव और लागत बचत: बांग्लादेश के लिए यह अत्यंत किफायती है क्योंकि पाइपलाइन से परिवहन लागत रेल और सड़क की तुलना में बहुत कम है। यह उत्तरी बांग्लादेश के 16 जिलों में कृषि और उद्योगों के लिए सस्ता ईंधन सुनिश्चित करता है।
- ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): वैश्विक तेल संकट के समय यह पाइपलाइन बांग्लादेश के लिए “लाइफलाइन” का कार्य करती है। यह मध्य पूर्व पर निर्भरता को कम करते हुए पड़ोसी देश से निरंतर ऊर्जा आपूर्ति की गारंटी देती है।
- पर्यावरण अनुकूल: पाइपलाइन परिवहन कार्बन उत्सर्जन को काफी कम करता है। हजारों ट्रक और रेल वैगनों के सड़क से हटने के कारण पर्यावरण प्रदूषण और सड़क दुर्घटनाओं में भारी कमी आई है।
- क्षेत्रीय विकास (कृषि और उद्योग): उत्तरी बांग्लादेश (रंगपुर और राजशाही डिवीजन) मुख्य रूप से कृषि प्रधान है। पाइपलाइन से मिलने वाला डीजल सिंचाई और कृषि मशीनरी के लिए संजीवनी साबित हो रहा है।
- भू-राजनीतिक: यह पाइपलाइन भारत और बांग्लादेश के बीच ‘एनर्जी कनेक्टिविटी’ का सबसे मजबूत उदाहरण है। यह दक्षिण एशिया में भारत की विश्वसनीय ऊर्जा प्रदाता और क्षेत्रीय नेता की छवि को सशक्त बनाती है।
