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भारत-कनाडा यूरेनियम आपूर्ति समझौता (India-Canada Uranium Supply Agreement) | Apni Pathshala

India-Canada Uranium Supply Agreement

India-Canada Uranium Supply Agreement

संदर्भ:

हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा के दौरान, भारत और कनाडा ने 2.6 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 24,000 करोड़ रुपये) के ऐतिहासिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए। जो दोनों देशों के बीच उपजे कूटनीतिक तनाव के बाद ‘रिश्तों के रीसेट’ का संकेत है। 

समझौते के प्रमुख विवरण:

    • आपूर्तिकर्ता: कनाडा की प्रमुख कंपनी Cameco (कमीको), जो सस्केचेवान (Saskatchewan) प्रांत में स्थित है।
    • मात्रा और अवधि: यह समझौता 2027 से 2035 तक के लिए है, जिसके तहत लगभग 2.2 करोड़ पाउंड (22 million pounds) यूरेनियम अयस्क कंसन्ट्रेट की आपूर्ति की जाएगी।
    • कुल मूल्य: लगभग 2.6 अरब कनाडाई डॉलर (1.9 अरब अमेरिकी डॉलर)।
    • सुरक्षा मानक: यह आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा उपायों (Safeguards) के तहत होगी।
  • अन्य सहयोग:
    • SMR (स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स): छोटे और उन्नत परमाणु रिएक्टर्स के विकास पर सहयोग।
    • महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals): लिथियम, कोबाल्ट और ग्रेफाइट जैसी स्वच्छ ऊर्जा धातुओं की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना।
    • क्लीन टेक: हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में साझा नवाचार।

भारत के लिए महत्व:

  • परमाणु लक्ष्य 2047: भारत का लक्ष्य वर्ष 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को वर्तमान 8.18 गीगावाट (GW) से बढ़ाकर 100 GW करना है। इस विशाल लक्ष्य के लिए स्थिर ईंधन आपूर्ति अनिवार्य है।
  • घरेलू कमी की पूर्ति: भारत को सालाना लगभग 1,800 टन यूरेनियम की आवश्यकता होती है, जबकि घरेलू उत्पादन केवल 600 टन के करीब है। कनाडा जैसे विश्वसनीय साथी से आयात इस अंतर को पाटने में मदद करेगा।
  • बेसलोड पावर (Baseload Power): सौर और पवन ऊर्जा के विपरीत, परमाणु ऊर्जा 24/7 स्थिर बिजली प्रदान करती है, जो औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक है। 
  • CEPA की ओर कदम: दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक ले जाने और 2026 के अंत तक ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ (CEPA) को अंतिम रूप देने पर सहमत हुए हैं।

भारत-कनाडा संबंध:

  • भारत-कनाडा संबंधों की शुरुआत 1954 में CIRUS परमाणु रिएक्टर की सहायता से हुई थी, जिसने भारत के परमाणु कार्यक्रम की नींव रखी। हालांकि, 1974 के पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद संबंधों में गहरा तनाव आया और कनाडा ने सहयोग समाप्त कर दिया।
  • 2010 में नागरिक परमाणु सहयोग समझौते (NCA) के माध्यम से संबंधों में सुधार शुरू हुआ। वर्तमान में, 2026 की मार्क कार्नी की यात्रा और ऐतिहासिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते ने इन संबंधों को फिर से मजबूती दी है। 
  • आज दोनों देश खालिस्तानी अलगाववाद जैसे कूटनीतिक मुद्दों को पीछे छोड़कर ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी पर केंद्रित हैं।

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