India first electric green tug project
संदर्भ:
03 दिसंबर 2025 को भारत सरकार ने दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण, कांडला के लिए देश का पहला संपूर्ण इलेक्ट्रिक ग्रीन टग प्रोजेक्ट शुरू किया। यह पहल मंत्रालय बंदरगाह, नौवहन एवं जलमार्गों (MoPSW) की ग्रीन टग ट्रांज़िशन प्रोग्राम (GTTP) के तहत की गई, जिसका उद्देश्य भारत के सस्टेनेबल और ऊर्जा-कुशल समुद्री संचालन को बढ़ावा देना है।
इलेक्ट्रिक ग्रीन टग क्या हैं?
- इलेक्ट्रिक ग्रीन टग ऐसे आधुनिक हावड़िक जहाज हैं जो बंदरगाहों में जहाजों को लेने-ले जाने, एस्कॉर्ट और आपातकालीन संचालन के लिए प्रयोग किए जाते हैं।
- इसमें 60 टन बोलार्ड पुल क्षमता विकसित की गई है। इसमें उन्नत नेविगेशन और कम रखरखाव डिज़ाइन वाले पार्ट्स लगाए गए हैं।
- इन टग्स का मुख्य आकर्षण है बैटरी-इलेक्ट्रिक सिस्टम, जो उन्हें शून्य कार्बन उत्सर्जन, शांत संचालन और ऊर्जा-कुशल संचालन में सक्षम बनाता है। ये पारंपरिक ईंधन आधारित टग्स की तुलना में सस्टेनेबल और पर्यावरण अनुकूल समुद्री संचालन को बढ़ावा देते हैं।
ग्रीन टग ट्रांज़िशन प्रोग्राम (GTTP)
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- उद्देश्य: GTTP का मुख्य लक्ष्य पर्यावरणीय स्थिरता, ऊर्जा दक्षता, तकनीकी उन्नति और आर्थिक विकास है। यह कार्यक्रम बंदरगाहों में परंपरागत ईंधन आधारित टग्स को इलेक्ट्रिक और अन्य हरित विकल्पों से बदलने की पहल है।
- मुख्य लक्ष्य: पर्यावरणीय स्थिरता: बंदरगाह संचालन से कार्बन उत्सर्जन में कमी। ऊर्जा दक्षता: वैकल्पिक ईंधन और ऊर्जा-कुशल तकनीकों का उपयोग। तकनीकी उन्नति: हरे समुद्री प्रौद्योगिकी में नवाचार। आर्थिक विकास: देशी जहाज निर्माण उद्योग और रोजगार सृजन।
ग्रीन टग ट्रांज़िशन प्रोग्राम (GTTP) के कार्यान्वयन चरण:
- चरण 1 (2024–2027): इस चरण में चार प्रमुख बंदरगाहों—जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, दीनदयाल पोर्ट, पारादीप पोर्ट और वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट—में प्रत्येक बंदरगाह पर दो इलेक्ट्रिक ग्रीन टग्स तैनात किए जाएंगे। इसका उद्देश्य बैटरी-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के साथ संचालन शुरू करना और भारत में टग निर्माण को बढ़ावा देना है।
- चरण 2 (2027–2030): इस चरण में पायलट बंदरगाहों के 50% टग्स को ग्रीन टग्स में बदलना लक्ष्य है। इसके लिए मिथेनॉल, हाइड्रोजन और अमोनिया जैसे वैकल्पिक ईंधन अपनाए जाएंगे।
- चरण 3 (2030–2035): इस चरण में सभी प्रमुख बंदरगाहों के 50% टग्स को ग्रीन टग्स में बदलना और ग्रीन तकनीकों का व्यापक विस्तार करना है।
- चरण 4 (2035–2040): इस चरण का लक्ष्य है सभी प्रमुख बंदरगाहों में 75% टग्स को ग्रीन टग्स में बदलना और हर बंदरगाह पर पर्यावरण अनुकूल संचालन को बढ़ावा देना।
- चरण 5 (2040–2047): अंतिम चरण में सभी बंदरगाहों के 100% टग्स को ग्रीन टग्स में बदलकर पूरी तरह से कार्बन मुक्त संचालन सुनिश्चित करना है।
प्रमुख तकनीकी पहल:
- बैटरी-इलेक्ट्रिक टग्स: प्रारंभिक चरण में।
- वैकल्पिक ईंधन: मिथेनॉल, हाइड्रोजन, अमोनिया अपनाना।
- हाइब्रिड सिस्टम: प्रौद्योगिकी के विकास के अनुसार एकीकृत।
आर्थिक और औद्योगिक प्रभाव:
- मेक इन इंडिया: सभी ग्रीन टग्स भारतीय शिपयार्ड्स में निर्मित।
- रोजगार सृजन: जहाज निर्माण और संबंधित उद्योगों में अवसर।
- निवेश: अनुमानित ₹1,000 करोड़।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा: भारत का ग्रीन समुद्री नवाचार में नेतृत्व।
रणनीतिक महत्व:
- DPA की पहल: GTTP के कार्यान्वयन में अग्रणी।
- समुद्री डिकर्बोनाइजेशन: बंदरगाहों में स्वच्छ ऊर्जा अपनाना।
- भविष्य की तैयारियाँ: हरे टग्स से बंदरगाह संचालन, एस्कॉर्ट और आपातकालीन प्रतिक्रिया में योगदान।
- विश्व नेतृत्व: भारतीय जहाज निर्माण और समुद्री नवाचार का वैश्विक मंच।
- अमृत काल: GTTP मारिटाइम इंडिया विजन 2030 और अमृत काल प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
- अंतरराष्ट्रीय डिकार्बोनाइजेशन: यह अंतरराष्ट्रीय डिकार्बोनाइजेशन फ्रेमवर्क्स के साथ मेल खाता है। जो भविष्य में परियोजना डेटा के अन्य चरणों के लिए मार्गदर्शक का कार्य करेगी।

