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भारत ने मलेरिया के मामलों में 97% की कमी (India has reduced malaria cases by 97%) | UPSC

India has reduced malaria cases by 97%

India has reduced malaria cases by 97%

संदर्भ:

 केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में यह घोषणा की कि भारत ने मलेरिया के मामलों में 97% की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की है। यह उपलब्धि भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य इतिहास में एक मील का पत्थर है, जो देश को 2030 तक पूर्ण मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य के और करीब ले जाती है। 

प्रमुख सांख्यिकीय उपलब्धियां:

  • मलेरिया के मामलों में कमी: स्वतंत्रता के समय वार्षिक लगभग 7.5 करोड़ मामलों की तुलना में 2023-24 तक इसमें 97% की भारी कमी आई है।
  • मृत्यु दर में गिरावट: मलेरिया से होने वाली मौतों में लगभग 78% से 80% तक की कमी दर्ज की गई है।
  • डेंगू और अन्य बीमारियाँ: डेंगू की मृत्यु दर को घटाकर मात्र 1% कर दिया गया है। इसके साथ ही कालाजार (Kala-azar) के मामलों में 90% से अधिक का सुधार हुआ है।
  • मातृ और शिशु स्वास्थ्य: मातृ मृत्यु दर (MMR) में 25% और शिशु मृत्यु दर (IMR) में 50% की कमी आई है। 

श्रेणीबद्ध उन्मूलन:

भारत में राज्यों को मलेरिया की व्यापकता (API – Annual Parasite Incidence) के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है: 

  • श्रेणी 0: वे क्षेत्र जहाँ शून्य स्थानीय मामले हैं (जैसे: लद्दाख, लक्षद्वीप, पुडुचेरी)।
  • श्रेणी 1: उन्मूलन चरण वाले राज्य (API < 1)।
  • श्रेणी 2: पूर्व-उन्मूलन चरण (API < 1, लेकिन कुछ जिलों में अधिक)।
  • श्रेणी 3: तीव्र नियंत्रण चरण (API > 1), मुख्य रूप से ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय क्षेत्र। 

सफलता के पीछे प्रमुख सरकारी पहल:

  • आयुष्मान भारत (Ayushman Bharat): लगभग 1.81 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पूर्व में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) ग्रामीण स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा और मलेरिया जांच उपलब्ध करा रहे हैं।
  • मिशन इंद्रधनुष (Mission Indradhanush): टीकाकरण अभियानों ने बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर बीमारियों के बोझ को कम करने में सहायता की है।
  • राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन ढांचा (NFME) 2016-2030: इस रूपरेखा के तहत भारत ने 2027 तक ‘शून्य स्थानीय मलेरिया मामले’ (Zero indigenous cases) और 2030 तक पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य रखा है।
  • 3T रणनीति (Test, Treat, Track): त्वरित निदान, पूर्ण उपचार और प्रत्येक मामले की ट्रैकिंग को अनिवार्य बनाया गया है।
  • बजटीय वृद्धि: स्वास्थ्य बजट 2014 के ₹37,000 करोड़ से बढ़कर 2025 तक ₹1.28 लाख करोड़ हो गया है। 

मलेरिया के बारे मे:

मलेरिया एक घातक किंतु उपचार योग्य संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से प्लाज्मोडियम (Plasmodium) नामक परजीवी के कारण होता है। यह परजीवी संक्रमित मादा एनोफिलीज (Anopheles) मच्छर के काटने से मनुष्यों में फैलता है।

  • परजीवी: मनुष्यों में मलेरिया फैलाने वाले मुख्य रूप से पांच परजीवी होते हैं: P. falciparum (सबसे घातक), P. vivax (सबसे व्यापक), P. ovale, P. malariae और P. knowlesi (दुर्लभ)।
  • लक्षण: मच्छर के काटने के 10-15 दिनों के भीतर लक्षण दिखाई देते हैं। मुख्य लक्षणों में शामिल हैं: तेज बुखार और कंपकंपी (ठंड लगना), सिरदर्द, मतली और उल्टी, अत्यधिक पसीना आना और मांसपेशियों में दर्द। गंभीर मामलों में एनीमिया (रक्त की कमी), पीलिया।
    • संक्रमण: जब संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो परजीवी रक्त के माध्यम से यकृत (Liver) में जाते हैं और वहां परिपक्व होते हैं। इसके बाद, वे लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) पर हमला करते हैं, जिससे कोशिकाएं फट जाती हैं और बुखार के लक्षण उत्पन्न होते हैं।

रोकथाम:

    • दवाएं: मलेरिया के उपचार के लिए आर्टेमिसिनिन-आधारित संयोजन थेरेपी (ACT) और क्लोरोक्वीन (Chloroquine) का उपयोग किया जाता है।
    • टीकाकरण: हाल के वर्षों में ‘RTS,S/AS01’ (Mosquirix) और ‘R21/Matrix-M’ (ऑक्सफोर्ड द्वारा विकसित) टीकों को WHO द्वारा मंजूरी दी गई है।
    • बचाव: कीटनाशक उपचारित मच्छरदानी (LLINs) का उपयोग, घरों के भीतर कीटनाशक छिड़काव (IRS) और जल जमाव को रोकना सबसे प्रभावी उपाय हैं।

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