India participation in the Pax Silica initiative

संदर्भ:
हाल ही में अमेरिका ने घोषणा की है कि भारत को “पैक्स सिलिका (Pax Silica)” पहल में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। यह घोषणा नई दिल्ली में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के द्वारा की गई, जिसमें उन्होंने कहा कि अगली महीने भारत को औपचारिक रूप से इस रणनीतिक गठबंधन का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।
पैक्स सिलिका पहल क्या है?
- Pax Silica एक नई अमेरिका-नेतृत्व वाली वैश्विक पहल है जिसका मुख्य उद्देश्य सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीकी सप्लाई चेन की सुरक्षा और दृढ़ता को सुनिश्चित करना है।
- यह पहल सिलिकॉन (Silicon)—जो सेमीकंडक्टर्स और आधुनिक डिजिटल तकनीक का मूल आधार है—के व्यापक मूल्य शृंखला को सुरक्षित और नवाचार-प्रेरित बनाने के इर्द-गिर्द केंद्रित है।
- इस पहल की शुरुआत संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा अमेरिकी विदेश विभाग (U.S. Department of State) के माध्यम से की गई है।
- Pax Silica की अवधारणा “Silicon Peace” से प्रेरित है, जिसका लक्ष्य वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में स्थिरता, भरोसेमंद सहयोग और साझा सुरक्षा ढांचे को स्थापित करना है।
- इस पहल में मूल रूप से अमेरिका के साथ जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड्स, यूनाइटेड किंगडम, इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया सहित आठ प्रमुख राष्ट्र शामिल हैं। इसमें ताइवान, यूरोपीय संघ, कनाडा और IOC अतिथि साझेदार हैं।
- पहला पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन दिसंबर 2025 में आयोजित किया गया था, जो तकनीकी कूटनीति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम था।
भारत की भागीदारी का महत्व:
- सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा: भारत सरकार की इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन जैसी पहलें घरेलू चिप निर्माण को बढ़ावा दे रही हैं। इस पहल में शामिल होने से भारत को उन्नत विनिर्माण, डिजाइन और पैकेजिंग में वैश्विक विशेषज्ञता और निवेश प्राप्त होगा, जिससे देश का सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा।
- एआई अवसंरचना का विकास: भारत में वर्तमान में वैश्विक स्तर का एआई बुनियादी ढांचा नहीं है। पैक्स सिलिका के तहत निवेश और साझेदारी, जैसा कि हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट और गूगल द्वारा भारत में एआई डेटा सेंटर खोलने की घोषणाओं से स्पष्ट है, भारत की एआई क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकती है।
- आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन: यह पहल भारत को वैकल्पिक और भरोसेमंद वैश्विक आपूर्ति नेटवर्क का औपचारिक हिस्सा बनाएगी, जिससे भविष्य में आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों (विशेषकर चीन से संबंधित) के प्रति भारत की भेद्यता कम होगी।
- चीन के एकाधिकार का मुकाबला: यह पहल चीन के तकनीकी एकाधिकार के जवाब के रूप में देखी जाती है। भारत की भागीदारी चीन के टेक प्रभुत्व को संतुलित करने के साझा लक्ष्य में भारत-अमेरिका सहयोग को मजबूत करती है।
