India ranked third in Asia Power Index 2025
संदर्भ:
ऑस्ट्रेलिया स्थित लोवी इंस्टीट्यूट (Lowy Institute) द्वारा जारी एशिया पावर इंडेक्स 2025 में भारत ने अपनी रैंकिंग में महत्वपूर्ण सुधार करते हुए एशिया का तीसरा सबसे प्रभावशाली राष्ट्र बनने का स्थान प्राप्त किया है। यह एक बड़ी उपलब्धि है, जो भारत की आर्थिक वृद्धि, सैन्य शक्ति, रणनीतिक साझेदारियों और राजनयिक पहुँच के बढ़ते दायरे को दर्शाती है।
एशिया पावर इंडेक्स (Asia Power Index) क्या है?
- परिचय: एशिया पावर इंडेक्स ऑस्ट्रेलिया के Lowy Institute द्वारा प्रकाशित एक वार्षिक आकलन सूचकांक है, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों की संपूर्ण शक्ति (Comprehensive Power) को मापता है। इसमें देश की आर्थिक, सैन्य, राजनयिक, और रणनीतिक संसाधनों के आधार पर क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्तर पर वातावरण को प्रभावित करने की क्षमता का आकलन किया जाता है।
- आवृति: यह इंडेक्स हर वर्ष जारी किया जाता है और वर्तमान में 27 एशियाई देशों और क्षेत्रों को कवर करता है—जिनमें अमेरिका भी शामिल है।
- उद्देश्य: इस इंडेक्स का उद्देश्य एशिया में शक्ति संतुलन और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को समझना है। यह यह बताता है कि कौन-सा देश क्षेत्र में सबसे अधिक प्रभावशाली है, किन देशों का प्रभाव बढ़ रहा है या घट रहा है, और भविष्य में शक्ति संतुलन किस दिशा में जा रहा है।
- संकेतक: इंडेक्स लगभग 131 संकेतकों पर आधारित है और कुल 8 प्रमुख आयामों में किसी देश की शक्ति का आकलन करता है— Military Capability (सैन्य क्षमता), Economic Capability (आर्थिक क्षमता), Diplomatic Influence (राजनयिक प्रभाव), Defence Networks (रक्षा नेटवर्क), Economic Relationships (आर्थिक संबंध), Cultural Influence (सांस्कृतिक प्रभाव), Resilience (लचीलापन) और Future Resources (भविष्य संसाधन)।
- स्कोरिंग प्रणाली: हर देश को 0–100 के पैमाने पर अंक दिए जाते हैं। स्कोर के आधार पर देशों को चार श्रेणियों में रखा जाता है: Super Power (सर्वोच्च शक्ति), Major Power (प्रमुख शक्ति), Middle Power (मध्यम शक्ति) और Minor Power (क्षेत्रीय/सीमित शक्ति)।
एशिया पावर इंडेक्स 2025 के मुख्य बिंदु:
- भारत का प्रदर्शन: 2025 में भारत ने कुल 40/100 का स्कोर प्राप्त किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। इस प्रकार भारत को पहली बार “Major Power” के रूप में वर्गीकृत किया गया है। भारत की इस प्रगति का आधार रणनीतिक और सैन्य क्षमता में सुधार, राजनयिक पहुँच का विस्तार रहा।
- भारत की विशिष्ट मजबूती: भारत ने आर्थिक क्षमता और भविष्य संसाधन श्रेणियों में तीसरा स्थान प्राप्त किया। भारत ने आर्थिक क्षमता में जापान को पीछे छोड़कर एशिया की उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में खुद को स्थापित किया है। भारत दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया के प्रमुख देशों जापान – 38.8 और रूस – 32.1 से आगे है।
- अमेरिका और चीन: अमेरिका 81.7 के स्कोर के साथ शीर्ष स्थान पर है, जबकि चीन 73.7 अंक के साथ दूसरा। दोनों के बीच शक्ति अंतर कम हो रहा है। यह स्थिति एशिया में द्विध्रुवीय शक्ति समीकरण (Bipolar Power Structure) को दर्शाती है।
- वैश्विक शक्ति समीकरण: रूस ने उत्तर कोरिया और चीन के साथ साझेदारी बढ़ाकर कुछ प्रगति दिखाई है।दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में मिश्रित परिणाम रहे। भारतीय उपमहाद्वीप में भारत का वर्चस्व यथावत है, परंतु चीन से शक्ति अंतर अभी भी काफी बड़ा है, जो भारत के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक चुनौती बनी रहेगी।
भारत की रणनीतिक स्थिति:
- आर्थिक शक्ति: भारत की उच्च वृद्धि दर, बढ़ते विदेशी निवेश और विनिर्माण क्षमता में उन्नति ने इसे एशिया की उभरती आर्थिक धुरी बनाया है। “इंडिया मोमेंट” के रूप में वर्णित आर्थिक प्रगति भारत को क्षेत्रीय आर्थिक सुरक्षा तंत्र का एक केंद्रीय स्तंभ बनाती है।
- सैन्य क्षमता और रक्षा नेटवर्क: भारत की सैन्य क्षमता—विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों की सफलता ने इसकी सैन्य विश्वसनीयता को और मजबूत किया है। भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण देशों—अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, फ्रांस, ASEAN—के साथ रक्षा नेटवर्क मजबूत कर रहा है।
- राजनयिक प्रभाव: भारत की G20 अध्यक्षता, वैश्विक दक्षिण (Global South) नेतृत्व और बहुपक्षीय संस्थानों में सक्रियता ने इसके कूटनीतिक प्रभाव को बढ़ाया है। भारत अब क्षेत्रीय संकटों के समाधान, विकास सहयोग और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

