भारत अंतरिक्ष प्रक्षेपण कार्यक्रम की उपलब्धियां एवं योजनाएं
संदर्भ:
हाल ही में सरकार द्वारा संसद में दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत ने पिछले तीन वर्षों में 12 सफल रॉकेट मिशनों के माध्यम से 20 उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित किया। इस भारत अंतरिक्ष प्रक्षेपण कार्यक्रम (India Space Launch Programme) में चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 ने वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की स्थिति को मजबूत किया।
भारत अंतरिक्ष प्रक्षेपण कार्यक्रम (India Space Launch Programme) की उपलब्धियां:
- चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3): भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) के पास सफलतापूर्वक सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला देश बना।
- आधित्य-एल1 (Aditya-L1): पीएसएलवी (PSLV) रॉकेट के माध्यम से भारत ने अपने पहले सौर वेधशाला मिशन (Solar Observatory Mission) को सफलतापूर्वक लॉन्च किया।
- 100 प्रक्षेपणों का कीर्तिमान: श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 100 सफल प्रक्षेपण पूरे करने का ऐतिहासिक गौरव हासिल हुआ।
- स्पाडेक्स मिशन (SPADEX): अंतरिक्ष में डॉकिंग और अनडॉकिंग (Docking/Undocking) तकनीक का सफल प्रदर्शन कर भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बना।
- एसएसएलवी (SSLV) का विकास: लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान का तीसरा विकासात्मक परीक्षण सफल रहा और इसकी तकनीक निजी उद्योग को स्थानांतरित की गई
- निसार मिशन (NISAR): नासा और इसरो का संयुक्त सिंथेटिक एपर्चर रडार मिशन भारत के जीएसएलवी (GSLV) वाहन पर सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया गया।
- एलवीएम3 (LVM3) की ताकत: इसके माध्यम से भारत ने अपनी धरती से सबसे भारी घरेलू उपग्रह CMS-03 और एक अमेरिकी ग्राहक के लिए अब तक का सबसे वजनी उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा।
भारतीय अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान (ISRO Launch Vehicles):
- पीएसएलवी (PSLV – Polar Satellite Launch Vehicle): इसे इसरो का ‘वर्कहॉर्स’ (Workhorse) कहा जाता है। यह चार चरणों वाला रॉकेट है जिसमें ठोस और तरल ईंधन का वैकल्पिक उपयोग होता है। यह मुख्य रूप से पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों (Earth Observation Satellites) को सूर्य-समकालिक ध्रुवीय कक्षाओं में स्थापित करता है।
- जीएसएलवी (GSLV – Geosynchronous Satellite Launch Vehicle): यह तीन चरणों वाला भारी रॉकेट है, जिसके अंतिम चरण में स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन (Cryogenic Engine) का उपयोग होता है। इसका उपयोग संचार उपग्रहों को भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (GTO) में भेजने के लिए किया जाता है।
- एलवीएम3 (LVM3 / GSLV MkIII): यह इसरो का सबसे शक्तिशाली भारी लिफ्ट रॉकेट है, जो चंद्रयान-3 और गगनयान (Gaganyaan) जैसे मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए मुख्य आधार है।
- एसएसएलवी (SSLV – Small Satellite Launch Vehicle): यह 500 किलोग्राम तक के छोटे उपग्रहों को निचली पृथ्वी कक्षा (LEO) में तेजी से और कम लागत पर स्थापित करने के लिए विकसित किया गया तीन चरणों वाला ठोस रॉकेट है।
बुनियादी ढांचागत विस्तार और निजी क्षेत्र की भागीदारी:
- तीसरा लॉन्च पैड (Third Launch Pad): श्रीहरिकोटा में अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यानों (NGLV) के लिए तीसरे लॉन्च पैड की स्थापना को मंजूरी दी गई है।
- कुलशेखरपट्टिनम कॉम्प्लेक्स (SLC): तमिलनाडु के कुलशेखरपट्टिनम में भारत का दूसरा रॉकेट लॉन्च स्थल विकसित किया जा रहा है, जो विशेष रूप से एसएसएलवी (SSLV) और निजी स्पेस स्टार्टअप्स के लिए समर्पित होगा ।
- इन-स्पेस (IN-SPACe) के सुधार: गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) को इसरो परिसरों में अस्थायी परीक्षण सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। स्टार्टअप्स और एमएसएमई (MSMEs) के लिए वित्तीय सहायता और अंतरिक्ष निर्माण क्लस्टर (Space Manufacturing Clusters) विकसित किए जा रहे हैं।
- वाणिज्यिक राजस्व (NSIL Revenue): न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में लॉन्च सेवाओं के माध्यम से ₹44,743.13 लाख का ऑडिटेड राजस्व अर्जित किया है।
भविष्य का तकनीकी रोडमैप (Future Technology Roadmap):
इसरो वर्तमान में भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने के लिए इन उन्नत तकनीकों पर काम कर रहा है:
- 200 टन थ्रस्ट सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का विकास
- रॉकेटों की पुनर्चक्रणीयता (Reusability) के लिए वर्टिकल टेक-ऑफ और वर्टिकल लैंडिंग (VTVL) तकनीक
- मीथेन आधारित हाई थ्रस्ट LOX-Methane इंजन
- आंशिक रूप से पुन: प्रयोज्य नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV)
- रणनीतिक लक्ष्य: इन-स्पेस के रोडमैप के अनुसार, वर्ष 2033 तक वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी को 44 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य है.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: भारत का अंतरिक्ष प्रक्षेपण कार्यक्रम क्या है?
उत्तर: यह उपग्रह प्रक्षेपण (Satellite Launch), पृथ्वी अवलोकन, संचार और गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए स्वदेशी रॉकेट प्रणालियों (PSLV, GSLV, SSLV) को विकसित करने का राष्ट्रीय कार्यक्रम है.
प्रश्न 2: ISRO ने अब तक कौन-कौन सी प्रमुख उपलब्धियां हासिल की हैं?
उत्तर: प्रमुख उपलब्धियों में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सॉफ्ट-लैंडिंग, सौर मिशन आदित्य-एल1 और अंतरिक्ष में सफल स्पाडेक्स डॉकिंग शामिल हैं.
प्रश्न 3: PSLV और GSLV में क्या अंतर है?
उत्तर: पीएसएलवी मुख्य रूप से कम वजनी और ध्रुवीय कक्षा के उपग्रहों के लिए है, जबकि जीएसएलवी क्रायोजेनिक चरण के साथ भारी संचार उपग्रहों को उच्च भू-समकालिक कक्षाओं में भेजता है.
प्रश्न 4: SSLV क्या है?
उत्तर: यह लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (Small Satellite Launch Vehicle) है, जिसे छोटे उपग्रहों को कम लागत और कम समय में अंतरिक्ष में भेजने के लिए बनाया गया है.
प्रश्न 5: गगनयान मिशन का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: गगनयान का मुख्य उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों (Crew Members) को स्वदेशी रॉकेट से अंतरिक्ष (LEO) में भेजना और उन्हें सुरक्षित वापस धरती पर लाना है।
प्रश्न 6: भारत के प्रमुख उपग्रह प्रक्षेपण कौन-कौन से हैं?
उत्तर: हाल के प्रमुख उपग्रहों में मौसम संबंधी और संचार आधारित उपग्रह जैसे CMS-03, अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक ग्राहकों के उपग्रह शामिल हैं.
