India stand on Shaksgam Valley

संदर्भ:
हाल ही में भारत ने शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) पर अपने दावे की पुनः पुष्टि करते हुए इस क्षेत्र से गुजरने वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के मार्ग को अवैध और अमान्य बताया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि यह घाटी भारत का अभिन्न अंग है और भारत 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को मान्यता नहीं देता है।
शक्सगाम घाटी पर भारत का रुख:
- भारत की आधिकारिक स्थिति: भारत का विदेश मंत्रालय लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि शक्सगाम घाटी भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का एक अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।
- 1963 का समझौता अवैध: भारत ने 1963 में हुए तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते (China-Pakistan Boundary Agreement) को कभी स्वीकार नहीं किया है। भारत का तर्क है कि पाकिस्तान के पास उस क्षेत्र को चीन को सौंपने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था, क्योंकि वह क्षेत्र स्वयं पाकिस्तान के अवैध कब्जे में था।
- संप्रभुता का उल्लंघन: CPEC का शक्सगाम घाटी से गुजरना भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सीधा उल्लंघन माना जाता है। भारत ने चीन और पाकिस्तान, दोनों के सामने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत ने चीन की किसी भी बुनियादी ढाँचा निर्माण गतिविधि का विरोध किया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
- रियासत जम्मू-कश्मीर का हिस्सा: शक्सगाम घाटी ऐतिहासिक रूप से तत्कालीन रियासत जम्मू और कश्मीर का हिस्सा थी, जिसने 1947 में भारत में विलय किया था।
- पाकिस्तान का अवैध कब्जा: 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद, यह क्षेत्र पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के हिस्से के रूप में पाकिस्तान के नियंत्रण में आ गया।
- चीन को हस्तांतरण: 1963 में, पाकिस्तान ने एक सीमा समझौते के तहत लगभग 5,180 वर्ग किलोमीटर का शक्सगाम क्षेत्र चीन को “सौंप” दिया। भारत इस हस्तांतरण को अवैध मानता है।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC):
CPEC, चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) का एक प्रमुख घटक है, जो चीन के शिनजियांग प्रांत को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है।
भारत के लिए चिंताएँ:
- संप्रभुता: CPEC का PoK और शक्सगाम घाटी से गुजरना भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता के लिए एक बड़ी चुनौती है।
- सैन्य और रणनीतिक: शक्सगाम घाटी रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण सियाचिन ग्लेशियर के उत्तर में स्थित है। इस क्षेत्र में चीनी सैन्य और दोहरे उपयोग वाले बुनियादी ढाँचे का निर्माण भारत के लिए सुरक्षा चिंताएँ पैदा करता है।
- चीन की हिंद महासागर में उपस्थिति: ग्वादर बंदरगाह पर चीनी नियंत्रण “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” (String of Pearls) रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जाता है, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर में भारत को घेरना है।
