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भारत FY29 में $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था तक पहुंचेगा (India to reach $5 trillion economy in FY29) | Apni Pathshala

India to reach $5 trillion economy in FY29

India to reach $5 trillion economy in FY29

संदर्भ:

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने नवंबर 2025 में भारत की आर्थिक प्रक्षेपण रिपोर्ट जारी करते हुए यह अनुमान लगाया कि भारत अब FY29 (2028–29) तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा। यह संशोधन पहले के पूर्वानुमान की तुलना में एक वर्ष का विलंब है, जिसमें FY28 तक लक्ष्य को प्राप्त करने की संभावना जताई गई थी।

IMF का संशोधित आर्थिक आकलन:

  • IMF के नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार भारत FY26 में 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को पार कर लेगा। FY28 में भारत का GDP लगभग 4.96 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो लक्ष्य से कुछ कम है। 
  • IMF ने 2023 और 2025 दोनों पूर्वानुमानों की तुलना में FY28 के डॉलर-आधारित GDP में लगभग 200–500 बिलियन डॉलर की कमी दर्ज की है।
  • IMF ने यह भी स्पष्ट किया कि नाममात्र GDP वृद्धि, विशेष रूप से रुपये के संदर्भ में, पहले के अनुमानों से कम है, जिससे डॉलर परिवर्तन के दौरान अर्थव्यवस्था का अनुमान कम दिखाई देता है।
  • FY26 और FY27 के लिए नाममात्र वृद्धि क्रमशः 8.5% और 10.1% अनुमानित की गई है। 
  • IMF का आकलन यह भी संकेत देता है कि भारत अभी भी वैश्विक निवेशकों के लिए उच्च विकास क्षमता वाली अर्थव्यवस्था है, जहां सेवा क्षेत्र, विनिर्माण में सुधार और सार्वजनिक पूंजी व्यय ने पिछले वर्षों में मजबूती प्रदान की है। 

विलंब के प्रमुख कारण: 

  • 5 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य में देरी के सबसे महत्वपूर्ण कारणों में से पहला है रुपये का अवमूल्यन (Exchange Rate Depreciation)। IMF के अनुसार, FY25 के लिए रुपया 84.6 प्रति डॉलर, FY26 के लिए 87 और FY27 के लिए 87.7 प्रति डॉलर के स्तर पर माना गया है। 
  • दूसरा प्रमुख कारण है नाममात्र GDP वृद्धि की धीमी गति। मुद्रास्फीति का दबाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ उपभोग और निवेश को कुछ हद तक सीमित कर रही हैं।
  • तीसरा कारक है वैश्विक मुद्रास्फीति और ब्याज दरों में अंतर, जिससे पूंजी प्रवाह प्रभावित होते हैं और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं अपेक्षाकृत कमजोर होती हैं।
  • IMF द्वारा भारत के विनिमय दर प्रबंधन को “crawl-like arrangement” के रूप में वर्गीकृत किया जाना बताता है कि आने वाले वर्षों में मामूली अवमूल्यन की प्रवृत्ति जारी रह सकती है। इससे डॉलर-आधारित GDP लक्ष्य की प्राप्ति समय-सीमा पर प्रभाव पड़ता है।

भारत की विकास यात्रा और सरकारी पहल:

  • भारत ने 2014 के बाद संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से एक उच्च विकास पथ हासिल किया। महामारी के बाद तेज़ी से आर्थिक वापसी, सेवाओं की मजबूत वृद्धि, और विनिर्माण क्षेत्र में लगभग 10% वृद्धि (FY24) ने अर्थव्यवस्था को एक स्थिर आधार प्रदान किया।
  • सार्वजनिक पूंजी व्यय—विशेषकर Gati Shakti, National Infrastructure Pipeline और लॉजिस्टिक सुधार—ने उत्पादन, निर्यात और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूती दी।
  • Make in India, Skill India और Startup India कार्यक्रमों ने उत्पादन क्षमता, कौशल और नवाचार को बढ़ाया। Production-Linked Incentive (PLI) योजना ने मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और सोलर मॉड्यूल जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित किया। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (UPI, DBT, Aadhaar) ने आर्थिक पारदर्शिता बढ़ाई और उपभोग का आधार स्थिर किया।

इन पहलों ने दीर्घकालिक विकास क्षमता को मजबूत किया है, जो 5 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा। हालांकि, IMF का आकलन बताता है कि बाहरी कारक—विशेषकर विनिमय दर परिवर्तन—भारत की वास्तविक प्रगति से अधिक डॉलर-आधारित मूल्यांकन को प्रभावित कर रहे हैं।

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