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भारतीय वैज्ञानिकों ने रमन ड्रिवन स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी नामक तकनीक विकसित की (Indian scientists develop a technique called Raman Driven Spin Noise Spectroscopy) | UPSC

Indian scientists develop a technique called Raman Driven Spin Noise Spectroscopy

Indian scientists develop a technique called Raman Driven Spin Noise Spectroscopy

संदर्भ:

हाल ही में भारत के वैज्ञानिकों ने ‘रमन ड्रिवन स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी’ (Raman Driven Spin Noise Spectroscopy – RDSNS) नामक एक अभिनव, गैर-आक्रामक तकनीक विकसित की है, जो क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 

रमन ड्रिवन स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी (RDSNS): 

    • परिचय: रमन ड्रिवन स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी मुख्य रूप से ठंडे परमाणुओं (Cold Atoms) के गुणों को बिना उन्हें बाधित किए मापने पर केंद्रित है। परमाणुओं को परम शून्य तापमान (Absolute Zero) के करीब ठंडा करने पर उनकी गति लगभग रुक जाती है। इस अवस्था में परमाणु तरंगों (Waves) की तरह व्यवहार करने लगते हैं।
  • संस्थान: यह तकनीक भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के एक स्वायत्त संस्थान, रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI), बेंगलुरु के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित की गई है। 
    • तकनीक: यह तकनीक दो मुख्य भौतिक सिद्धांतों का मिश्रण है:
      • रमन प्रभाव (Raman Effect): जब प्रकाश किसी पदार्थ से टकराता है, तो फोटॉन की ऊर्जा में सूक्ष्म परिवर्तन होता है।
      • स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी (Spin Noise Spectroscopy): यह तकनीक परमाणुओं के ‘स्पिन’ (कोणीय संवेग) में होने वाले स्वाभाविक उतार-चढ़ाव (Fluctuations) का उपयोग करती है। 
    • कार्यप्रणाली: इसमें वैज्ञानिकों ने एक लेजर बीम का उपयोग किया जो परमाणुओं के साथ इस तरह अंतःक्रिया (Interaction) करती है कि वह उनके क्वांटम गुणों को उत्तेजित नहीं करती। यह तकनीक परमाणुओं के स्पिन के कारण होने वाले ‘शोर’ (Noise) को पकड़ लेती है और उसका विश्लेषण करके परमाणुओं के ऊर्जा स्तरों और उनके व्यवहार की सटीक जानकारी प्रदान करती है। 

विशेषता:

    • न्यूनतम अशांति (Minimal Perturbation): पारंपरिक तरीकों के विपरीत, यह तकनीक मापन के दौरान परमाणु प्रणाली को गर्म या विचलित नहीं करती।
    • उच्च संवेदनशीलता: यह अत्यंत कम घनत्व वाले परमाणु बादलों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकती है।
    • स्वदेशी विकास: यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘राष्ट्रीय क्वांटम मिशन’ (National Quantum Mission) के लक्ष्यों के अनुरूप है। 

महत्व:

  • क्वांटम कंप्यूटिंग: क्वांटम बिट्स (Qubits) की स्थिति को बिना नष्ट किए पढ़ने में यह तकनीक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
  • परमाणु घड़ियाँ (Atomic Clocks): अत्यधिक सटीक समय मापन के लिए ठंडे परमाणुओं का अध्ययन आवश्यक है। यह संचार और GPS प्रणाली को बेहतर बनाएगा।
  • सटीक सेंसर (Precision Sensors): गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के सूक्ष्म परिवर्तनों को मापने के लिए।
  • बुनियादी भौतिकी: पदार्थ की नई अवस्थाओं (जैसे बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट) के रहस्यों को सुलझाने में सक्षम होगी।

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