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भारत की पहली अंडरवॉटर मेट्रो सेवा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 मार्च 2024 को कोलकाता में देश की पहली अंडरवाटर मेट्रो का उद्घाटन किया। यह मेट्रो हुगली नदी के नीचे बनी सुरंग से होकर गुजरेगी।

अंडरवाटर मेट्रो क्या होती है?

अंडरवाटर मेट्रो एक ऐसी मेट्रो प्रणाली है जो पानी के नीचे बनी सुरंगों से होकर गुजरती है। यह मेट्रो लाइनें शहरों को जोड़ने का एक प्रभावी तरीका हैं, खासकर उन शहरों को जो नदियों या समुद्रों से विभाजित हैं।

भारत की पहली अंडरवॉटर मेट्रो सेवा के बारे में :

  • यह सुरंग कोलकाता मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर का हिस्सा है, जो हुगली नदी के नीचे बनी है।
  • इस मेट्रो टनल का काम 2017 में शुरू हुआ था।
  • फरवरी 2020 में तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल ने साल्ट लेक सेक्टर वी और साल्ट लेक स्टेडियम को जोड़ने वाले कोलकाता मेट्रो के पूर्व-पश्चिम मेट्रो कॉरिडोर के पहले चरण का उ‌द्घाटन किया था।
  • 6 किलोमीटर लंबी यह मेट्रो लाइन हुगली के पश्चिमी तट पर स्थित हावड़ा को पूर्वी तट पर साल्ट लेक शहर से जोड़ती है।
  • हावड़ा से एस्प्लेनेड तक का रास्ता करीब 4.8 किलोमीटर लंबा है। इस रूट पर हुगली नदी के नीचे 520 मीटर लंबी मेट्रो सुरंग है।
  • अंडरग्राउंड टनल करीब 10.8 किलोमीटर लंबी है।
  • पानी के नीचे 520 मीटर की दूरी तय करने में यात्रियों को 1 मिनट से भी कम (45 सेकंड) समय लगेगा।
  • यह मेट्रो जमीन से 33 मीटर नीचे और हुगली नदी के तल से 13 मीटर नीचे चलेगी। इसके साथ ही हावड़ा मेट्रो स्टेशन भारत का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन बन गया है।
  • इस मार्ग पर कुल 12 स्टेशन हैं। इस अंडर वाटर मेट्रो रूट के चार प्रमुख स्टेशन हावड़ा मैदान, हावड़ा, महाकरण और एस्प्लेनेड हैं।
  • इस परियोजना की लागत लगभग 8,600 करोड़ रुपये है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी ने परियोजना की लागत का 48.5 प्रतिशत निवेश किया है।
  • सुरंग को पानी के भीतर उपयोग के योग्य बनाने के लिए, इसके कंक्रीट को फ्लाई ऐश और माइक्रो-सिलिका के साथ डिजाइन किया गया है, जो इसे जलरोधी बना देता है।
  • इसका निर्माण कोलकाता मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (KMRC) द्वारा किया जा रहा है।

कोलकाता मेट्रो :

  • भारत में सबसे पहले मेट्रो का संचालन कोलकाता में ही साल 1984 में शुरू किया गया था।
  • उसके 18 साल बाद दिल्ली में साल 2002 में मेट्रो का संचालन शुरू किया गया था।
  • आईआईएम-कलकत्ता के एसोसिएट प्रोफेसर आलोक कुमार ने रेलवे पर काफी रिसर्च किया।
  • इसके बाद इस विचार को 1980 के दशक में तत्कालीन रेल मंत्री एबीए गनी खान चौधरी द्वारा फिर से आगे बढ़ाया गया था।
  • 2008 में यूपीए सरकार द्वारा मंजूरी मिलने के बाद 2009 में निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन राजनीतिक बाधाओं और लागत में वृद्धि के कारण परियोजना में देरी हुई।

कोलकाता मेट्रो मील का पत्थर :

  • 1971 – जन द्रुत परिवहन प्रणाली के निर्माण हेतु महायोजना तैयार की गई।
  • 1972 – 1 जून को जन द्रुत परिवहन प्रणाली को मंजूरी प्रदान की गई।
  • 1972 – मेट्रो रेलवे, कोलकाता की आधारशिला 29 दिसंबर को रखी गई।
  • 1984 – 24 अक्‍टूबर को भारत की प्रथम मेट्रो के रूप में मेट्रो रेलवे, कोलकाता का शुभारंभ हुआ। 3.4 किमी. के विस्‍तार पर एस्‍प्‍लानेड से भवानीपुर (अब नेताजी भवन) तक वाणिज्‍यिक सेवा का शुभारंभ हुआ।
  • 1995 – 27 सितंबर को दमदम से टॉलीगंज तक 17 स्‍टेशनों के बीच 16.45 किमी. के संपूर्ण विस्‍तार पर वाणिज्‍यिक सेवा का आरंभ किया गया।
  • 2009 – 22 अगस्‍त को महानायक उत्‍तम कुमार (पहले टॉलीगंज के नाम से ज्ञात) से कवि नजरूल तक 5.89 किमी. के विस्‍तार पर नए खंड को चालू किया गया।
  • 2010 – 7 अक्‍टूबर को दक्षिण की ओर कवि नजरूल से कवि सुभाष तक 1.58 किमी. के विस्‍तार पर नए खंड के शेष भाग को चालू किया गया।
  • 2010 – 29 दिसंबर को मेट्रो रेलवे को क्षेत्रीय रेलवे का दर्जा प्रदान किया गया।
  • 2013 – 10 जुलाई को दमदम से नोआपाड़ा तक (2.091 किमी.) एक नए खंड का शुभारंभ किया गया।
  • 2014 – 21 मई को सोमवार से शुक्रवार तक दोनों छोरों से पहली गाड़ी का प्रस्‍थान 7:00 बजे के बदले 6:45 बजे तथा रविवारीय सेवाएं (पायलट सह वाणिज्‍यिक) 09:50 बजे के बदले 09.00 बजे से प्रारंभ हुईं।

दुनिया की पहली भूमिगत रेलवे सेवा

  • 10 जनवरी 1863 को दुनिया की पहली भूमिगत रेल सेवा प्रारम्भ हुई।
  • यह रेल सेवा पैडिंगटन से फ़ैरिंगटन के मध्य आरम्भ हुई और पहले ही दिन इसमें चालीस हजार यात्रियों ने यात्रा की।
  • धीरे-धीरे जमीन के नीचे और सुरंगें बनाई गईं और एक पूरा रेलवे जाल (नेटवर्क) बन गया। ये ट्रेनें भाप के इंजन से चलती थीं।
  • इसीलिए जमीन के नीचे जो सुरंग बनाई गई थी।
  • उसमें कुछ‌ कुछ दूरी पर वैंटिलेशन का प्रबन्ध था, जिससे भाप बाहर निकल सके।
  • सन 1905 से ट्रेनें बिजली से चलने लगीं।
  • एशिया में सबसे पहले जापान में भूमिगत रेल सेवा आरम्भ हुई थी और अब कोरिया, चीन, हाँग काँग, ताईवान, थाईलैण्ड और भारत में भी ये रेल सेवाएँ चल रही हैं।
  • भारत में कोलकाता, गुरुग्राम, जयपुर, चेन्नई, बंगलुरु, मुम्बई, कोच्चि, लखनऊ, हैदराबाद, दिल्ली, जयपुर में भूमिगत मेट्रो रेलें चल रहीं हैं।

कुछ महत्वपूर्ण तथ्य :

  • भारत की सबसे पुरानी (प्रथम) मेट्रो रेल प्रणाली कोलकाता मेट्रो हैं।
  • भारत की सबसे नवीनतम मेट्रो रेल प्रणाली: नवी मुंबई (11.1 किमी) मेट्रो हैं।
  • भारत की सबसे सबसे बड़ी मेट्रो प्रणाली: दिल्ली मेट्रो (347 किमी) हैं।
  • भारत की सबसे सबसे छोटी मेट्रो प्रणाली: कानपुर मेट्रो (8.73 किमी) हैं।
  • भारत की सबसे सबसे व्यस्त (उच्चतम सवारियां) मेट्रो प्रणाली: दिल्ली मेट्रो हैं।
  • भारत का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन: हावड़ा का ईस्ट-वेस्ट मेट्रो स्टेशन हैं।
  • ई. श्रीधरन को ‘मेट्रो मैन’ के नाम से जाना जाता है।
  • दुनिया का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन यूक्रेन में कीव मेट्रो पर आर्सेनलना स्टेशन है, जो 107 मीटर की गहराई पर है।
  • संयुक्त अरब अमीरात में दुबई मेट्रो पर यूनियन स्क्वायर स्टेशन दुनिया का सबसे बड़ा मेट्रो स्टेशन है।
  • हंगरी में बुडापेस्ट मेट्रो दुनिया भर में एकमात्र मेट्रो प्रणाली है जिसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल नामित किया गया है। यह 1896 में खुला और यह दुनिया की दूसरी सबसे पुरानी प्रणाली है।
  • दुनिया का सबसे लंबा सिंगल एस्केलेटर रूस में मॉस्को मेट्रो के पार्क पोबेडी स्टेशन पर है। यह 126.8 मीटर लंबी है और इसे चलाने में दो मिनट चालीस सेकंड का समय लगता है।

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