Indigenous High Altitude Platform System का परीक्षण, हवा से हल्का स्टेटोस्फेयर एयरशिप
संदर्भ:
हाल ही में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने भारत के पहले स्वदेशी हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम (Indigenous High Altitude Platform System) का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण (Flight Trial) संपन्न किया.
- यह परीक्षण समुद्र तल से 21 किलोमीटर (21 Km Altitude Airship) की अत्यधिक ऊंचाई पर किया गया, जिसने देश की समताप मंडलीय निगरानी (Stratospheric Surveillance Platform) के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा.
डीआरडीओ हाई-एल्टीट्यूड एयरशिप के बारे में:
- परिचय: यह प्रणाली हवा से हल्की (Lighter Than Air System) एक मानव रहित/अर्ध-स्वायत्त समताप मंडलीय हवाई संरचना है.
- यह पारंपरिक मानव रहित विमानों (UAVs) और अंतरिक्षीय उपग्रहों (Satellites) के बीच एक मध्यवर्ती कड़ी के रूप में कार्य करती है.
- इसे समताप मंडल (Stratosphere) के शांत वातावरण में एक ही स्थान पर लंबे समय तक तैरते रहने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
- विकासकर्ता संस्था: इस महत्वाकांक्षी प्रणाली को डीआरडीओ (DRDO) की प्रतिष्ठित प्रयोगशाला एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADRDE), आगरा द्वारा पूर्ण रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है.
- परीक्षण: अक्टूबर 2026 को लद्दाख में इसका सफल परीक्षण किया गया। यह सफल परीक्षण भारतीय वायुसेना (IAF), सैन्य उड़ान योग्यता और प्रमाणन केंद्र (CEMILAC), नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से आयोजित किया गया.
- उड़ान क्षमता एवं ऊंचाई: प्रायोगिक परीक्षण के दौरान यह स्वदेशी हैप्स (Indigenous HAPS India) समुद्र तल से 21 किमी की अधिकतम ऊंचाई तक पहुँचा और इसने 20 किमी की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक स्थिर उड़ान (Sustained Flight) बनाए रखी.
- नेविगेशन और पेलोड प्रणाली: यह विमानपोत आंतरिक रूप से कई इलेक्ट्रॉनिक पैकेजों से लैस था, जिनमें एक इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट (IMU), ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (GPS) रिसीवर, ऑनबोर्ड कैमरे और एक अत्याधुनिक एल्टीट्यूड-कंट्रोल मैकेनिज्म (Altitude-control Mechanism) शामिल हैं.
- डेटा ट्रांसमिशन: पूरी परीक्षण उड़ान (DRDO Airship Test) के दौरान ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन (GCS) को रियल-टाइम वीडियो डेटा और वाहन के अन्य महत्वपूर्ण परिचालन पैरामीटर सफलता के साथ प्राप्त हुए.
- पुनर्प्राप्ति (Recovery): परीक्षण के निर्धारित मानदंड पूरे होने के बाद, समताप मंडलीय हवाई मंच (Stratospheric Airship India) को सफलतापूर्वक नीचे उतरने का कमांड दिया गया और इसे पूरी तरह सुरक्षित रिकवर कर लिया गया.
- तकनीक: यह प्रणाली समताप मंडल में हवा के न्यूनतम प्रवाह का लाभ उठाकर एक भू-स्थैतिक (Geostationary) स्थिति प्राप्त कर लेती है. यद्यपि यह परीक्षण प्रारंभिक चरण का था, इस तकनीक का दीर्घकालिक लक्ष्य सौर-ऊर्जा संचालित (Solar-powered) लिथियम-सल्फर बैटरी प्रणालियों का उपयोग करना है, जिससे यह बिना नीचे आए लगातार कई महीनों (Long Endurance Airship) तक हवा में टिक कर 24 घंटे बाज जैसी पैनी नजर रख सके.
भारत की रक्षा अवसंरचना के लिए इसका महत्व:
- अखंड सीमा निगरानी (Border Surveillance Technology): भारत की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) जैसे कठिन पहाड़ी क्षेत्रों में जहां उपग्रह केवल विशिष्ट अंतरालों पर ही डेटा दे पाते हैं, यह उच्च ऊंचाई निगरानी प्रणाली (High Altitude Surveillance System) एक ही स्थान पर टिक कर रियल-टाइम खुफिया जानकारी (ISR Capacity) सेना को प्रदान करेगी.
- लागत प्रभावशीलता (Cost Efficiency): अंतरिक्षीय उपग्रहों के निर्माण और उन्हें लॉन्च करने में भारी वित्तीय लागत आती है. इसके विपरीत, इस हाइब्रिड वायुपोत (DRDO High Altitude Airship) की विनिर्माण लागत बहुत कम है और इसे आवश्यकतानुसार नीचे लाकर दोबारा आधुनिक कैमरों या सेंसर्स से सुसज्जित (Re-equipped) किया जा सकता है.
- समुद्री और तटीय सुरक्षा (Maritime Security): यह तकनीक हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की समुद्री सीमाओं की चौबीसों घंटे रक्षा निगरानी (Defence Surveillance System) करने में गेम-चेंजर साबित होगी, जिससे विदेशी युद्धपोतों और संदिग्ध गतिविधियों को समय रहते पकड़ा जा सकेगा.
- आपातकालीन संचार व्यवस्था (Dual-use Application): सैन्य खुफिया जानकारी जुटाने (High Altitude Surveillance) के अलावा, प्राकृतिक आपदाओं (चक्रवात, भूकंप) के समय जब जमीनी टावर नष्ट हो जाते हैं, तब यह एयरशिप प्रभावित क्षेत्रों में एक अस्थायी मोबाइल नेटवर्क और डेटा रिले स्टेशन के रूप में आपातकालीन संचार बहाल कर सकता है.
- सामरिक स्वायत्तता का संवर्धन: यह एडवांस्ड एरोस्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की विदेशी निर्भरता को समाप्त कर राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में देश की संप्रभु विनिर्माण क्षमता को अभूतपूर्व शक्ति प्रदान करता है.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: DRDO का Indigenous High Altitude Platform System क्या है?
उत्तर: यह समताप मंडल में कार्य करने वाला हवा से हल्का (Lighter Than Air) स्वदेशी ड्रोननुमा वायुपोत है, जो उपग्रह की तरह एक जगह रहकर निरंतर टोही और संचार सेवाएं दे सकता है.
प्रश्न 2: High Altitude Airship कितनी ऊंचाई तक पहुंच सकता है?
उत्तर: डीआरडीओ (DRDO) द्वारा डिजाइन की गई यह प्रणाली समताप मंडल (Stratosphere) में वाणिज्यिक विमानों से काफी ऊपर 21 किलोमीटर की अत्यधिक ऊंचाई तक पहुंच सकती है.
प्रश्न 3: DRDO HAPS ने 21 Km Altitude पर क्या हासिल किया?
उत्तर: इसने हालिया उड़ान परीक्षण (DRDO HAPS Trial 2026) में 21 किमी की ऊंचाई छूकर 20 किमी पर 30 मिनट से अधिक समय तक सफल स्थिर उड़ान और डेटा ट्रांसमिशन का लक्ष्य प्राप्त किया.
प्रश्न 4: Lighter Than Air High Altitude Platform क्या होता है?
उत्तर: यह ऐसा हवाई मंच (High Altitude Airship India) है जो तैरने के लिए हीलियम जैसी हल्की गैसों का उपयोग करता है, जिससे यह भारी मात्रा में ईंधन जलाए बिना लंबे समय तक टिका रहता है.
प्रश्न 5: Stratospheric Airship का Defence में क्या उपयोग है?
उत्तर: रक्षा क्षेत्र में इसका प्राथमिक उपयोग दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार 24 घंटे पैनी नज़र रखने, सिग्नल्स को इंटरसेप्ट करने और सुरक्षित सैन्य संचार स्थापित करने में होता है.
प्रश्न 6: High Altitude Platform System Border Surveillance में कैसे मदद करेगा?
उत्तर: यह दुर्गम हिमालयी सीमाओं पर भू-स्थैतिक स्थिति में टिक कर सीमाओं (Border Surveillance Technology) की लाइव तस्वीरें और सेंसर डेटा सीधे ग्राउंड स्टेशनों को भेजकर घुसपैठ की हर कोशिश को नाकाम करेगा.
