Indigenous Man Portable Anti-Tank Guided Missile Successfully Tested
संदर्भ:
हाल ही में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का ‘गतिशील लक्ष्यों’ के विरुद्ध सफल परीक्षण किया गया। यह सफलता भारत की सैन्य आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) क्या हैं?
MPATGM एक कम वजन वाली, ‘दागो और भूल जाओ’ श्रेणी की एंटी-टैंक मिसाइल है। इसे मुख्य रूप से पैदल सेना (Infantry) के लिए विकसित किया गया है ताकि वे दुश्मन के भारी टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को सटीकता से नष्ट कर सकें।
- विकासकर्ता: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO)।
- निर्माण भागीदार: भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और निजी क्षेत्र की कंपनियां।
नवीनतम परीक्षण की मुख्य विशेषताएं:
- DRDO ने हालिया परीक्षणों में मिसाइल की ‘उच्च स्तरीय आक्रमण क्षमता’ और ‘गतिशील लक्ष्य भेदन’ का प्रदर्शन किया।
- मिसाइल ने अत्यधिक गति से चल रहे टैंक नुमा लक्ष्य को बीच रास्ते में ट्रैक किया और सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। इसमें स्वदेशी रूप से विकसित ‘इन्फ्रारेड इमेजिंग सीकर’ (IIR Seeker) और उन्नत ‘एवियोनिक्स’ का उपयोग किया गया है।
MPATGM की तकनीकी विशिष्टताएँ:
- वजन और पोर्टेबिलिटी: इसका वजन लगभग 14.5 किलोग्राम है, जिसे एक सैनिक आसानी से अपने कंधे पर रखकर ले जा सकता है।
- मारक क्षमता (Range): इसकी प्रभावी मारक क्षमता 2.5 किलोमीटर से 4 किलोमीटर तक है।
- टॉप अटैक मोड (Top Attack Mode): टैंकों का सबसे कमजोर हिस्सा उनका ऊपरी कवच (Turret) होता है। MPATGM ऊपर से हमला करके सबसे भारी टैंक को भी नष्ट करने में सक्षम है।
- टैंडम वारहेड (Tandem Warhead): यह विस्फोटक आधुनिक ‘एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर’ (ERA) को भेदने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
सामरिक महत्व:
- चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा विवाद: हिमालयी क्षेत्रों (जैसे लद्दाख) और रेगिस्तानी इलाकों में भारी टैंकों का मुकाबला करने के लिए पैदल सेना को हल्के लेकिन घातक हथियारों की आवश्यकता होती है। MPATGM इस कमी को पूरा करता है।
- आयात पर निर्भरता में कमी: अब तक भारत इजरायल की ‘स्पाइक’ (Spike) और अमेरिका की ‘जैवलीन’ (Javelin) मिसाइलों पर विचार कर रहा था। MPATGM के सफल परीक्षण के बाद भारत को इन महंगी विदेशी मिसाइलों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी।
- स्वदेशीकरण (Atmanirbhar Bharat): यह मिसाइल पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ पहल का हिस्सा है। MPATGM का सफल परीक्षण भारत के ‘इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम’ (IGMDP) के बाद की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है।

