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स्वदेशी टिटनेस और वयस्क डिप्थीरिया वैक्सीन लॉन्च (Indigenous tetanus and adult diphtheria vaccine launched) | Ankit Avasthi Sir

Indigenous tetanus and adult diphtheria vaccine launched

Indigenous tetanus and adult diphtheria vaccine launched

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (CRI) में स्वदेशी रूप से निर्मित ‘टिटनेस और वयस्क डिप्थीरिया’ (Td) वैक्सीन को लॉन्च किया। कसौली स्थित CRI, ‘गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस’ (GMP) मानकों के तहत वैक्सीन बनाने वाला भारत का पहला सरकारी संस्थान बन गया है।

टिटनेस (Tetanus) – “साइलेंट किलर”

  • परिचय: टिटनेस एक गैर-संक्रामक (non-communicable) बीमारी है, जो एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलती।
  • रोगजनक: यह Clostridium tetani नामक जीवाणु के कारण होता है। ये बैक्टीरिया मिट्टी, धूल और पशुओं के मल में बीजाणुओं (spores) के रूप में जीवित रहते हैं।
  • प्रवेश मार्ग: यह शरीर में कटी हुई त्वचा, गहरे घाव, जंग लगी वस्तुओं से लगी चोट या दूषित सर्जिकल उपकरणों के माध्यम से प्रवेश करता है।
  • प्रभाव (Mechanism): यह जीवाणु ‘टेटानोस्पासमिन’ (Tetanospasmin) नामक विष छोड़ता है, जो तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर हमला करता है।
  • प्रमुख लक्षण:
    • लॉकजॉ (Lockjaw): जबड़े की मांसपेशियों में जकड़न, जिससे मुंह खोलना मुश्किल हो जाता है।
    • Opisthotonos: मांसपेशियों में इतनी तीव्र ऐंठन कि रीढ़ की हड्डी धनुष के आकार में मुड़ जाती है।
  • निवारण: भारत ने 2015 में ‘मात्र एवं नवजात टिटनेस उन्मूलन’ (MNTE) का दर्जा प्राप्त किया था, लेकिन व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए बूस्टर खुराक अनिवार्य है।

डिप्थीरिया (Diphtheria) – “गले का अवरोधक”

  • परिचय: टिटनेस के विपरीत, डिप्थीरिया एक अत्यधिक संक्रामक (highly contagious) श्वसन रोग है।
  • रोगजनक: यह Corynebacterium diphtheriae जीवाणु के कारण होता है।
  • संचरण: यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सीधे संपर्क (droplet infection) से फैलता है।
  • प्रभाव (Mechanism): यह जीवाणु गले और नाक की श्लेष्मा झिल्ली को प्रभावित करता है। यह एक विष (Toxin) बनाता है जो स्वस्थ ऊतकों को नष्ट कर देता है।
  • प्रमुख लक्षण:
    • स्यूडोमेम्ब्रेन (Pseudomembrane): गले और टॉन्सिल के ऊपर एक मोटी, ग्रे (स्लेटी) रंग की झिल्ली बन जाती है, जो सांस लेने में बाधा डालती है।
    • बुल नेक (Bull Neck): गर्दन की ग्रंथियों में अत्यधिक सूजन। Loma Linda University Health – Hindi
  • जटिलताएँ: यह विष रक्तप्रवाह में मिलकर हृदय की मांसपेशियों (Myocarditis) और नसों को नुकसान पहुँचा सकता है।

सरकारी पहल:

  • भारत के संशोधित राष्ट्रीय टीकाकरण चार्ट के अनुसार, Td वैक्सीन निम्नलिखित अंतराल पर दी जाती है। भारत सरकार ने यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) के तहत अब ‘टिटनेस टॉक्सोइड’ (TT) वैक्सीन को बदलकर ‘टिटनेस और वयस्क डिप्थीरिया’ (Td) वैक्सीन करने का निर्णय लिया है।
  1. किशोर: 10 वर्ष और 16 वर्ष की आयु में। 
  2. गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था के दौरान 2 खुराक (या यदि पिछली गर्भावस्था 3 साल के भीतर हुई हो, तो 1 बूस्टर खुराक)। 
  3. बूस्टर: सामान्यतः हर 10 वर्ष में सुरक्षा बनाए रखने के लिए इसकी सिफारिश की जाती है

विशेष:  भारत ने WHO मैच्योरिटी लेवल-3 (ML3) हासिल कर लिया है, जो देश के वैक्सीन नियामक ढांचे की मजबूती को दर्शाता है। भारत का वर्तमान टीकाकरण कवरेज 99% तक पहुंच गया है।

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