Induction of solar-powered MAPSS surveillance drone by Indian Army

संदर्भ:
भारतीय सेना ने हाल ही में सौर ऊर्जा-संचालित ‘मीडियम एल्टीट्यूड पर्सिस्टेंट सर्विलांस सिस्टम’ (MAPSS) ड्रोन को शामिल करने के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम भारतीय सेना की निगरानी क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है।
सौर ऊर्जा-संचालित ‘मीडियम एल्टीट्यूड पर्सिस्टेंट सर्विलांस सिस्टम’ (MAPSS) ड्रोन:
MAPSS (मीडियम एल्टीट्यूड पर्सिस्टेंट सर्विलांस सिस्टम) एक इलेक्ट्रिक, सौर-संचालित मानव रहित हवाई वाहन (UAV) है, जिसे बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज (NRT) द्वारा रक्षा मंत्रालय के iDEX (इनोवेशन्स फॉर डिफेंस एक्सीलेंस) कार्यक्रम के तहत विकसित किया गया है।
- ईंधन स्रोत: यह मुख्य रूप से सौर ऊर्जा का उपयोग करता है, जिससे यह पारंपरिक बैटरी या ईंधन-आधारित ड्रोनों की तुलना में काफी लंबे समय तक हवा में रह सकता है।
- उड़ान सहनशक्ति (Endurance): इस ड्रोन को दिन-रात लगातार निगरानी प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। परीक्षणों में, प्रोटोटाइप 24 घंटे से अधिक समय तक 26,000 फीट से अधिक की ऊँचाई पर उड़ान भरने में सक्षम रहे हैं।
- संचालन की ऊँचाई: यह मध्यम ऊँचाई पर संचालित होता है, जो इसे उपग्रहों और कम ऊँचाई वाले सामरिक ड्रोनों के बीच के अंतर को कम करता है।
- कम आवाज: अपने इलेक्ट्रिक propulsion system के कारण, इसका ध्वनिक (आवाज) और थर्मल (गर्मी) हस्ताक्षर बहुत कम होता है, जिससे दुश्मन के रडार और सेंसर द्वारा इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
- पेलोड (Payload): यह इंटेलिजेंस, सर्विलांस, और टोही (ISR), इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT), और संचार रिले समर्थन के लिए विभिन्न सेंसर और उपकरणों को ले जा सकता है।
महत्व:
- निरंतर सीमा निगरानी: भारत की पाकिस्तान और चीन के साथ विस्तृत और चुनौतीपूर्ण सीमाओं पर MAPSS अवैध घुसपैठ, तस्करी, और दुश्मन सैनिकों की आवाजाही पर लगातार नजर रखने में मदद करेगी।
- लॉजिस्टिक्स समर्थन में कमी: दूरदराज और दुर्गम सीमावर्ती चौकियों पर ईंधन या बैटरी चार्जिंग के लिए बार-बार लॉजिस्टिक सहायता की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि ड्रोन सौर ऊर्जा से स्वयं को चार्ज कर सकता है।
- सामरिक लचीलापन: कम पता लगाने योग्य हस्तक्षेप के साथ, ड्रोन forward operating areas में गुप्त संचालन के लिए अत्यधिक उपयुक्त है।
- आत्मनिर्भर भारत पहल: यह परियोजना रक्षा मंत्रालय के iDEX कार्यक्रम की सफलता का एक प्रमुख उदाहरण है, जो घरेलू रक्षा स्टार्टअप्स को बढ़ावा देता है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूत करता है।
- आधुनिक युद्ध की तैयारी: रूस-यूक्रेन संघर्ष और ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025 में भारत-पाक सैन्य संघर्ष) जैसे हालिया युद्धों ने ड्रोन-आधारित युद्ध के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया है।
