INS Aridaman

संदर्भ:
हाल ही में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने घोषणा की कि INS अरिदमन अपने अंतिम हार्बर और सी ट्रायल चरण में पहुँच चुकी है और शीघ्र ही भारतीय नौसेना में शामिल की जाएगी। इसके शामिल होने से भारत के पास पहली बार तीन सक्रिय Arihant-class SSBNs (INS Arihant, INS Arighaat, INS Aridhaman) उपलब्ध होंगे, जो भारत की न्यूक्लियर ट्रायड में समुद्री आयाम को अत्यंत मजबूत बनाता है।
INS अरिदमन का परिचय:
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- INS अरिदमन भारत द्वारा निर्मित तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है, जिसे Advanced Technology Vessel (ATV) परियोजना के अंतर्गत विशाखापट्टनम स्थित शिप बिल्डिंग सेंटर में बनाया गया है। यह पनडुब्बी परमाणु-संचालित है और लंबी दूरी के पनडुब्बी-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलों (SLBM) से लैस है। इसे S4/SSBN 82 के नाम से भी जाना जाता है।
- उद्देश्य: इसका उद्देश्य भारत की द्वितीय प्रहार क्षमता (Second Strike Capability) को सुरक्षित और स्थायी आधार देना है।
- पृष्ठभूमि: 1974 के स्माइलिंग बुद्धा परीक्षण के बाद “Project 932” के माध्यम से स्वदेशी परमाणु प्रणोदन प्रणाली की व्यवहार्यता पर काम शुरू हुआ। 1998 के परमाणु परीक्षण के परिणामस्वरूप INS अरिदमन को लगभग 2017–18 में तैयार करना शुरू किया गया, नवंबर 2021 में लॉन्च किया गया और 2022–25 के बीच विस्तृत समुद्री तथा हथियार परीक्षण हुए।
INS अरिदमन की विशेषताएं:
- संरचना और आयाम: INS अरिधमन का ढांचा अरिहंत की तुलना में बड़ा है। इसकी कुल लंबाई लगभग 130 मीटर, बीम 11 मीटर, और ड्राफ्ट 9.5–10 मीटर है। पनडुब्बी का जल विस्थापन 6000 टन सतह पर और 7000 टन जलमग्न अवस्था में बताया गया है। इसमें 95–100 कर्मियों का दल कार्य कर सकता है।
- प्रणोदन प्रणाली: पनडुब्बी में 83 मेगावॉट CLWR-B1 कॉम्पैक्ट लाइट वाटर रिएक्टर लगा है, जिसे कलपक्कम में विकसित प्रोटोटाइप रिएक्टर के आधार पर बनाया गया है। यह प्रणाली सिंगल शाफ्ट और सात-ब्लेड प्रोपेलर को चला सकती है। इसके चलते सतह गति 12–15 नॉट और जलमग्न गति 24 नॉट तक पहुँचती है।
- हथियार प्रणाली: INS अरिधमन की मिसाइल क्षमता इसकी सबसे बड़ी शक्ति है— 8 VLS ट्यूब, जबकि अरिहंत में 4 ही थे। अधिकतम 24 K-15 (750 किमी) मिसाइलें या 8 K-4 (3500 किमी) मिसाइलें। इसके अलावा इसमें 6 × 533 मिमी टॉरपीडो ट्यूब भी हैं, जो वरुणास्त्र जैसे भारी टॉरपीडो दाग सकती हैं।
- सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली: पनडुब्बी में USHUS सोनार, पंचेन्द्रिय यूनिफाइड सोनार और टैक्टिकल सिस्टम, फ्लैंक एरे, टोएड एरे और आधुनिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं।
INS अरिदमन का महत्व:
- त्रि-आयामी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का सुदृढ़ीकरण: INS अरिदमन के शामिल होने से भारत की न्यूक्लियर ट्रायड समुद्र, थल और वायु—तीनों आयामों में और मजबूत हो जाती है। समुद्री हिस्से को दुनिया में सबसे विश्वसनीय माना जाता है क्योंकि यह गोपनीय और सर्वाधिक टिकाऊ है।
- क्षेत्रीय शक्ति संतुलन: चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों और इंडो-पैसिफिक में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अरिदमन भारत की रणनीतिक शक्ति को बढ़ाता है। यह भारत को निरंतर समुद्री पेट्रोलिंग की क्षमता प्रदान करेगा।
- स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी: L&T, टाटा, वालीचंदनगर इंडस्ट्रीज, BHEL जैसी कंपनियों की भागीदारी इसे भारत के स्वदेशी रक्षा उद्योग की सफलता का प्रतीक बनाती है।
- भविष्य की S5-श्रेणी का आधार: अरिदमन और संशोधित S4 परियोजना भविष्य की S5-श्रेणी (13,500 टन, लंबी दूरी की मिसाइलें) के डिजाइन के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी आधार तैयार करती है।
