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INS वाघशीर (INS Vaghsheer) | Apni Pathshala

INS Vaghsheer

INS Vaghsheer

संदर्भ:

हाल ही में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कर्नाटक के कारवार नौसेना बेस से स्वदेश निर्मित ‘कलवरी श्रेणी’ की पनडुब्बी INS वाघशीर (INS Vaghsheer) पर एक ऐतिहासिक समुद्री यात्रा की। 

  • श्रीमती द्रौपदी मुर्मु पनडुब्बी की सवारी करने वाली भारत की दूसरी राष्ट्रपति बनीं। उनसे पहले, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने फरवरी 2006 में INS सिंधुरक्षक पर ऐसी ही यात्रा की थी।

INS वाघशीर का परिचय:

INS वाघशीर प्रोजेक्ट-75 के तहत निर्मित छह स्कॉर्पीन (Scorpene) श्रेणी की पनडुब्बियों में से अंतिम पनडुब्बी है।

  • निर्माण: इसे मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा फ्रांस के ‘नेवल ग्रुप’ के तकनीकी सहयोग से ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनाया गया है।
  • कमीशनिंग: इसे आधिकारिक तौर पर 15 जनवरी 2025 को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
  • आयाम: लंबाई 67.5 मीटर और जलमग्न विस्थापन 1,775 टन।
  • मारक क्षमता: यह टॉरपीडो और एंटी-शिप मिसाइलों (Exocet) से लैस है।
  • स्टेल्थ (Stealth): इसमें उन्नत ध्वनिक अवशोषण तकनीक (Acoustic Absorption) और कम शोर स्तर है, जिससे यह दुश्मन के रडार से बचने में सक्षम है।
  • मिशन: एंटी-सरफेस वॉरफेयर, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, खुफिया जानकारी जुटाना और माइन बिछाना।

इसका महत्व:

  • हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में प्रभुत्व: यह पनडुब्बी हिंद महासागर में चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूती प्रदान करती है।
  • अंडरवाटर डिटेरेंस (Undersea Deterrence): ‘साइलेंट सेंटिनल्स’ के रूप में ये पनडुब्बियां भारत की रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं को संतुलित करती हैं।
  • आत्मनिर्भर भारत: प्रोजेक्ट-75 का सफल समापन रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता और उन्नत नौसैनिक प्लेटफार्मों के निर्माण की क्षमता को सिद्ध करता है।

विशेष: प्रोजेक्ट-75 (P-75) भारतीय नौसेना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण रक्षा कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य नौसेना की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाने के लिए स्वदेशी रूप से छह ‘कलवरी श्रेणी’ की अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों का निर्माण करना था। ये सभी पनडुब्बिया ‘एग्जोसेट’ (Exocet) एंटी-शिप मिसाइलों और भारी वजन वाले टॉरपीडो से लैस हैं।

इस परियोजना के तहत निर्मित सभी छह पनडुब्बियां अब भारतीय नौसेना का हिस्सा बन चुकी हैं:

  • INS कलवरी (INS Kalvari): दिसंबर 2017 में कमीशन की गई।
  • INS खंडेरी (INS Khanderi): सितंबर 2019 में कमीशन की गई।
  • INS करंज (INS Karanj): मार्च 2021 में कमीशन की गई।
  • INS वेला (INS Vela): नवंबर 2021 में कमीशन की गई।
  • INS वागीर (INS Vagir): जनवरी 2023 में कमीशन की गई।
  • INS वाघशीर (INS Vaghsheer): 15 जनवरी 2025 को आधिकारिक रूप से कमीशन की गई।

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