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Integrated Transport and Logistics Authority के गठन की मंजूरी, जानिए इस नए प्राधिकरण के बारे में

Integrated Transport and Logistics Authority के गठन की मंजूरी, जानिए इस नए प्राधिकरण के बारे में

Integrated Transport and Logistics Authority

संदर्भ:

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने भारत के परिवहन और अवसंरचना विकास (Transport Infrastructure Development) को एक नई दिशा देने के लिए एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (Integrated Transport and Logistics Authority – ITLA) के गठन को मंजूरी दी।

एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण क्या हैं?

  • परिचय: ITLA एक समर्पित विशेष प्रयोजन माध्यम (Special Purpose Vehicle – SPV) के रूप में स्थापित किया जा रहा एक प्राधिकरण है। यह भारत में एकीकृत लॉजिस्टिक्स योजना (Integrated Logistics Planning) और परिवहन क्षेत्र के लिए देश की सर्वोच्च एवं नियामक संस्था (Apex Institution) के रूप में कार्य करेगा।
  • उद्देश्य: यह संगठन मुख्य रूप से विखंडित नियोजन (Fragmented Planning) की समस्या को समाप्त करने और परिवहन मंत्रालयों के बीच संस्थागत समन्वय स्थापित करने के लिए जिम्मेदार होगा।
  • वैश्विक प्रथाओं का अनुकूलन: इस प्राधिकरण का ढांचा दक्षिण कोरिया, जापान, अमेरिका, चीन और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों की सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय पद्धतियों पर आधारित है।
  • आवश्यकता: वर्तमान में भारत का परिवहन क्षेत्र (Indian Transport Sector News) विभिन्न मंत्रालयों (सड़क, रेल, उड्डयन, जहाजरानी) में बंटा हुआ है। इससे योजनाएं अलग-अलग (In Isolation) बनती थीं, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ते थे।
    • भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए बुनियादी ढांचे की दक्षता (Infrastructure Efficiency) और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना अनिवार्य है, जिसके लिए एकीकृत ढांचा आवश्यक था। 
  • प्रमुख कार्य:
    • दीर्घकालिक मास्टर प्लान तैयार करना: यह प्राधिकरण सड़क, रेलवे, बंदरगाह, उड्डयन, अंतर्देशीय जलमार्ग, तटीय नौवहन और शहरी गतिशीलता को कवर करने वाला 10 वर्ष या उससे अधिक की अवधि का एक व्यापक राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान (National Transport Master Plan) तैयार करेगा।
    • परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन: केंद्र सरकार की ₹500 करोड़ या उससे अधिक लागत वाली सभी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन (Technical Appraisal) इसी प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा। (हालांकि, वित्तीय मूल्यांकन मौजूदा व्यवस्थाओं के माध्यम से ही जारी रहेगा)।
    • परिवहन परियोजना निगरानी (Transport Project Monitoring): यह बड़ी परियोजनाओं के कार्यान्वयन की वास्तविक समय (Real-time) पर निगरानी करेगा और विभिन्न मंत्रालयों के बीच आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए एक समन्वित समाधान तंत्र के रूप में कार्य करेगा।
    • नीतिगत सहायता एवं अनुसंधान: यह राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (National Logistics Policy) की समीक्षा और उसे अद्यतन (Update) करने में सरकार को महत्वपूर्ण सलाह और सहायता प्रदान करेगा।
    • राष्ट्रीय परिवहन डेटा भंडार: यह प्राधिकरण एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करेगा जो विभिन्न मंत्रालयों के डेटा साइलो (Data Silos) को तोड़ेगा।
    • डेटा स्रोतों का एकीकरण: इसके तहत GSTN ई-वे बिल, फास्टैग (FASTag), वाहन (Vahan) पोर्टल, जीपीएस (GPS)-आधारित सिस्टम और शहरी यातायात डेटा को एक साथ जोड़ा जाएगा।
    • फ्रेट-फ्लो एनालिटिक्स: इस एकीकृत डेटा का उपयोग माल ढुलाई के प्रवाह (Freight Flow) और ओरिजिन-डेस्टिनेशन विश्लेषण के लिए किया जाएगा।

इसका महत्व:

  • मल्टीमॉडल परिवहन प्रणाली (Multimodal Transport System India) का सुदृढ़ीकरण: विभिन्न परिवहन माध्यमों (सड़क, रेल, जलमार्ग) के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी स्थापित होने से माल और यात्रियों की आवाजाही सुगम होगी।
  • लॉजिस्टिक्स लागत में कमी (Logistics Cost Reduction India): वर्तमान में भारत की लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के उच्च स्तर पर है, जिसे विकसित देशों के स्तर (लगभग 8%) पर लाने का लक्ष्य है। डेटा-संचालित नियोजन और पारगमन समय (Transit Time) में कमी से इसमें भारी गिरावट आएगी।
  • संसाधनों का इष्टतम उपयोग: मंत्रालयों के बीच दोहरे निवेश (Duplication of Investments) को रोककर यह प्राधिकरण करदाताओं के पैसे और राष्ट्रीय संसाधनों की बचत सुनिश्चित करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी क्या है?

उत्तर: यह भारत में एकीकृत परिवहन योजना, अनुसंधान, डेटा एनालिटिक्स और बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के तकनीकी मूल्यांकन हेतु गठित एक शीर्ष विशेष प्रयोजन माध्यम (SPV) है।

प्रश्न 2: इस नए प्राधिकरण के गठन को मंजूरी क्यों दी गई है?

उत्तर: विभिन्न परिवहन मंत्रालयों के बीच विखंडित नियोजन (Fragmented Planning) और कार्यान्वयन की पुरानी चुनौतियों को समाप्त कर कुशल समन्वय स्थापित करने के लिए।

प्रश्न 3: इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी के प्रमुख कार्य क्या होंगे?

उत्तर: इसके प्रमुख कार्यों में 10-वर्षीय राष्ट्रीय मास्टर प्लान बनाना, ₹500 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का मूल्यांकन करना और राष्ट्रीय डेटा भंडार तैयार करना शामिल है।

प्रश्न 4: यह प्राधिकरण भारत की परिवहन व्यवस्था को कैसे बेहतर बनाएगा?

उत्तर: यह सड़क, रेल, हवाई और जलमार्गों को एक साझा ढांचे के तहत जोड़कर मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे की दक्षता को बढ़ाएगा।

प्रश्न 5: इस नए प्राधिकरण से लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में कैसे मदद मिलेगी?

उत्तर: यह फास्टैग और ई-वे बिल के डेटा विश्लेषण (Freight-flow Analytics) के जरिए परिवहन में होने वाली देरी और अक्षमताओं को दूर कर लागत कम करेगा।

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