International campaign launched to get Jharkhand ancient megalithic landscapes UNESCO World Heritage Site status

संदर्भ:
झारखंड सरकार ने राज्य के प्राचीन महापाषाणकालीन परिदृश्यों (Megalithic Landscapes) को यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिलाने के लिए एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक और यूनाइटेड किंगडम (UK) की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान इन स्थलों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया है।
झारखंड के महापाषाण:
महापाषाण (Megaliths) बड़े पत्थरों से बनी संरचनाएं हैं, जिनका उपयोग प्रागैतिहासिक काल में कब्रों, स्मारकों या खगोलीय वेधशालाओं के रूप में किया जाता था।
- लिविंग ट्रेडिशन (जीवंत परंपरा): झारखंड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ महापाषाण संस्कृति जीवंत परंपरा है। मुंडा, हो, उरांव और असुर जैसे आदिवासी समुदाय आज भी अपने पूर्वजों की स्मृति में ‘सासनदिरी’ (burial slabs) स्थापित करते हैं।
- भू-वैज्ञानिक आधार: ये स्थल सिंहभूम क्रेटन (Singhbhum Craton) पर स्थित हैं, जो पृथ्वी के सबसे पुराने स्थिर भू-भागों में से एक है (लगभग 3.3 बिलियन वर्ष पुराना)।
प्रमुख महापाषाण स्थल:
- चोकाहातु (रांची): इसे भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा जीवंत महापाषाण स्थल माना जाता है। यहाँ लगभग 8,000 से अधिक पत्थर (मेनहिर और डोलमेन) मुंडा समुदाय द्वारा पूर्वजों की याद में लगाए गए हैं।
- पंकरी बरवाडीह (हजारीबाग): इसे ‘प्राचीन खगोलीय वेधशाला’ माना जाता है। यहाँ के पत्थर सूर्य की गति और विषुव (Equinox) के साथ संरेखित हैं। इसकी तुलना अक्सर ब्रिटेन के स्टोनहेंज (Stonehenge) से की जाती है।
- इस्को गुफाएं और मांड्रो फॉसिल पार्क: ये स्थल प्राचीन रॉक आर्ट और जीवाश्मों के माध्यम से पृथ्वी के गहरे समय (Deep Time) और मानव संस्कृति के सातत्य को दर्शाते हैं।
