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अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस (International cheetah day) | Apni Pathshala

International cheetah day

International cheetah day

संदर्भ: 

हर वर्ष 4 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य दुनिया के सबसे तेज भूमि स्तनपायी चीता (Acinonyx jubatus) के तेजी से घटते अस्तित्व के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है, ताकि समुदायों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच समन्वित संरक्षण प्रयास बढ़ सकें।

अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस: 

  • परिचय: अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस (International Cheetah Day) दुनिया की सबसे तेज़ भूमि जीव प्रजाति चीता के संरक्षण के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय दिवस है।
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य चीते की घटती आबादी, उसके आवास नुकसान, अवैध शिकार, जीन विविधता संकट और मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्रकाश में लाना है।
  • संस्था: इस दिवस को औपचारिक रूप से Cheetah Conservation Fund (CCF) द्वारा मनाया जाता है।
  • पृष्ठभूमि: 4 दिसंबर 2011 को विश्व के एक प्रसिद्ध चीता संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. लॉरी मार्कर (Cheetah Conservation Fund – CCF की संस्थापक) ने इसे आधिकारिक रूप से शुरू किया था। इसके बाद यह तिथि वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त दिवस बन गई।

चीता संकट की वैश्विक स्थिति:

    • वैश्विक आबादी में गिरावट: दुनिया में चीतों की आबादी पिछले कुछ दशकों में बेहद तेज़ी से घटी है और आज इनकी संख्या लगभग 7,100 रह गई है। चीता अब अपने 91% ऐतिहासिक आवास क्षेत्र से गायब हो चुका है, जो किसी भी बड़े स्तनपायी प्रजाति के लिए अत्यंत चिंताजनक आँकड़ा है। पिछले 15 वर्षों में 37% कमी दर्ज की गई है। शिकार योग्य जीवों की कमी, अवैध शिकार, भूमि रूपांतरण और शहरीकरण से इनके अस्तित्व को खतरा पहुंचा रहे हैं।
    • एशियाई चीता पर संकट: एशियाई चीता दुनिया की सबसे संकटग्रस्त बिल्ली प्रजातियों में है और वर्तमान में केवल ईरान में लगभग 40–50 की संख्या में बचा है। यह उप-प्रजाति कभी भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक फैली थी, परंतु अब लगभग पूर्ण रूप से विलुप्त हो चुकी है। IUCN ने इसे “Critically Endangered” में रखा है, जो दर्शाता है कि यह उप-प्रजाति विलुप्ति के अंतिम चरण में है।
  • अफ्रीकी चीते पर मानव दबाव: अफ्रीका में चीते लगभग 6,500–7,000 की संख्या में बचे हैं। यह आबादी कई छोटे, पृथक संरक्षण क्षेत्रों में बंटी हुई है। बड़े पैमाने पर कृषि विस्तार, निजी भूमि पर पशुपालन और मवेशी की सुरक्षा के नाम पर होने वाले प्रतिशोध इनके लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।

भारत में चीता संरक्षण:

  • भारत में चीते को 1952 में आधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित किया गया। यह भारत में मानव-जनित विलुप्ति का पहला बड़ा उदाहरण माना जाता है।
  • भारत सरकार ने 70 साल बाद चीतों की वापसी के लिए ‘प्रोजेक्ट चीता‘ सितंबर 2022 में शुरू किया, जो 2021 में सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद लागू हुआ। इसका लक्ष्य नामीबियादक्षिण अफ्रीका से चीतों को मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में पुनर्वासित करना है।
  • सितंबर 2022 में नामीबिया से 8 चीते और फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते भारत लाए गए। इन सभी को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में सॉफ्ट-रिलीज़ मॉडल के तहत छोड़ा गया।
  • भारत में कुल 32 चीते, जिनमें 21 भारत में जन्मे शावक शामिल हैं। यह किसी भी पुनर्वास परियोजना के लिए असाधारण उपलब्धि है।
  • नवंबर 2025 में मादा चीता मुखी द्वारा 5 शावकों का जन्म परियोजना की दीर्घकालिक सफलता का मजबूत संकेत है। भारत में जन्मे शावकों की 61% जीवितता दर वैश्विक मानक से बेहतर है।
  • सरकार का लक्ष्य एक ऐसा नेटवर्क बनाना है जिसमें कूनो, गांधी सागर, नौरादेही और मुकुंदरा जैसे कई अभयारण्य जुड़कर चीता मेटापॉपुलेशन बनाएँ, जिससे आबादी स्थिर और आनुवंशिक रूप से मजबूत रह सके।

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