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अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International energy agency) | UPSC Preparation

International energy agency

International energy agency

संदर्भ:

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपने इतिहास के सबसे बड़े आपातकालीन तेल भंडार को जारी करने की घोषणा की है। आईईए के 32 सदस्य देशों ने मिलकर 400 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी करने का फैसला किया है, जो 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान जारी किए गए 182 मिलियन बैरल से दोगुने से भी अधिक है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के बारे में:

  • परिचय: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) एक स्वायत्त अंतर-सरकारी संगठन है जो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, डेटा विश्लेषण और सतत ऊर्जा नीतियों को सुनिश्चित करने के लिए कार्य करता है।
  • स्थापना: इसकी स्थापना 1974 में पेरिस में की गई थी। यह 1973 के अरब तेल संकट के जवाब में औद्योगिक देशों द्वारा सामूहिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था।
  • मुख्यालय: आईईए का मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में स्थित है।
  • मूल ढांचा: यह OECD (आर्थिक सहयोग और विकास संगठन) के ढांचे के भीतर एक स्वायत्त निकाय के रूप में कार्य करता है।
  • सदस्यता: वर्तमान में इसके 32 पूर्ण सदस्य हैं (कोलंबिया 2026 में 33वां सदस्य बनने की प्रक्रिया में है)। सदस्य बनने के लिए देश का OECD सदस्य होना अनिवार्य है।
  • संबद्ध सदस्य: भारत, चीन और ब्राजील सहित 13 देश इसके संबद्ध सदस्य हैं। 
  • मुख्य रणनीति (3Es): आईईए की कार्यप्रणाली तीन स्तंभों पर आधारित है: ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security), आर्थिक विकास (Economic Development), और पर्यावरण जागरूकता (Environmental Awareness)
  • आपातकालीन तेल भंडार: प्रत्येक सदस्य देश के लिए अपने पिछले वर्ष के शुद्ध आयात के कम से कम 90 दिनों के बराबर आपातकालीन तेल भंडार बनाए रखना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
  • शासी बोर्ड (Governing Board): यह आईईए का मुख्य निर्णय लेने वाला निकाय है, जिसमें सदस्य देशों के ऊर्जा मंत्री या वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
  • नेतृत्व: इसके प्रशासनिक सचिवालय का नेतृत्व कार्यकारी निदेशक (वर्तमान में डॉ. फातिह बिरोल) करते हैं।
  • प्रमुख प्रकाशन: यह ‘World Energy Outlook’ और ‘Monthly Oil Market Report’ जारी करता है, जो वैश्विक ऊर्जा आंकड़ों के लिए स्वर्ण मानक माने जाते हैं।

 भारत और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA):

  • संबद्धता: भारत 2017 में IEA का ‘संबद्ध सदस्य’ (Associate Member) बना, जिससे वैश्विक ऊर्जा चर्चाओं में भारत का प्रभाव बढ़ा।
  • साझेदारी: 2021 में दोनों ने सामूहिक ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को मजबूत करने हेतु एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • पूर्ण सदस्यता: फरवरी 2024 में, IEA मंत्रियों ने भारत के पूर्ण सदस्य बनने हेतु बातचीत शुरू करने की ऐतिहासिक घोषणा की।
    • पूर्ण सदस्य बनने के लिए भारत को अपने शुद्ध तेल आयात के 90 दिनों के बराबर आपातकालीन भंडार रखना होगा (वर्तमान में भारत के पास लगभग 74 दिनों का भंडार है)।
  • स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व: IEA ने भारत के LiFE (Lifestyle for Environment) अभियान और नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों की वैश्विक स्तर पर सराहना की है।
    • भारत अपनी ऊर्जा सांख्यिकी IEA के साथ साझा करता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा पूर्वानुमानों की सटीकता बढ़ती है।
    • IEA की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत वैश्विक तेल मांग में वृद्धि का सबसे बड़ा केंद्र होगा।
    • आईईए भारत को एक गैस-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने और राष्ट्रीय गैस ग्रिड विस्तार में तकनीकी सहायता प्रदान करता है।

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