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अंतर्राष्ट्रीय मलेरिया सम्मेलन 2026 (International Malaria Conference 2026) | UPSC Preparation

International Malaria Conference 2026

International Malaria Conference 2026

संदर्भ:

हाल ही में, नई दिल्ली में 7 से 9 मार्च 2026 तक तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मलेरिया सम्मेलन (IMC 2026) का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का आयोजन ICMR-राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान (NIMR) द्वारा किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य मलेरिया उन्मूलन के लिए वैश्विक सहयोग और वैज्ञानिक नवाचारों को साझा करना था।

सम्मेलन के मुख्य बिंदु:

  • मुख्य विषय (Theme): “Discovery, Development and Delivery: Driving Malaria Elimination and Beyond”।
  • स्तंभ (Pillars): सम्मेलन मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर केंद्रित था:
    • खोज (Discovery): परजीवी जीव विज्ञान, संचरण गतिशीलता और दवा प्रतिरोध (Drug Resistance) के आणविक तंत्र पर चर्चा।
    • विकास (Development): नैदानिक नवाचारों (Diagnostics) और निगरानी प्रौद्योगिकियों (Surveillance tools) पर जोर।
    • वितरण (Delivery): वैज्ञानिक खोजों को सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों में बदलना और वैक्सीन अनुसंधान को साझा करना। 
  • नवाचार: सम्मेलन में RTS,S और R21/Matrix-M जैसी मलेरिया वैक्सीनों के बढ़ते उपयोग पर चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त, ‘रेजिडुअल मलेरिया ट्रांसमिशन’ (नियंत्रण उपायों के बाद भी जारी रहने वाला संचरण) को रोकने के लिए नई तकनीकों पर बल दिया गया।

मलेरिया उन्मूलन में भारत की प्रगति:

    • HBHI से बाहर: भारत 2024 में WHO के ‘High Burden to High Impact’ (HBHI) समूह से बाहर निकलने वाला एकमात्र देश बना।
    • मामलों में कमी: 2015 से 2023 के बीच भारत में मलेरिया के मामलों में लगभग 80% और मौतों में 78.38% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
    • राष्ट्रीय लक्ष्य:
      • 2027 तक: देश भर में स्वदेशी संचरण (Indigenous transmission) को पूरी तरह से रोकना।
      • 2030 तक: भारत को पूर्ण रूप से मलेरिया मुक्त बनाना। 
  • सरकारी योजनाएं:
  • राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन ढांचा (NFME) 2016-2030: चरणबद्ध तरीके से उन्मूलन का रोडमैप।
  • राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (NSP) 2023-2027: ‘Test, Treat and Track’ (TTT) रणनीति पर केंद्रित।
  • MERA India: मलेरिया उन्मूलन अनुसंधान गठबंधन जो नवाचारों को बढ़ावा देता है। 

प्रमुख चुनौतियां:

  • Plasmodium vivax: यह परजीवी यकृत (liver) में निष्क्रिय अवस्था में रह सकता है, जिससे मलेरिया दोबारा होने (Relapse) का खतरा रहता है।
  • कीटनाशक प्रतिरोध: मच्छरों में कीटनाशकों के प्रति बढ़ती प्रतिरोधकता।
  • सीमा पार संचरण: पड़ोसी देशों से होने वाला मलेरिया आयात (Imported malaria)। 
मलेरिया: 

  • परिचय: मलेरिया एक गंभीर और कभी-कभी जानलेवा परजीवी बीमारी है। यह प्लाज्मोडियम (Plasmodium) नामक प्रोटोजोआ परजीवी के कारण होने वाला संक्रमण है।
  • संचरण (Vector): यह मुख्य रूप से संक्रमित मादा एनाफिलीज (Anopheles) मच्छर के काटने से फैलता है।
  • मुख्य परजीवी: मनुष्यों को संक्रमित करने वाली पाँच प्रजातियाँ हैं, जिनमें P. falciparum (सबसे घातक) और P. vivax भारत में सबसे आम हैं।
  • लक्षण: इसमें तेज बुखार, कंपकंपी के साथ ठंड लगना, सिरदर्द, पसीना आना और मांसपेशियों में दर्द शामिल है।
  • ऊष्मायन अवधि (Incubation): मच्छर के काटने के 10 से 14 दिनों बाद आमतौर पर लक्षण दिखाई देते हैं।
  • प्रभावित अंग: परजीवी सबसे पहले लिवर में विकसित होते हैं और फिर लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) को नष्ट करते हैं।
  • जांच (Diagnosis): रक्त की सूक्ष्मदर्शी जांच (Peripheral Smear) और रैपिड एंटीजन टेस्ट (RDT) प्रमुख नैदानिक तरीके हैं।
  • जटिलताएँ: इलाज न होने पर यह दिमागी मलेरिया (Cerebral Malaria), एनीमिया और ऑर्गन फेलियर का कारण बन सकता है।
  • उपचार: इसके लिए आर्टेमिसिनिन-आधारित संयोजन थेरेपी (ACT) और क्लोरोक्वीन जैसी दवाओं का उपयोग किया जाता है।
  • बचाव: जलभराव रोकना, मच्छरदानी का उपयोग और मच्छर भगाने वाली क्रीम का प्रयोग इसके प्रमुख बचाव उपाय हैं।

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