International Space Station
International Space Station –
संदर्भ:
हाल ही में Axiom-4 मिशन के तहत भारत ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक सफलतापूर्वक यात्रा की। वे न केवल ISS तक पहुँचने वाले पहले भारतीय बने, बल्कि राकेश शर्मा के 1984 के मिशन के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय भी बन गए हैं।
Axiom Mission 4 (Ax-4): परिचय
- Ax-4 Axiom Space द्वारा संचालित चौथा निजी मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना और सूक्ष्म गुरुत्व में उन्नत अनुसंधान करना है।
शामिल संगठन:
- Axiom Space – मिशन आयोजक
- NASA – अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर मेज़बान
- SpaceX – लॉन्च वाहन (Falcon 9) और ड्रैगन कैप्सूल का प्रदाता
प्रक्षेपण स्थल व समय:
- लॉन्च पैड: LC-39A, कैनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा
- लॉन्च तिथि: 25 जून 2025
- मिशन अवधि: लगभग 14 दिन, ISS पर रहने की योजना
उद्देश्य:
- अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ावा देना
- माइक्रोग्रैविटी में अनुसंधान, जैसे:
- सूक्ष्म जैवविज्ञान
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता
- सामग्री विज्ञान
- कृषि तकनीक
चालक दल के सदस्य:
- पेगी व्हिटसन (USA)
- शुभांशु शुक्ला (India)
- स्लावोज़ उज़्नान्स्की (Poland)
- टिबोर कापू (Hungary)
ISS क्या है?
- अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) अब तक का सबसे बड़ा मानव निर्मित अंतरिक्ष ढांचा है।
- इसे 20 नवंबर 1998 को लॉन्च किया गया था।
- यह अंतरिक्ष में मानव आवास के रूप में कार्य करता है और 2011 से लगातार आबाद है।
सहभागी देश:
- NASA (संयुक्त राज्य अमेरिका)
- Roscosmos (रूस)
- ESA (यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी), JAXA (जापान), CSA (कनाडा)
कक्षा व गति:
- कक्षा: पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर
- गति (Speed): लगभग 28,000 किलोमीटर/घंटा
- पृथ्वी की एक परिक्रमा हर 90 मिनट में पूरी करता है।
उद्देश्य:
- अंतरिक्ष और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (microgravity) पर अनुसंधान
- नवीन वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना
- मानव अंतरिक्ष यात्रा की तैयारी व तकनीकी परीक्षण
- वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) का महत्व:
- वैश्विक सहयोग का प्रतीक– ISS अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और शांति का एक सफल उदाहरण है, जहाँ कई देश मिलकर काम करते हैं।
- लंबी अंतरिक्ष यात्राओं का परीक्षण केंद्र– यह स्टेशन मंगल और चंद्रमा जैसे मिशनों के लिए आवश्यक दीर्घकालिक अंतरिक्ष यात्राओं की तैयारी में सहायक है।
- स्पेस मेडिसिन में शोध– माइक्रोग्रैविटी में शोध से अल्जाइमर, पार्किंसन और कैंसर जैसी बीमारियों को समझने और इलाज की दिशा में मदद मिलती है।
- मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रशिक्षण– ISS ने अंतरिक्ष यात्रियों को भविष्य की गहन अंतरिक्ष यात्राओं के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण और अनुभव प्रदान किया है।