Investment of ₹26,069.50 crore has been approved for the Kamala Hydroelectric Project in Arunachal Pradesh
संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार के पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) ने अरुणाचल प्रदेश में स्थित कमला जलविद्युत परियोजना (Kamala Hydroelectric Project) के लिए ₹26,069.50 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी है। यह परियोजना भारत के 2070 तक ‘नेट ज़ीरो’ (Net Zero) उत्सर्जन लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
परियोजना का संक्षिप्त विवरण:
- क्षानी क्षमता: 1,720 मेगावाट (MW)।
- वार्षिक उत्पादन: लगभग 6,869.92 मिलियन यूनिट (MU) हरित ऊर्जा।
- अनुमानित लागत: ₹26,069.50 करोड़।
- निर्माण अवधि: कार्य शुरू होने से लगभग 8 वर्ष (96 महीने)।
- कार्यान्वयन मॉडल: यह ‘बिल्ड-ओन-ऑपरेट-ट्रांसफर’ (BOOT) आधार पर एक संयुक्त उद्यम (JV) के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी।
- पूर्व नाम: इसे पहले ‘सुबनसिरी मिडिल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट’ (Subansiri Middle HEP) के नाम से जाना जाता था।
भौगोलिक स्थिति और नदी:
- नदी: यह परियोजना कमला नदी पर बनाई जा रही है, जो सुबनसिरी नदी (ब्रह्मपुत्र की प्रमुख सहायक नदी) की एक महत्वपूर्ण उप-सहायक नदी है।
- स्थान: यह अरुणाचल प्रदेश के कमले (Kamle), क्रा दादी (Kra Daadi), और कुरुंग कुमे (Kurung Kumey) जिलों में विस्तृत है।
तकनीकी और संरचनात्मक विशेषताएं:
- बांध संरचना: एक 216 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनाया जाएगा।
- पावर हाउस: परियोजना में एक भूमिगत पावर हाउस (Underground Powerhouse) शामिल है।
- बिजली इकाइयां: मुख्य संयंत्र में 216 मेगावाट की 8 इकाइयां और बांध के तल (Dam Toe) पर 36 मेगावाट की 2 इकाइयां प्रस्तावित हैं।
- भंडारण योजना: यह एक भंडारण-आधारित (Storage-based) योजना है जिसमें बाढ़ न्यूनीकरण (Flood Moderation) का घटक भी शामिल है।
वित्तीय और प्रशासनिक ढांचा:
- हिस्सेदारी: इसमें NHPC लिमिटेड की 74% और अरुणाचल प्रदेश सरकार की 26% इक्विटी हिस्सेदारी होगी।
- ऋण-इक्विटी अनुपात: वित्तीय पोषण 70:30 के ऋण-इक्विटी अनुपात के आधार पर होगा।
- सरकारी सहायता: केंद्र सरकार बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए ₹1,340 करोड़ और बाढ़ नियंत्रण घटक के लिए ₹4,744 करोड़ का अनुदान देगी। साथ ही, राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) की 100% प्रतिपूर्ति की जाएगी।
सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व:
- बाढ़ नियंत्रण: बांध में 15 मीटर का विशेष ‘कुशन’ रखा गया है, जो ब्रह्मपुत्र घाटी में बाढ़ की विभीषिका को कम करने में मदद करेगा।
- ऊर्जा सुरक्षा: यह पूर्वोत्तर ग्रिड को स्थिरता प्रदान करेगा और भारत के नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो को मजबूत करेगा।
- स्थानीय विकास: राज्य को 12% मुफ्त बिजली मिलेगी। इसके अलावा, स्थानीय क्षेत्र विकास कोष (LADF) में प्रति वर्ष ₹40 करोड़ का योगदान दिया जाएगा।
- रोजगार: निर्माण चरण के दौरान बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे का विकास होगा।

