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जानिए Kashmiri Wagoo Mat की ख़ासियतें, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात किया

जानिए Kashmiri Wagoo Mat की ख़ासियतें, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात किया

Kashmiri Wagoo Mat

Image Credit: DD News 

संदर्भ: 

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ (136वें संस्करण) में जम्मू-कश्मीर की लुप्तप्राय पारंपरिक ‘वगू’ चटाई (Kashmiri Wagoo Mat) का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने इसे पुनर्जीवित करने वाले श्रीनगर के कारीगर गुलाम हुसैन और उनकी बेटी तंजीला के प्रयासों की सराहना की। 

कश्मीरी पारंपरिक ‘वगू’ चटाई (Kashmiri Wagoo Mat) के बारे में:

  • परिचय: वगू (स्थानीय भाषा में ‘वगुव’ या ‘पतिग’) कश्मीर घाटी की लगभग 300 वर्ष पुरानी एक पारंपरिक हस्तनिर्मित चटाई (Handmade Mats) है। 
  • कच्ची सामग्री: इसे प्राकृतिक नरकट (Reed) जिसे स्थानीय रूप से ‘पेच’ (Peicz/Typha angustifolia) कहा जाता है, और सूखे धान के भूसे (Rice Straw) को आपस में गूंथकर बनाया जाता है। यह दलदली और झीलों के किनारे उगने वाली प्राकृतिक घास होती है। 
  • विशेषताएं:
    • बुनाई की तकनीक (Weaving Technique): इसके निर्माण में किसी जटिल मशीनरी का उपयोग नहीं होता। कारीगर एक साधारण लकड़ी के लूम (Simple Loom) पर अपने हाथों की कुशलता से नरकट और पुआल को परस्पर जोड़ते हैं।
    • बनावट और तापीय गुण (Texture & Thermal Properties): इसकी बनावट अत्यधिक मजबूत, ठोस और पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) होती है। इसकी सबसे बड़ी विशिष्टता यह है कि यह सर्दियों में अत्यधिक गर्माहट और गर्मियों में शीतलता (Cooling Effect) प्रदान करती है। 
    • कलाकृति एवं रंग (Artwork and Colors): मूल रूप से यह प्राकृतिक भूरे और सुनहरे रंग की होती है। हालांकि, आधुनिक सजावटी मांग को देखते हुए अब कारीगर इसके किनारों को चमकीले रंगों में रंगकर इस पर ज्यामितीय आकृतियां और पुष्प पैटर्न (Floral Designs) भी उकेरने लगे हैं।
  • इतिहास: इसका ऐतिहासिक संदर्भ 18वीं शताब्दी के मुगल शासनकाल से मिलता है। इतिहासकार वाल्टर आर. लॉरेंस ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘द वैली ऑफ कश्मीर’ में कश्मीरी लोगों द्वारा ‘पेच’ घास से उत्कृष्ट चटाई (Waguv) बनाने की कला का विशेष उल्लेख किया है।
  • सांस्कृतिक महत्व: कश्मीर के पारंपरिक घरों, धार्मिक स्थलों, सूफी दरगाहों और प्रसिद्ध हाउसबोट्स (Houseboats) में फर्श पर बिछाने के लिए वगू प्राथमिक माध्यम हुआ करता था। कालीन या बिस्तरों के नीचे नमी और ठंडक से बचने के लिए इसे अनिवार्य रूप से बिछाया जाता था। 
  • व्यापार: हाल ही में इस हस्तशिल्प को भारत सरकार की भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री द्वारा जीआई टैग (GI Tag) देने की प्रक्रिया के तहत शामिल किया गया है। वर्तमान में तंजीला जैसी युवा महिला उद्यमियों के नेतृत्व में 40 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को इसका प्रशिक्षण देकर इसके घरेलू और वैश्विक ई-कॉमर्स व्यापार (जैसे Kashmir Origin) को पुनर्जीवित किया जा रहा है। 

कश्मीर के अन्य प्रसिद्ध हस्तनिर्मित उत्पाद (Other Famous Kashmiri Handicrafts):

  • कश्मीरी पश्मीना (Kashmiri Pashmina): चांगथांगी चांगरा बकरियों के महीन ऊन से हाथ से काती और बुनी जाने वाली यह दुनिया की सबसे महंगी और आलीशान शॉल है।
  • कनी शॉल (Kani Shawl): कनी शॉल की बुनाई के लिए लकड़ी की विशेष सुइयों (Spokes) का उपयोग किया जाता है। इसकी जटिल बुनाई डिजाइन को एक कूट भाषा (Talim) के माध्यम से पढ़ा जाता है।
  • कश्मीरी कालीन (Kashmiri Silk Carpet): शुद्ध रेशम (Silk-on-Silk) से हाथ से बुने जाने वाले ये कालीन अपने जटिल डिजाइनों और दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हैं।
  • कागज़ की लुगदी कला (Paper Mache): कागज के गूदे को सुखाकर उस पर हाथ से की जाने वाली बारीक सोने की चित्रकारी और मीनाकारी की यह कला ईरान से कश्मीर आई थी।
  • अखरोट की लकड़ी पर नक्काशी (Walnut Wood Carving): कश्मीर में पाए जाने वाले अखरोट के पेड़ों की कठोर लकड़ी पर बारीक नक्काशी करके सुंदर फर्नीचर और कलाकृतियां बनाई जाती हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: वगू चटाई क्या है?

उत्तर: वगू (Wagoo Mat) कश्मीर घाटी की एक पारंपरिक, पूरी तरह से हाथ से बुनी जाने वाली प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल चटाई है।

प्रश्न 2: कश्मीर की वगू चटाई किस सामग्री से बनाई जाती है?

उत्तर: इसे स्थानीय दलदली क्षेत्रों में उगने वाली ‘पेच’ घास (Typha angustifolia) और सूखे धान के पुआल को आपस में गूंथकर बनाया जाता है।

प्रश्न 3: वगू चटाई का सांस्कृतिक महत्व क्या है?

उत्तर: यह कश्मीरी संस्कृति में आतिथ्य का प्रतीक है, जिसे पारंपरिक घरों, सूफी दरगाहों और डल झील के हाउसबोट्स में फर्श पर बिछाया जाता है।

प्रश्न 4: इसे बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया क्या है?

उत्तर: कारीगर घास को काटकर धूप में सुखाते हैं और फिर एक साधारण लकड़ी के करघे (Loom) पर हाथों से इसकी जटिल बुनाई करते हैं।

प्रश्न 5: क्या वगू चटाई को GI टैग मिला है?

उत्तर: नहीं, कश्मीर के इस लुप्तप्राय सांस्कृतिक शिल्प को बचाने के लिए इसे जीआई (Geographical Indication) टैग के दायरे में अभी शामिल नहीं किया गया है।

प्रश्न 6: कश्मीर के किन क्षेत्रों में यह चटाई बनाई जाती है?

उत्तर: यह मुख्य रूप से श्रीनगर (सोनवार और डल झील के आस-पास) और गांदरबल जिले के ग्रामीण बेल्ट में चुनिंदा कारीगर परिवारों द्वारा बनाई जाती है।

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