Kavach 4.0
संदर्भ:
भारतीय रेलवे ने कवच 4.0 को सफलतापूर्वक 738 किलोमीटर रूट पर लागू कर दिया है। इसमें दिल्ली–मुंबई मार्ग पर पलवल–मथुरा–नगदा खंड (633 Rkm) और दिल्ली–कोलकाता मार्ग पर हावड़ा–बर्धमान खंड (105 Rkm) शामिल हैं।
कवच प्रणाली का परिचय:
- परिचय: कवच एक स्वदेशी विकसित ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है। यह अत्यंत उच्च तकनीकी आधारित सिस्टम है और इसे SIL-4 सुरक्षा प्रमाणन की आवश्यकता होती है। कवच 4.0 एक ‘डिजिटल शील्ड’ की तरह काम करता है।
- उद्देश्य: कवच का उद्देश्य लोको पायलट की गलती या अनियंत्रित गति को रोकना और खराब मौसम में भी सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करना है। कावच प्रणाली का प्रमुख उद्देश्य रेल यातायात की सुरक्षा बढ़ाना है।
- विकास: कवच का प्रथम फील्ड ट्रायल फरवरी 2016 में शुरू हुआ। अनुभव और स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन (ISA) के आधार पर तीन कंपनियों को 2018-19 में कवच 3.2 के आपूर्ति के लिए अनुमोदित किया गया। जुलाई 2020 में इसे राष्ट्रीय ATP सिस्टम के रूप में अपनाया गया।
- कवच 4.0 की विशेषताएँ:
- बढ़ी हुई लोकेशन सटीकता (Location Accuracy)
- बड़े यार्ड में सिग्नल जानकारी में सुधार
- स्टेशन से स्टेशन कवच इंटरफेस ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) पर
- मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के लिए डायरेक्ट इंटरफेस
- कार्यप्रणाली: कवच 4.0 सेंसर, RFID और ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) का उपयोग करके ट्रेन की गति पर लगातार नज़र रखती है, पायलट द्वारा सिग्नल अनदेखी या गति सीमा उल्लंघन पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगाती है, और कोहरे जैसी खराब दृश्यता में भी डैशबोर्ड पर सिग्नल और गति की जानकारी देती है, जिससे टक्करों और हादसों को रोकने में मदद मिलती है।
- तकनीकी सुधार (4.0): कवच प्रणाली में प्रत्येक स्टेशन और ब्लॉक सेक्शन पर स्टेशन कावच की स्थापना की गई है। इसी के साथ ट्रैक लंबाई में RFID टैग्स की स्थापना, खंड में टेलिकॉम टॉवर्स की स्थापना शामिल है।
- महत्व: यह ट्रेन के गति सीमा उल्लंघन को स्वचालित ब्रेकिंग के माध्यम से नियंत्रित करता है। इसके माध्यम से दुर्घटना जोखिम, मानवीय त्रुटियाँ और समय पर ट्रेन संचालन में सुधार होता है। इसे गोल्डन क्वाड्रिलैटरल, गोल्डन डायगोनल, हाई डेन्सिटी नेटवर्क और अन्य महत्वपूर्ण सेक्शनों में लागू किया गया है, जिससे रेलवे संचालन और दुर्घटना जोखिम में सुधार हुआ है।

