Kerala becomes India’s first 100% digitally literate state
संदर्भ:
केरल ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश का पहला राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है, जिसने पूर्ण डिजिटल साक्षरता का दर्जा प्राप्त किया। राजधानी तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण घोषणा की।
डिजिटल साक्षरता का अर्थ: डिजिटल साक्षरता का मतलब है व्यक्तियों और समुदायों की जीवन स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल तकनीकों (जैसे स्मार्टफोन, इंटरनेट, कंप्यूटर आदि) को समझने और उनका सही उपयोग करने की क्षमता।
वर्तमान स्थिति:
- केंद्रीय श्रमिक शिक्षा बोर्ड के अनुसार भारत के केवल38% घर डिजिटल रूप से साक्षर हैं।
- शहरी क्षेत्रोंमें यह दर 61% है।
- ग्रामीण क्षेत्रोंमें यह दर मात्र 25% है।
- यह आँकड़े स्पष्ट रूप सेग्रामीण–शहरी खाई (Digital Divide) को दर्शाते हैं।
केरल ने 100% डिजिटल साक्षरता कैसे हासिल की?
केरल की डिजिटल सफलता किसी एक योजना का परिणाम नहीं है, बल्कि शिक्षा, नीतियों और समाज के संयुक्त प्रयासों का नतीजा है। यहाँ स्कूल से लेकर पंचायत और महिलाओं से लेकर बुजुर्गों तक, सभी को डिजिटल दुनिया से जोड़ा गया।
सफलता के प्रमुख कारण:
- उच्च साक्षरता दर (96%+): पढ़ाई-लिखाई में आगे होने से डिजिटल शिक्षा की मजबूत नींव बनी।
- अक्षय केंद्र (2002 से) : गाँव-गाँव में डिजिटल ट्रेनिंग दी गई।
- कुडुंबश्री मिशन: महिलाओं को डिजिटल लेन-देन और इंटरनेट साक्षरता सिखाई गई।
- IT@School प्रोजेक्ट: बच्चों को शुरुआती स्तर से ई-लर्निंग से जोड़ा।
- डिजिटल केरल मिशन (2018 से) : सभी सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन किया गया।
- पंचायत स्तर की पहल: हर पंचायत में डिजिटल केंद्र बनाए गए ताकि आम लोगों तक तकनीक पहुँचे।
- कोविड–19 का प्रभाव: ऑनलाइन क्लासेस और ई-गवर्नेंस से डिजिटल उपयोग तेज़ हुआ।
- प्रवासी भारतीयों का असर– विदेशों से जुड़े लोगों ने डिजिटल संस्कृति को मजबूत किया।
केरल को 100% डिजिटल साक्षर बनने से मिले लाभ
केरल की यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रशासन, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और समाज—चारों स्तरों पर बड़ा बदलाव लाती है। डिजिटल साक्षरता ने सरकारी कामकाज को पारदर्शी बनाया और आम नागरिकों के जीवन को आधुनिक व सुविधाजनक।
- प्रशासनिक फायदे:
- ई–गवर्नेंस आसान– जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, राशन कार्ड, पेंशन और भूमि रिकॉर्ड पूरी तरह ऑनलाइन।
- भ्रष्टाचार और दलाली में कमी– अब दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।
- डिजिटल रिकॉर्ड की सुविधा– आवेदन की स्थिति खुद ट्रैक कर सकते हैं।
- समय की बचत– छोटे-छोटे काम घर बैठे मिनटों में पूरे।
- शिक्षा और युवाओं के लिए फायदे:
- स्मार्ट क्लास और ई–लर्निंग– छात्रों को ई-बुक्स और ऑनलाइन लेक्चर का लाभ।
- कोविड–19 में पढ़ाई बाधित नहीं हुई– क्योंकि छात्र पहले से डिजिटल उपकरणों से परिचित थे।
- युवाओं के लिए नए अवसर– ऐप डेवलपमेंट, फ्रीलांसिंग, डेटा एंट्री, ऑनलाइन ट्यूटरिंग जैसी नौकरियाँ बढ़ीं; आईटी सेक्टर मजबूत हुआ।
- आर्थिक और सामाजिक फायदे:
- गांवों तक डिजिटल पेमेंट– छोटे दुकानदार, किसान और कुडुंबश्री समूह भी ऑनलाइन लेन-देन कर रहे।
- नकदी पर निर्भरता कम– लेन-देन तेज और सुरक्षित।
- पर्यटन को बढ़ावा– होटल बुकिंग, गाइड सर्विस, ऑनलाइन टिकटिंग और मोबाइल ऐप्स से सेवाएँ आसान।
- महिलाओं और समाज के अन्य वर्गों के फायदे:
- महिला सशक्तिकरण– कुडुंबश्री और अक्षय केंद्रों ने लाखों महिलाओं को डिजिटल लेन-देन सिखाया; वे अब बैंकिंग और छोटे व्यवसाय संभाल रही हैं।
- वरिष्ठ नागरिक और ग्रामीण लोग लाभान्वित– मोबाइल से पेंशन, इलाज और टिकट बुकिंग जैसी सुविधाएँ आसानी से प्राप्त कर पा रहे हैं।