Kyoto Protocol
संदर्भ:
Vijai Sharma, जो भारत के प्रमुख पर्यावरण सचिव और पूर्व सूचना आयुक्त थे, ‘क्योतो प्रोटोकॉल’ के प्रमुख वास्तुकार और देश के पूर्व मुख्य जलवायु वार्ताकार के रूप में विख्यात रहे, का निधन हो गया है। उन्होंने विश्व स्तर पर जलवायु परिवर्तन वार्ताओं में भारत और अन्य विकासशील देशों के हितों की दृढ़ता से रक्षा की।
(Kyoto Protocol) क्योटो प्रोटोकॉल: जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध एक ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय संधि
परिभाषा: क्योटो प्रोटोकॉल संयुक्त राष्ट्र की UNFCCC (United Nations Framework Convention on Climate Change) के अंतर्गत 1997 में अपनाई गई एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य ग्रीनहाउस गैसों (GHGs) के उत्सर्जन को कम करना है।
प्रवर्तन तिथि: 2005 में यह संधि प्रभाव में आई।
प्रमुख उद्देश्य: वैश्विक तापमान वृद्धि (Global Warming) से निपटने के लिए विकसित देशों पर GHGs उत्सर्जन में कटौती के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्य लागू करना।
लक्ष्य और अवधि:
- प्रथम प्रतिबद्धता अवधि (2008–2012):
1990 के स्तर की तुलना में औसतन 2% उत्सर्जन कटौती का लक्ष्य। - द्वितीय प्रतिबद्धता अवधि (2013–2020):
दोहा संशोधन (Doha Amendment) के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसे अमेरिका, कनाडा जैसे कई देशों ने अनुमोदित नहीं किया।
अनिवार्य और गैर–अनिवार्य पक्षकार:
- अनुलग्नक–1 (Annex I) देश: विकसित देशों को कानूनी रूप से GHGs कटौती के लिए बाध्य किया गया।
- अनुलग्नक–1 में शामिल नहीं: विकासशील देश जैसे भारत और चीन को कानूनी बाध्यता से छूट दी गई थी।
शामिल ग्रीनहाउस गैसें (GHGs):
- कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)मीथेन (CH₄), नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O), हाइड्रोफ्लोरोकार्बन्स (HFCs), परफ्लोरोकार्बन्स (PFCs), सल्फर हेक्साफ्लोराइड (SF₆)