Launch of e-Production Investment Business Visa for Chinese citizens
संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने चीनी नागरिकों के लिए ई-प्रोडक्शन इन्वेस्टमेंट बिजनेस वीजा (e-B-4 Visa) नामक एक नई ई-बिजनेस वीजा श्रेणी की शुरुआत की है। यह पहल भारत के विनिर्माण क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने और तकनीकी विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिए शुरू की गई है।
ई-प्रोडक्शन इन्वेस्टमेंट बिजनेस वीजा (e-B-4 Visa):
- e-B-4 वीजा, ई-बिजनेस वीजा की एक विशिष्ट उप-श्रेणी है, जिसे चीनी विनिर्माण विशेषज्ञों, तकनीशियनों और निवेशकों को भारत में अल्पकालिक तकनीकी और व्यावसायिक कार्यों के लिए सुगम प्रवेश प्रदान करने हेतु बनाया गया है।
- यह वीजा मुख्य रूप से उन परियोजनाओं के लिए है, जहाँ चीनी मशीनों की स्थापना, रखरखाव या विनिर्माण संयंत्रों के सेटअप के लिए चीनी विशेषज्ञों की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य होती है।
e-B-4 वीजा की मुख्य विशेषताएं:
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- प्रभावी तिथि: यह वीजा प्रणाली 1 जनवरी 2026 से चालू हो गई है।
- प्रसंस्करण समय (Processing Time): आवेदन करने के लगभग 45 से 50 दिनों के भीतर यह वीजा जारी किया जाता है।
- रहने की अवधि: इसके तहत चीनी व्यावसायिक पेशेवरों को भारत में अधिकतम 6 महीने तक रहने की अनुमति दी जाती है।
- पूरी तरह से डिजिटल: यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है, जिसमें आवेदक को दूतावास जाने या बिचौलियों की मदद लेने की आवश्यकता नहीं होती।
- FRRO पंजीकरण: भारत आगमन के 14 दिनों के भीतर Foreigners Regional Registration Office (FRRO) के साथ इलेक्ट्रॉनिक पंजीकरण अनिवार्य है।
- अनुमत व्यावसायिक गतिविधियां: e-B-4 वीजा विशेष रूप से उत्पादन और निवेश से जुड़ी गतिविधियों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिनमें शामिल हैं: मशीनरी और उपकरणों की स्थापना और कमीशनिंग, गुणवत्ता जांच और आवश्यक रखरखाव, उत्पादन सहायता, प्रशिक्षण और आईटी/ईआरपी (ERP) सिस्टम का सेटअप।
- स्पॉन्सरशिप आधारित: इस वीजा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे प्राप्त करने के लिए भारत स्थित आमंत्रित कंपनी को DPIIT के नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) के माध्यम से एक ‘डिजिटल स्पॉन्सरशिप पत्र’ जारी करना अनिवार्य है।
इसका महत्व:
- आर्थिक सामरिकता: यह कदम भारत की विनिर्माण क्षमता, विशेषकर Production Linked Incentive (PLI) योजनाओं को गति देने के लिए उठाया गया है
- द्विपक्षीय संबंधों में सुधार: 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में आए ‘फ्रीज’ को कम करने के लिए यह एक ‘पीपल-सेंट्रिक’ विश्वास बहाली उपाय (CBM) के रूप में देखा जा रहा है।
- व्यापार बाधाओं को कम करना: पहले चीनी विशेषज्ञों के लिए रोजगार वीजा (Employment Visa) की प्रक्रिया लंबी और जटिल थी। e-B-4 के माध्यम से सरकार ने सुरक्षा चिंताओं और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है।
- डिजिटल गवर्नेंस: यह वीजा श्रेणी ‘पेपरलेस’ प्रशासन की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जहाँ अब बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास द्वारा इस श्रेणी के लिए कोई पेपर वीजा जारी नहीं किया जाएगा।

