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मध्य प्रदेश में बाघों की मौत का संकट (Madhya Pradesh faces tiger death crisis) | UPSC Preparation

Madhya Pradesh faces tiger death crisis

Madhya Pradesh faces tiger death crisis

संदर्भ:

प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) की सफलता के कारण बाघों की संख्या में वृद्धि के बावजूद, वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश जिसे भारत का ‘टाइगर स्टेट’ (Tiger State) कहा जाता है, में 55 बाघों की मौत दर्ज की गई है, जो प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद एक वर्ष में मौतों का सर्वाधिक आंकड़ा है। 

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के आंकड़े :

  • दिसंबर 2025 तक भारत में कुल 164 बाघों की मृत्यु दर्ज की गई है। इनमें से अकेले मध्य प्रदेश में 55 बाघों की मौत हुई, जो 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के शुभारंभ के बाद से राज्य में एक वर्ष में दर्ज की गई सर्वाधिक संख्या है। 
  • राष्ट्रीय स्तर पर बाघों की मृत्यु का ग्राफ उतार-चढ़ाव भरा रहा है: 2021 में 129, 2022 में 122, 2023 में 182, 2024 में 126 मौतें हुई हैं। 
  • इसी अवधि में मध्य प्रदेश में भी मौतों की संख्या बढ़ी है: 2021 में 34, 2022 में 43, 2023 में 45, 2024 में 46 और अब 2025 में यह आंकड़ा रिकॉर्ड 55 तक पहुँच गया है। 
  • अधिकारियों के अनुसार, मौतों का एक बड़ा हिस्सा प्राकृतिक कारणों जैसे वृद्धावस्था, बीमारियाँ और क्षेत्रीय संघर्ष (Territorial fights) से जुड़ा है। बाघों की बढ़ती जनसंख्या (785 बाघ) के कारण सीमित क्षेत्र में वर्चस्व की लड़ाई इन प्राकृतिक मौतों का प्रमुख कारक बनी है। 
  • 2025 की 55 मौतों में से लगभग 11 मौतें अप्राकृतिक पाई गई हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण अवैध बिजली के तार (Electrocution) है, जो किसानों द्वारा जंगली जानवरों से फसल सुरक्षा के लिए लगाए जाते हैं; अकेले 8 बाघों की मौत इसी कारण हुई है।
  • NTCA डेटा यह भी स्पष्ट करता है कि भारत में 50% से अधिक मौतें अब संरक्षित टाइगर रिजर्व के बाहर हो रही हैं, जहाँ निगरानी तंत्र कमजोर है। मध्य प्रदेश में 55 में से 23 बाघों की मौत संरक्षित टाइगर रिजर्व के बाहरी इलाकों में हुई है। 
  • मध्य प्रदेश में भारत की सर्वाधिक बाघ आबादी (785 – 2022 की गणना के अनुसार) है, जिसके कारण वहां मानव-बाघ संघर्ष और निवास स्थान के विखंडन का दबाव सबसे अधिक है। 

प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger):

  • प्रोजेक्ट टाइगर भारत सरकार द्वारा 1 अप्रैल, 1973 को जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से शुरू किया गया एक प्रमुख वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम है। 
  • इसका प्राथमिक उद्देश्य बंगाल बाघों को विलुप्त होने से बचाना और उनके प्राकृतिक आवासों में एक व्यवहार्य आबादी सुनिश्चित करना है। 
  • यह एक ‘केंद्र प्रायोजित योजना’ (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसे 2006 के वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम के माध्यम से गठित किया गया है।
  • इस योजना को अधिनियम के तहत वैधानिक निकाय, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा प्रशासित किया जाता है। 
  • यह परियोजना ‘कोर-बफर’ रणनीति पर आधारित है, जहाँ ‘कोर’ क्षेत्र को मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाता है और ‘बफर’ क्षेत्र में सीमित गतिविधियों की अनुमति होती है। 
  • वित्त वर्ष 2023-24 से, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ का ‘प्रोजेक्ट एलीफेंट’ के साथ विलय कर दिया गया है, जिसे अब प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलीफेंट (PT&E) के नाम से जाना जाता है।
  • 1973 में केवल 9 रिजर्व से शुरू होकर, मार्च 2025 तक भारत में बाघ अभयारण्यों की संख्या बढ़कर 58 हो गई है, जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 2.3% कवर करते हैं।

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