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मलेरिया (Malaria) | UPSC

Malaria

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Malaria –

संदर्भ:

मलेरिया उन्मूलन के प्रयासों में वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय प्रगति हुई है, फिर भी यह बीमारी हर साल लगभग 6 लाख लोगों की जान लेती है। भारत ने 2015 से 2023 के बीच मलेरिया मामलों में 80% की कमी दर्ज की है, लेकिन आदिवासी बहुल उच्च-प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी गंभीर चुनौतियाँ बनी हुई हैं। देश ने 2030 तक मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है, जिसे अगली पीढ़ी के टीकों, स्वदेशी अनुसंधान और बहुआयामी रणनीतियों के माध्यम से हासिल करने की योजना है।

मलेरिया की वर्तमान स्थिति :

  1. वैश्विक स्थिति (Global Burden)-
  • वर्ष 2023 में मलेरिया के कारण दुनियाभर में लगभग 294 मिलियन (29.4 करोड़) लोग संक्रमित हुए और 6 लाख मौतें दर्ज की गईं।
  1. प्रगति में रुकावट (Stagnation in Progress)-
  • मलेरिया उन्मूलन की वैश्विक गति रुक गई है, क्योंकि:
    • परजीवी (parasite) ने दवाओं के प्रति प्रतिरोध (resistance) विकसित कर लिया है।
    • मच्छर अब कई कीटनाशकों से बचने में सक्षम हो गए हैं।
  1. भारत की उपलब्धि (India’s Reduction)-
  • भारत ने 2015 से 2023 के बीच मलेरिया मामलों में 80% से अधिक की कमी की है।
  1. संवेदनशील क्षेत्र (Persistent Pockets)-
  • कुछ जनजातीय ज़िले अब भी उच्च संक्रमण दर के शिकार हैं:
    • लॉन्गतलाई (मिज़ोरम) – प्रति 1,000 में 56 केस
    • नारायणपुर (छत्तीसगढ़) – प्रति 1,000 में 22 केस
  1. परजीवी की चुनौती (Species Challenge)-
  • भारत में दो प्रकार के मलेरिया परजीवियों से लड़ाई है:
    • Plasmodium falciparum – अधिक जानलेवा
    • Plasmodium vivax – बार-बार लौटने वाला
  1. लक्षणहीन वाहक (Asymptomatic Carriers)-
  • कुछ संक्रमित व्यक्ति बिना लक्षणों के होते हैं, जो मलेरिया फैलाते हैं।
  • झारखंड जैसे राज्यों में करीब 20% मलेरिया मामलों में यह स्थिति देखी गई है।

मलेरिया वैक्सीन विकास की स्थिति:

पहली पीढ़ी की वैक्सीन्स:

  1. RTS,S वैक्सीन (2021)
    • शुरुआती सुरक्षा: लगभग55% तक
    • 18 महीनोंमें प्रभाव कम हो गया
    • चौथी बूस्टर खुराककी ज़रूरत पड़ी
  2. R21/Matrix-M वैक्सीन (2023)
    • विकसित:ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया
    • WHO की मंज़ूरीमिली – 2023 में
    • प्रभावशीलता: लगभग77% तक
    • कम खुराकों में असरदारऔर भारत में सस्ती कीमत पर उत्पादन

सीमितताएँ (Limitations)

  • दोनों वैक्सीन्स केवल एक चरण (stage) के परजीवी को निशाना बनाती हैं
  • इस कारण दोबारा संक्रमण और संक्रमण का प्रसार संभव रहता है

नवीन और उन्नत वैक्सीन्स:

  1. PfSPZ वैक्सीन
    • इसमेंकिरणों से कमज़ोर किया गया falciparum परजीवी इस्तेमाल होता है
    • शिरा (IV)के माध्यम से दिया जाता है
    • तीसरी खुराक के बाद79% तक सुरक्षा मिली
  2. PfSPZ-LARC2
    • यह PfSPZ कासंशोधित एकखुराक संस्करण है
    • उद्देश्य:दूरदराज़ क्षेत्रों और आपातकालीन प्रकोप (outbreak) वाले इलाकों में तेज़ असर
  3. PfRH5 वैक्सीन
    • यह परजीवी केरक्तचरण (blood-stage) के RH5 प्रोटीन को निशाना बनाता है
    • विशेषता:सभी स्ट्रेन पर असरदार
    • परीक्षण: यूके, गांबिया, बुर्किना फासो में सकारात्मक परिणाम मिले

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