Mohanthal Prasad GI Tag- मोहनथाल प्रसाद को मिला GI टैग, पलानी के पंचामृतम धार्मिक प्रसाद की सूची में हुआ शामिल
Image Credit: Ambaji Temple
संदर्भ:
हाल ही में गुजरात के सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ अंबाजी मंदिर के पारंपरिक मोहनथाल प्रसाद (Mohanthal Prasad) को भारत सरकार के भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री द्वारा आधिकारिक तौर पर जीआई टैग (GI Tag) प्रदान किया गया।
- इसके साथ ही मोहनथाल प्रसाद अब तमिलनाडु के पलानी पंचामृतम और आंध्र प्रदेश के तिरुपति लड्डू जैसे देश के विशिष्ट जीआई-टैग प्राप्त धार्मिक प्रसादों की प्रतिष्ठित सूची में शामिल हो गया।
Mohanthal Prasad GI Tag:
- आवेदक: यह जीआई प्रमाण-पत्र ‘श्री आरासुरी अंबाजी माता देवस्थान ट्रस्ट’ (Shree Arasuri Ambaji Mata Devsthan Trust) के नाम पर जारी किया गया है, जो इस मंदिर का प्रबंधन देखता है।
- वस्तु श्रेणी (Category of Goods): इसे बौद्धिक संपदा वर्गीकरण के तहत कक्षा 30 (Class 30 – खाद्य सामग्री/Foodstuffs) के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है।
- आवेदन विवरण: यह सफलता आवेदन संख्या 1228 के तहत प्राप्त हुई है। इसके तहत मूल विनिर्देशों और पारंपरिक विधि को कानूनी मान्यता दी गई है।
- प्रमाण-पत्र और समारोह: हालांकि जीआई रजिस्ट्री द्वारा आधिकारिक प्रमाण-पत्र 1 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया था, लेकिन इसे औपचारिक रूप से 11 अक्टूबर 2026 (शारदीय नवरात्रि का पहला दिन) को अंबाजी मंदिर के चाचर चौक में आयोजित एक भव्य समारोह में सौंपा गया।
- यह प्रमाण-पत्र पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क के महानियंत्रक तथा जीआई रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. उन्नत पी. पंडित द्वारा बनासकांठा के जिला कलेक्टर मिहिर पटेल को प्रदान किया गया।
- स्थान: अंबाजी मंदिर गुजरात के बनासकांठा जिले में अरावली पहाड़ियों पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन और प्रमुख शक्तिपीठ है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहाँ माता सती का हृदय गिरा था।
- इतिहास: मोहनथाल प्रसाद (Mohanthal Sweet) सदियों से इस मंदिर में माता अंबा को चढ़ाया जाने वाला मुख्य और पारंपरिक ‘हस्ताक्षर प्रसाद’ (Signature Offering) रहा है। पीढ़ियों से आ रहे श्रद्धालु इस प्रसाद को अंबाजी की यात्रा का एक अनिवार्य हिस्सा मानते हैं।
- सामग्री और शुद्धता: यह पारंपरिक मिठाई मुख्य रूप से बेसन (चने का आटा), शुद्ध गाय का घी, चीनी और इलायची के मिश्रण से एक निश्चित तापमान पर बनाई जाती है।
- बिना मावा (खोया) के पारंपरिक गुजराती विधि से बनने के कारण यह प्रसाद कई दिनों तक खराब नहीं होता.
भौगोलिक संकेतक (जीआई) क्या है?
- परिचय: भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication – GI) एक विशिष्ट बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) है, जो उन उत्पादों को दिया जाता है जिनका एक विशिष्ट भौगोलिक उद्गम स्थान होता है और जिनकी विशिष्ट गुणवत्ता या प्रतिष्ठा मुख्य रूप से उसी स्थान के कारण होती है।
- भारत में यह प्रक्रिया भौगोलिक उपदर्शन (रजिस्ट्रीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 (Geographical Indications of Goods Act, 1999) द्वारा शासित होती है।
- जारीकर्ता निकाय: इसे उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाली GI Registry (चेन्नई) द्वारा जारी किया जाता है।
- वैधता: एक बार GI टैग मिलने पर यह 10 साल के लिए मान्य होता है, जिसे बाद में नवीनीकृत (Renew) कराया जा सकता है।
- पहला उत्पाद: भारत में वर्ष 2004-05 में सबसे पहला GI टैग पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग चाय को मिला था।
- लाभ: जीआई मान्यता मिलने के बाद, कोई भी व्यावसायिक संस्था या बाहरी व्यक्ति या संस्था उस उत्पाद को गलत तरीके से नहीं बेच सकता। ऐसा करने पर अधिनियम के तहत कानूनी रूप से दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
- भारत की प्राचीन पाक कला (Culinary Heritage) और मंदिरों से जुड़ी सदियों पुरानी परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक संप्रभु कानूनी दस्तावेज के माध्यम से मान्यता मिलती है।
- जीआई स्टोर के माध्यम से इन उत्पादों के विपणन को बढ़ावा मिलता है। इससे मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में रोजगार और स्थानीय खेल-आर्थिक तंत्र (Temple Economy) सुदृढ़ होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: मोहनथाल प्रसाद को GI टैग क्यों दिया गया है?
उत्तर: इसके अनूठे क्षेत्रीय स्वाद, विशिष्ट शुद्ध पारंपरिक रेसिपी, सदियों पुराने ऐतिहासिक महत्व और अंबाजी मंदिर की धार्मिक विरासत से इसके गहरे जुड़ाव को कानूनी संरक्षण देने हेतु इसे जीआई टैग प्रदान किया गया है।
प्रश्न 2: मोहनथाल प्रसाद किस स्थान और धार्मिक परंपरा से जुड़ा हुआ है?
उत्तर: यह प्रसाद गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित प्रसिद्ध अंबाजी माता मंदिर (शक्तिपीठ) की सदियों पुरानी धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है।
प्रश्न 3: मोहनथाल और पलानी के पंचामृतम में क्या समानता है?
उत्तर: दोनों ही भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के हिस्से के रूप में कक्षा 30 (खाद्य सामग्री) के अंतर्गत जीआई-टैग प्राप्त ‘विशिष्ट धार्मिक प्रसाद’ हैं, जो अपनी शुद्धता और अद्वितीय स्थानीय निर्माण पद्धति के लिए संरक्षित हैं।
प्रश्न 4: किसी धार्मिक प्रसाद को GI टैग मिलने से क्या लाभ होता है?
उत्तर: इससे उत्पाद की अनधिकृत नकल और व्यावसायिक दुरुपयोग पर कानूनी रोक लगती है, श्रद्धालुओं को असली व शुद्ध उत्पाद की गारंटी मिलती है और स्थानीय मंदिर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
प्रश्न 5: भारत में GI टैग प्राप्त अन्य प्रसिद्ध धार्मिक प्रसाद कौन-कौन से हैं?
उत्तर: भारत में जीआई टैग प्राप्त अन्य प्रसिद्ध प्रसादों में आंध्र प्रदेश का तिरुपति लाडू (Tirupati Laddu) और तमिलनाडु के पलानी मुरुगन मंदिर का पलानी पंचामृतम (Palani Panchamirtham) प्रमुख रूप से शामिल हैं।
