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मोनाको मरीन सम्मेलन (Monaco Marine Conference) | Ankit Avasthi Sir

Monaco Marine Conference

Monaco Marine Conference

Monaco Marine Conference – 

संदर्भ:

विश्व महासागर दिवस के अवसर पर आयोजित मोनाको मरीन सम्मेलन में भारत ने एक बार फिर सस्टेनेबल ब्लू इकॉनमी यानी सतत नीली अर्थव्यवस्था के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता जताई।

समुद्री सतत शासन हेतु भारत की बड़ी पहल: MSP और SAHAV पोर्टल

भारत ने मोनाको में आयोजित एक उच्च-स्तरीय Marine Spatial Planning (MSP) कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई, जिसका सह-आयोजन भारत और नॉर्वे ने मिलकर किया। भारत का प्रतिनिधित्व पृथ्वी विज्ञान मंत्री ने किया, जिन्होंने MSP को समुद्र शासन के लिए एक प्रमुख वैज्ञानिक उपकरण के रूप में अपनाने की दिशा में भारत की प्रगति को रेखांकित किया।

प्रमुख बिंदु:

  • मंत्री ने बताया कि भारत का विज्ञानआधारित और डेटासंचालित दृष्टिकोण लोगों और प्रकृति दोनों के हित में कार्य करने वाले समुद्री शासन की दिशा में समर्पित है।
  • यह कार्यक्रम भारत और नॉर्वे के बीच मजबूत समुद्री सहयोग को भी दर्शाता है।
  • विश्व महासागर दिवस के अवसर पर भारत ने SAHAV पोर्टल लॉन्च किया, जिसे अब डिजिटल पब्लिक गुड के रूप में मान्यता प्राप्त है।

SAHAV पोर्टल की विशेषताएँ:

  • GIS-आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली (Decision Support System)
  • वास्तविक समय (Real-time) स्थानिक डेटा प्रदान करता है
  • नीति निर्माण, अनुसंधान, और समुदाय स्तर की योजना को समर्थन देता है

Marine Spatial Planning (MSP) क्या है?

  • यह एक विज्ञानआधारित रूपरेखा है जो निम्नलिखित उद्देश्यों में सहायक है:
    • महासागर संसाधनों का संतुलित उपयोग
    • समुद्री जैव विविधता की रक्षा
    • तटीय आजीविका की सुरक्षा

MSP के तहत भारत में पहल:

  • इंडोनॉर्वेजियन एकीकृत महासागर अनुसंधान पहल के अंतर्गत MSP को बढ़ावा दिया गया।
  • इसके अंतर्गत पुडुचेरी और लक्षद्वीप में पायलट परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जो तटीय कटाव, मत्स्य पालन, जैव विविधता, पर्यटन और संरक्षण जैसे मुद्दों पर कार्य कर रही हैं।

ब्लू इकोनॉमी (नीली अर्थव्यवस्था) क्या है?

ब्लू इकोनॉमी का आशय है समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग (sustainable use) — ताकि आर्थिक विकास हो, आजीविका सुधरे और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (marine ecosystem) की रक्षा हो सके।

भारत का दृष्टिकोण:

  • भारत की ब्लू इकोनॉमी नीति का उद्देश्य आर्थिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच संतुलन बनाना है।
  • यह दृष्टिकोण संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG-14) के अनुरूप है, जिसमें महासागरों, समुद्रों और समुद्री संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग को बढ़ावा दिया गया है।

भौगोलिक महत्व:

  • भारत के पास 11,098 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा है, जो 9 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में फैली है।
  • भारत का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) लगभग 20.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।
  • यह भारत को समुद्री संसाधनों के दोहन व विकास में वैश्विक अग्रणी बना सकता है।

प्रमुख नीतियाँ और पहलें:

  1. राष्ट्रीय ब्लू इकोनॉमी नीति रूपरेखा (National Blue Economy Policy Framework):
  • प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद द्वारा तैयार की गई।
  • इसके अंतर्गत समुद्री मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन और महासागर आधारित उद्योगों को प्राथमिकता दी गई है।
  1. प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY):
  • यह योजना मत्स्य पालन और जलीय कृषि (aquaculture) को बढ़ावा देने हेतु शुरू की गई है।
  • यह योजना भारत की ब्लू इकोनॉमी को सशक्त बनाने में सहायक है

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