Myogenesis
संदर्भ:
“एक्सिओम-4 मिशन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग की शुरुआत की है। यह प्रयोग अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर मांसपेशियों के क्षय और नवोत्पत्ति (myogenesis) की प्रक्रिया पर केंद्रित है। इस अनुसंधान का उद्देश्य सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण की स्थिति में मांसपेशियों की पुनरुत्पत्ति को बेहतर समझना है।
(Myogenesis) मायोजेनेसिस प्रयोग के बारे में:
क्या है मायोजेनेसिस: मायोजेनेसिस एक जैविक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से कंकाल की मांसपेशियों (skeletal muscles) का विकास होता है, विशेषकर भ्रूणीय अवस्था के दौरान। यह प्रक्रिया मांसपेशियों की वृद्धि, मरम्मत और पुनरुत्पादन में अहम भूमिका निभाती है।
अंतरिक्ष में इसकी आवश्यकता क्यों है? अंतरिक्ष में सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (microgravity) के कारण मानव कंकाल मांसपेशियों की कोशिकाओं का क्षय बहुत आम है। यह मांसपेशी क्षरण अंतरिक्ष यात्राओं के दौरान एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
प्रयोग का उद्देश्य:
- अंतरिक्ष में मांसपेशियों के क्षरण के पीछे के जैविक मार्गों (biological pathways) की पहचान करना।
- माइक्रोग्रैविटी की स्थिति में मस्तिष्क में रक्त परिसंचरण (blood circulation) को समझना, जिसे अल्ट्रासाउंड तकनीक की मदद से मापा जा रहा है।
मुख्य अध्ययन क्षेत्र:
- मांसपेशी ऊतक क्षरण की प्रक्रिया
- माइक्रोग्रैविटी में मस्तिष्क में रक्त प्रवाह
- अंतरिक्ष में हृदय संबंधी अनुकूलन की प्रक्रिया
लाभ:
- यह शोध अंतरिक्ष यात्रियों की मांसपेशी और हृदय प्रणाली को सुरक्षित रखने के लिए लक्षित उपचार विकसित करने में मदद करेगा।
- पृथ्वी पर मांसपेशी अपघटन संबंधी बीमारियों (जैसे मस्कुलर डिस्ट्रॉफी) से पीड़ित लोगों के लिए उपचार में सहायक हो सकता है।
- स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की बेहतर चिकित्सा और निदान में भी उपयोगी साबित हो सकता है।