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नागौरी पान मेथी (Nagauri Pan Methi) | Ankit Avasthi Sir

Nagauri Pan Methi

Nagauri Pan Methi

संदर्भ:

हाल ही में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत कार्यरत पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPVFRA) ने राजस्थान के नागौर जिले की विशिष्ट ‘नागौरी पान मेथी’ को आधिकारिक तौर पर एक ‘सामुदायिक किसान किस्म’ (Community Farmers’ Variety) के रूप में पंजीकृत (पेटेंट) किया है।

नागौरी पान मेथी के बारे में:

  • वानस्पतिक वर्गीकरण: यह सामान्य मेथी से भिन्न ‘ट्रिगोनेला कॉर्निकुलता’ प्रजाति है। इसके पत्ते छोटे और गोल होते हैं, जिन्हें ‘पान’ जैसी आकृति के कारण ‘पान मेथी’ कहा जाता है।
    • लंबे समय तक इसे ‘कसूरी मेथी’ (पाकिस्तान के कसूर के नाम पर) के नाम से बेचा जाता रहा।
  • भौगोलिक क्षेत्र: इसकी मूल और श्रेष्ठ खेती राजस्थान के नागौर जिले (मुंडवा, जायल, मेड़ता, खींवसर) की अर्ध-शुष्क और रेतीली मिट्टी में होती है।
    • बहु-कटाई प्रणाली: यह एक सीजन में 8 से 10 बार काटी जा सकती है। जितनी अधिक कटाई होती है, पत्तियां उतनी ही घनी और सुगंधित होती हैं।
    • जलवायु अनुकूलन: यह कम पानी और खारेपन वाली मिट्टी में भी उत्कृष्ट गुणवत्ता प्रदान करती है, जो इसे रेगिस्तानी क्षेत्रों के लिए ‘हरा सोना’ बनाती है।
  • विशेषता: 
  • उच्च एसेंशियल ऑयल: इसमें सामान्य मेथी की तुलना में सुगंधित तेलों की सांद्रता बहुत अधिक होती है, जो इसे तीव्र सुगंध प्रदान करती है।
  • प्राकृतिक संरक्षण: पत्तियों को पारंपरिक रूप से सुखाया जाता है, जिससे इनका गहरा हरा रंग और पोषक तत्व (क्लोरोफिल) लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।
  • प्रीमियम मसाला: अंतरराष्ट्रीय पाक कला में इसका उपयोग ‘गार्निश’ के रूप में स्वाद और सुगंध बढ़ाने वाले एक प्रीमियम घटक के तौर पर किया जाता है।
  • औषधीय गुण: इसमें विटामिन A, कैल्शियम और आयरन भरपूर मात्रा में होता है। यह पाचन सुधारने और कब्ज में राहत देने के लिए भी जानी जाती है।
पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPVFRA):

  • परिचय: पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPVFRA) एक सांविधिक निकाय है, जो 2005 में PPV&FR अधिनियम, 2001 के तहत स्थापित किया गया था। 
    • कानूनी ढांचा: यह TRIPS (WTO) समझौतों के अनुरूप भारत की एक ‘सुई जेनेरिस’ (Sui generis) प्रणाली है, जो खाद्य सुरक्षा और बौद्धिक संपदा के बीच संतुलन बनाती है।
    • मंत्रालय: यह कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय के रूप में कार्य करता है।
  • कार्य एवं शक्तियां:
    • किसानों के अधिकार (धारा 39): यह दुनिया का एकमात्र कानून है जो किसानों को पंजीकृत किस्मों के बीज बचाने, उपयोग करने, विनिमय करने और बेचने का अधिकार देता है, बशर्ते वे ब्रांडेड न हों।
    • प्रजनकों के अधिकार: नई किस्म विकसित करने वाले प्रजनकों को उत्पादन, बिक्री और निर्यात के विशेष अधिकार (15-18 वर्ष के लिए) प्रदान करता है।
    • शोधकर्ताओं के अधिकार: वैज्ञानिकों को नई किस्में विकसित करने के लिए पंजीकृत किस्मों का उपयोग करने की अनुमति देता है।
    • लाभ का साझाकरण (Benefit Sharing): यदि कोई कंपनी किसान की पारंपरिक किस्म का उपयोग कर नई किस्म बनाती है, तो लाभ का हिस्सा संबंधित किसान या समुदाय को मिलता है।
    • पुरस्कार: पारंपरिक किस्मों को बचाने वाले किसानों को ‘पादप जीनोम संरक्षक’ (Plant Genome Saviour) पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।

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