NASA Planning to Install a Nuclear Reactor on the Moon
NASA Planning to Install a Nuclear Reactor on the Moon –
संदर्भ:
संयुक्त राज्य अमेरिका 2030 तक चंद्रमा पर 100 किलोवाट का परमाणु रिएक्टर स्थापित करने की योजना बना रहा है, जो अंतरिक्ष अन्वेषण में एक रणनीतिक मानी जा रही है।
- इस पहल का उद्देश्य चंद्रमा पर आवास और खनन गतिविधियों के लिए 24×7 ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
- यह कदम चीन-रूस की महत्वाकांक्षाओं का जवाब देने के साथ-साथ भविष्य के मंगल और क्षुद्रग्रह अभियानों के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।
चंद्रमा पर सौर ऊर्जा की तुलना में परमाणु ऊर्जा अधिक उपयुक्त क्यों?
चुनौतियाँ (सौर ऊर्जा):
- चंद्रमा परलगातार दो सप्ताह लंबी रात होती है, जिसके दौरान सोलर पैनल बिजली उत्पन्न नहीं कर पाते।
- इस अवधि में ऊर्जा का पर्याप्त भंडारण और निरंतर आपूर्ति एक बड़ी चुनौती है।
समाधान (परमाणु ऊर्जा):
- परमाणु रिएक्टरलगातार, उच्च क्षमता और 24×7 निर्बाध बिजली आपूर्ति देता है।
- यह चंद्रमा पर निम्नलिखित के लिए बेहद महत्वपूर्ण है:
- लाइफ–सपोर्ट सिस्टमको चलाना
- हैबिटैट्सको पावर देना
- रोबोटिक और माइनिंग उपकरणका संचालन करना
100-किलोवाट पावर सिस्टम की भूमिका:
- पहले NASA ने40 किलोवाट न्यूक्लियर सिस्टम का प्रस्ताव दिया था, लेकिन हाल की योजना में इसे 100 किलोवाट तक बढ़ाया गया।
- 100 किलोवाट क्षमतापर्याप्त होगी:
- कईचंद्र आवास (lunar habitats) चलाने के लिए
- ऑक्सीजन और पानी निष्कर्षण संयंत्रके लिए
- औद्योगिक स्तर की शोध सुविधाओंके लिए
- यह योजना केवल चंद्रमा तक सीमित नहीं है — यहमंगल और गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए भी प्रोटोटाइप का काम करेगी।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा और कानूनी ढांचा
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा– NASA की यह पहल चीन और रूस की उन योजनाओं के बाद तेज हुई है, जिनमें वे 2035 तक चंद्रमा पर स्वचालित परमाणु ऊर्जा स्टेशन स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं। भारत और जापान सहित अन्य देश भी चंद्रमा की खोज और मानव बस्तियां बसाने के प्रयास में जुटे हैं।
कानूनी ढांचा –
- 1967 का आउटर स्पेस ट्रीटी (Outer Space Treaty): अंतरिक्ष में परमाणु ऊर्जा केशांतिपूर्ण उपयोग की अनुमति देता है और पारदर्शिता, सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के दिशा-निर्देश तय करता है।
- आर्टेमिस अकॉर्ड्स (Artemis Accords): अंतरिक्ष अन्वेषण मेंअंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देते हैं, जिसमें पारदर्शिता, शांतिपूर्ण उपयोग और अंतरिक्ष संसाधनों के जिम्मेदाराना उपयोग पर जोर है।
परमाणु रिएक्टर से अमेरिका को होने वाले रणनीतिक लाभ:
- संसाधन आत्मनिर्भरता – चंद्रमा की मिट्टी (lunar regolith) से ऑक्सीजन और पानी निकालना संभव होगा, जिससे पृथ्वी से आपूर्ति पर निर्भरता घटेगी।
- आपूर्ति में कमी – लंबे मिशनों के लिए पृथ्वी से बार–बार पुनःआपूर्ति (resupply) की आवश्यकता नहीं होगी।
- बहु–क्षेत्रीय समर्थन – सैन्य, वैज्ञानिक और वाणिज्यिक अभियानों को लगातार और भरोसेमंद ऊर्जा सपोर्ट मिलेगा।
- अंतरिक्ष ऊर्जा नेतृत्व – यह कदम अमेरिका को अंतरिक्ष ऊर्जा प्रौद्योगिकी में अग्रणी (leader) के रूप में स्थापित करेगा।
निष्कर्ष:
अमेरिका का चंद्रमा परमाणु रिएक्टर कार्यक्रम केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह अंतरिक्ष के प्रति देशों के दृष्टिकोण में एक बड़ा परिवर्तन है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, यह कदम अमेरिका को वैज्ञानिक और भू-राजनीतिक दोनों मोर्चों पर अपनी बढ़त बनाए रखने में मदद करेगा।