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कार्बन बाज़ारों के लिए राष्ट्रीय नामित प्राधिकरण (National Designated Authority for Carbon Markets) | Ankit Avasthi Sir

National Designated Authority for Carbon Markets

National Designated Authority for Carbon Markets

संदर्भ:

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ‘नेशनल डिज़िग्नेटेड अथॉरिटी (NDA)’ की स्थापना की घोषणा की है। यह 2015 के पेरिस समझौते के प्रावधानों के तहत एक अनिवार्य व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य देश में कार्बन उत्सर्जन ट्रेडिंग व्यवस्था को लागू करना और जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों को मजबूती देना है।

परिचय (About):

यह 2015 के पेरिस समझौते (Paris Agreement) के प्रावधानों के तहत एक अनिवार्य आवश्यकता है।

पेरिस समझौते के भीतर, अनुच्छेद 6 (Article 6) उस ढाँचे को परिभाषित करता है जिसके तहत उत्सर्जन व्यापार व्यवस्था (emissions trading regime) या बाजार का स्वरूप तय किया जा सकता है।

संरचना (Composition):

  • 21 सदस्यीय समिति, जिसकी अध्यक्षता पर्यावरण मंत्रालय के सचिव करते हैं।
  • इसमें विदेश मंत्रालय, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, नीति आयोग (NITI Aayog) और इस्पात मंत्रालय के अधिकारी शामिल हैं।

कार्य (Functions of NDA):

  1. केंद्र सरकार को उन गतिविधियों की सूची की सिफारिश करना जिन्हें परियोजनाओं से उत्सर्जन कटौती इकाइयों (emission reduction units) के व्यापार के लिए माना जा सकता है।
  2. समय-समय पर इन गतिविधियों में बदलाव करना, ताकि वे राष्ट्रीय सतत विकास लक्ष्यों (sustainable goals), देश-विशेष मानदंडों और अन्य राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप रहें।
  3. परियोजनाओं या गतिविधियों को मूल्यांकन, अनुमोदन और प्राधिकरण के लिए प्राप्त करना।
  4. परियोजनाओं से प्राप्त उत्सर्जन कटौती इकाइयों कोराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) की प्राप्ति के लिए प्रयोग करने की अनुमति प्रदान करना।

राष्ट्रीय नामित प्राधिकरण (NDA) के कार्य:

  • परियोजना स्वीकृति (Project Approval):उत्सर्जन कमी इकाइयाँ (ERUs) उत्पन्न करने वाली परियोजनाओं का मूल्यांकन और अनुमोदन करना।
  • राष्ट्रीय मानदंड (National Criteria):भारत के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप उन गतिविधियों की अनुशंसा करना जो ट्रेडिंग के योग्य हों।
  • निगरानी (Monitoring):राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुसार पात्र गतिविधियों को समय-समय पर अद्यतन और संशोधित करना।
  • कार्बन क्रेडिट उपयोग (Carbon Credit Use):भारत के NDC लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ERUs के उपयोग की अनुमति देना।
  • अंतरराष्ट्रीय भूमिका (International Role):आर्टिकल 6 ढांचे के अंतर्गत भारत का प्रतिनिधित्व करना और अन्य देशों के साथ क्रेडिट ट्रांसफर को सुगम बनाना।

भारत के लिए NDA का महत्व:

  • NDC लक्ष्यों को समर्थन (Supports NDCs): भारत की प्रतिबद्धता—2005 के स्तर से 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 45% कमी—को पूरा करने में मदद करता है।
  • स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा (Boosts Clean Energy): नवीकरणीय और कम-कार्बन परियोजनाओं में निवेश को प्रोत्साहित करता है।

कार्बन मार्केट्स (Carbon Markets):

  • परिभाषा: कार्बन मार्केट्स ऐसे ट्रेडिंग सिस्टम हैं, जिनमें कार्बन क्रेडिट्स की खरीद-बिक्री होती है।
  • उद्देश्य: कंपनियाँ या व्यक्ति अपनी ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन की भरपाई (compensate) करने के लिए इन क्रेडिट्स को खरीद सकते हैं।
  • कार्बन क्रेडिट का अर्थ: एक कार्बन क्रेडिट = एक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) या उसके बराबर किसी अन्य ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन घटाना, रोकना या अवशोषित (sequester) करना।

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