National Green Tribunal directive on the right to clean air
संदर्भ:
हाल ही में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के पश्चिमी क्षेत्र पीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए पुणे नगर निगम (PMC) को निर्देश दिया कि वह शहर में चल रहे सभी निर्माण परियोजनाओं के लिए ध्वनि तथा धूल प्रदूषण नियंत्रण हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करे। यह एक महत्वपूर्ण आदेश है, जो देश-भर में ‘स्वच्छ हवा का अधिकार’ पर चल रही बहस को नया आयाम देता है।
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) क्या हैं?
- NGT Act, 2010 के तहत गठित यह एक विशेष न्यायिक निकाय है, जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े विवादों का त्वरित निस्तारण है।
- यह नागरिक प्रकृति के उन सभी मामलों पर सुनवाई करता है जिनमें पर्यावरण संबंधी महत्वपूर्ण प्रश्न उठते हैं।
- 18 अक्टूबर 2010 को स्थापित NGT आज भारत की पर्यावरणीय न्याय व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।
- NGT 1908 के सिविल प्रक्रिया संहिता से बाध्य नहीं है और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित होकर स्वयं सुओ मोटू कार्रवाई भी कर सकता है।
- NGT के अध्यक्ष एक सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होते हैं।
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने NGT की भूमिका को केवल न्यायिक नहीं बल्कि रोकथामात्मक, सुधारात्मक और उपचारात्मक बताया है।
स्वच्छ हवा का अधिकार:
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अनुच्छेद 21 और न्यायालयों की व्याख्या: भारत में स्वच्छ हवा को जीवन के अधिकार (Article 21) का हिस्सा माना गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में कहा है कि राज्य का दायित्व है कि वह नागरिकों को स्वच्छ, प्रदूषण-रहित वातावरण उपलब्ध कराए।
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सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय असमानता: जहाँ प्रदूषण का प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है वहाँ अक्सर गरीब समुदाय, बच्चे, वृद्ध, अस्थमा/फेफड़ा रोगियों की संख्या अधिक होती है। इसलिए स्वच्छ हवा का अधिकार केवल पर्यावरणीय अधिकार नहीं बल्कि सामाजिक न्याय का मुद्दा भी है।
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नागरिक सहभागिता और पारदर्शिता: इस अधिकार में नागरिकों का वायु गुणवत्ता डेटा तक पहुँच, प्रदूषण नीतियों में भागीदारी और प्रदूषण के खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर करने का अधिकार शामिल है।
बच्चों की याचिकाएँ और वैश्विक चिंता:
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दुनिया भर के बच्चे संयुक्त राष्ट्र के समक्ष स्वच्छ हवा के अधिकार की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि दूषित हवा उनके विकास, प्रतिरोधक क्षमता, और भविष्य के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है।
भारत के लिए महत्व:
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भारत विश्व के सबसे प्रदूषित देशों में से एक है। WHO के अनुसार, भारतीय बच्चों के फेफड़े औसतन 30% तक कमजोर पाए गए हैं। इसलिए भारतीय नीति-निर्माण में बच्चों के “Right to Breathe” को विशेष महत्व देना आवश्यक है।

