National Highway Green Cover Index 2025-26
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने भारत में सतत बुनियादी ढांचे (Sustainable Infrastructure) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पहली बार’नेशनल हाईवे ग्रीन कवर इंडेक्स’ (NH-GCI) 2025-26 रिपोर्ट जारी की।
नेशनल हाईवे ग्रीन कवर इंडेक्स (NH-GCI) क्या हैं?
‘नेशनल हाईवे ग्रीन कवर इंडेक्स’ एक मात्रात्मक (Quantitative) सूचकांक है जो राष्ट्रीय राजमार्गों के ‘अधिकार-क्षेत्र’ (Right of Way – RoW) के भीतर हरित आवरण के प्रतिशत को मापने में सहायक है।
- साझेदारी: इसे NHAI ने इसरो (ISRO) के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) के साथ मिलकर विकसित किया है।
- आधार: यह पहल ‘हरित राजमार्ग नीति 2015’ (Green Highways Policy 2015) के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए शुरू की गई है, जिसका लक्ष्य राजमार्गों के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को संतुलित करना है।
कार्यप्रणाली और तकनीक:
- सैटेलाइट डेटा: इसमें इसरो के Resourcesat-2/2A (LISS-IV) उपग्रहों से प्राप्त 5-मीटर रिज़ॉल्यूशन वाले डेटा का उपयोग किया जाता है।
- क्लोरोफिल डिटेक्शन: उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले सेंसर पौधों में क्लोरोफिल (Chlorophyll) की मात्रा का पता लगाते हैं, जिससे वनस्पतियों की स्वास्थ्य स्थिति और घनत्व का वैज्ञानिक आकलन संभव होता है।
- ग्रैनुलर असेसमेंट: यह इंडेक्स प्रत्येक 1 किलोमीटर के खंड पर हरित आवरण को मापता है, जिससे राजमार्गों के छोटे से छोटे हिस्से की भी निगरानी संभव है।
- NDVI का उपयोग: विश्लेषण के लिए ‘नॉर्मलाइज्ड डिफरेंस वेजिटेशन इंडेक्स’ (NDVI) का उपयोग किया जाता है, जो उपग्रह चित्रों से हरियाली की पहचान करने का एक मानक तरीका है।
प्रथम चक्र के मुख्य निष्कर्ष:
- कवरेज: पहले चक्र (जुलाई-दिसंबर 2024) के दौरान 24 राज्यों के लगभग 30,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का सर्वेक्षण किया गया।
- शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य: रिपोर्ट के अनुसार, असम में उच्चतम हरित आवरण दर्ज किया गया, जिसके बाद गुजरात, तेलंगाना, बिहार और तमिलनाडु का स्थान रहा।
- चुनौतीपूर्ण क्षेत्र: हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में हरित आवरण अपेक्षाकृत कम पाया गया।
इंडेक्स का महत्व:
- पारदर्शिता और जवाबदेही: यह ठेकेदारों और वृक्षारोपण एजेंसियों के प्रदर्शन को मापने के लिए एक निष्पक्ष पैमाना प्रदान करता है।
- सटीक हस्तक्षेप (Targeted Interventions): उन क्षेत्रों की पहचान करना आसान हो गया है जहाँ हरियाली कम है, ताकि वहाँ प्राथमिकता के आधार पर नए पौधे लगाए जा सकें。
- लागत और समय की बचत: भौतिक सर्वेक्षण की तुलना में उपग्रह-आधारित निगरानी अधिक तेज़ और कम खर्चीली है।
- भुवन पोर्टल (Bhuvan Portal): डेटा को इसरो के ‘भुवन’ पोर्टल पर साझा किया गया है, जो एक पारदर्शी निगरानी प्रणाली सुनिश्चित करता है।
