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संसद से National Honour Insult Prevention Amendment Bill 2026 पारित, जानिए बिल के प्रावधान

संसद से National Honour Insult Prevention Amendment Bill 2026 पारित, जानिए बिल के प्रावधान

National Honour Insult Prevention Amendment Bill 2026

संदर्भ:

हाल ही में संसद (Parliament) के मानसून सत्र में 30 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 (National Honour Insult Prevention Amendment Bill 2026) को सर्वसम्मति से पारित किया गया. यह कानून के तहत राष्ट्रीय गीत (National Song) ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान (National Anthem) के समान विधिक संरक्षण प्रदान किया गया है. 

National Honour Insult Prevention Amendment Bill 2026 के मुख्य प्रावधान एवं बिंदु:

  • मूल अधिनियम: यह नया विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) की धारा 3 में महत्वपूर्ण संशोधन के अंतर्गत लाया गया है.
    • मूल 1971 के अधिनियम में केवल भारतीय राष्ट्रीय ध्वज (National Flag Law), भारत के संविधान (Constitutional Law) और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ (National Anthem) के अपमान को रोकने के प्रावधान थे. 
    • राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के अनादर को रोकने के लिए कोई विशिष्ट वैधानिक ढांचा नहीं था, जिसे इस संशोधन द्वारा पूरा किया गया है. 
  • निषिद्ध आचरण और नए आपराधिक कृत्य: संशोधित धारा 3 के अंतर्गत अब निम्नलिखित कृत्यों को दंडात्मक अपराध (Criminal Offence) की श्रेणी में शामिल किया गया है यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर: 
  • (क) राष्ट्रगान (जन गण मन) अथवा राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम्) के गायन को रोकता है.
  • (ख) ऐसा गायन कर रही किसी भी सार्वजनिक या निजी सभा में व्यवधान (Disturbance) उत्पन्न करता है.
  • दंडात्मक प्रावधान:
    • प्रथम अपराध: इस कानून के तहत राष्ट्रीय गीत का अपमान करने या व्यवधान डालने पर दोषी को तीन वर्ष तक के कारावास (Imprisonment up to 3 years), अथवा जुर्माना, या दोनों का सामना करना पड़ सकता है. 
    • दोषसिद्धि की पुनरावृत्ति (Repeat Convictions): अधिनियम की धारा 3क (जिसे 2003 में जोड़ा गया था) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति दूसरी बार या उसके बाद इस अपराध को दोहराता है, तो उसके लिए न्यूनतम एक वर्ष का कठोर कारावास अनिवार्य होगा. 
  • संवैधानिक पृष्ठभूमि:
    • संविधान सभा का निर्णय: इस विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण (Statement of Objects and Reasons) में 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की अंतिम बैठक का ऐतिहासिक संदर्भ दिया गया है.
    • समान दर्जा: तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट घोषणा की थी कि ‘वंदे मातरम्’ को, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी, ‘जन गण मन’ के समान ही सम्मानित और समान दर्जा (Equal Status) दिया जाएगा. इस संशोधन ने 76 वर्ष बाद उस ऐतिहासिक घोषणा को पूर्ण वैधानिक रूप प्रदान किया है. 
  • न्यायिक फैसला: सर्वोच्च न्यायालय ने बिजोय इमैनुएल बनाम केरल राज्य (1986) मामले में व्यवस्था दी थी कि किसी को जबरन राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता यदि उसका धार्मिक विश्वास इसकी अनुमति नहीं देता, बशर्ते वह उसका सम्मानपूर्वक खड़ा रहे. यह नया संशोधन केवल “जानबूझकर रोकने या बाधा डालने” को अपराध बनाता है, न कि चुपचाप सम्मानपूर्वक खड़े रहने को. 

भारत का राष्ट्रीय गीत – ‘वंदे मातरम’

  • रचनाकार: इसकी मूल रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 7 नवंबर 1875 को की गई थी, जिसे बाद में उनके सुप्रसिद्ध राजनीतिक उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में शामिल किया गया।
  • भाषा और संगीत: यह मूलतः संस्कृत और बंगाली मिश्रित भाषा में रचित है। इस कालजयी गीत को पहली बार रवींद्रनाथ टैगोर ने वर्ष 1896 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के कलकत्ता अधिवेशन में स्वरबद्ध कर गाया था। 
  • स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका:
  • स्वदेशी आंदोलन (1905): बंगाल विभाजन के विरोध में यह गीत ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ जन-प्रतिरोध और राष्ट्रीय एकता का मुख्य नारा बना।
  • क्रांतिकारी प्रभाव: वर्ष 1907 में मैडम भीकाजी कामा ने स्टटगार्ट (जर्मनी) में जो भारत का पहला तिरंगा फहराया, उस पर ‘वंदे मातरम’ अंकित था। अरविंद घोष और बिपिन चंद्र पाल ने इसी नाम से राष्ट्रीय समाचार पत्र भी निकाला। 
  • विवाद और समाधान: सांप्रदायिक संवेदनशीलता को देखते हुए वर्ष 1937 में कांग्रेस ने इसके केवल शुरुआती दो छंदों को आधिकारिक रूप से अपनाया, जो बिना किसी धार्मिक कूटार्थ के पूरी तरह मातृभूमि की प्राकृतिक सुंदरता को समर्पित हैं।
  • संवैधानिक मौन: भारतीय संविधान में सीधे तौर पर ‘राष्ट्रीय गीत’ शब्द का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, परंतु अनुच्छेद 51A(a) के तहत राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है। 
  • समकालीन प्रासंगिकता: हाल ही में देश में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मनाई गई है, जो समकालीन भारत में राष्ट्रीय एकीकरण, संप्रभुता और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के विजन को मजबूत करने में इसकी वैचारिक प्रासंगिकता को दर्शाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 क्या है?

उत्तर: यह संसद (Indian Parliament) द्वारा पारित एक विधिक संशोधन है जो राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान के समान ही कानूनी संरक्षण प्रदान करता है.

प्रश्न 2: इस विधेयक में क्या संशोधन किए गए हैं?

उत्तर: इसके द्वारा 1971 के अधिनियम की धारा 3 में संशोधन कर ‘राष्ट्रगान’ शब्द के साथ-साथ ‘राष्ट्रीय गीत’ (National Song) को भी जोड़ दिया गया है.

प्रश्न 3: राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य भारत के संप्रभु प्रतीकों, राष्ट्रगान, राष्ट्रीय गीत और संविधान के प्रति नागरिकों में सम्मान सुनिश्चित करना और उनके सार्वजनिक अनादर को रोकना है.

प्रश्न 4: यह कानून किन राष्ट्रीय प्रतीकों की सुरक्षा करता है?

उत्तर: यह कानून भारतीय राष्ट्रीय ध्वज (National Flag), भारत के संविधान (Constitution), राष्ट्रगान (Jan Gana Mana) और अब राष्ट्रीय गीत (Vande Mataram) की विधिक सुरक्षा करता है.

प्रश्न 5: नए संशोधन का क्या प्रभाव होगा?

उत्तर: अब वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या सभा में अशांति फैलाने पर 3 साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है.।

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