National Sports Administration and Good Governance Act 2025
संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन और सुशासन अधिनियम, 2025 (National Sports Administration and Governance Act, 2025) के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है।
पृष्ठभूमि:
भारत में अब तक खेल संगठनों का संचालन ‘राष्ट्रीय खेल विकास संहिता 2011’ (Sports Code 2011) के माध्यम से होता था, जो कि केवल कार्यकारी दिशा-निर्देश थे। लंबे समय से भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) और विभिन्न खेल संघों (NSFs) में पारदर्शिता की कमी, वित्तीय अनियमितता और कार्यकाल संबंधी विवाद देखे जा रहे थे। 2026 के एशियाई खेलों और 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत की दावेदारी को देखते हुए एक सुदृढ़ कानूनी ढांचे की आवश्यकता थी।
राष्ट्रीय खेल प्रशासन और सुशासन अधिनियम, 2025 के मुख्य प्रावधान:
- राष्ट्रीय खेल बोर्ड (NSB): यह एक वैधानिक नियामक संस्था होगी जिसके पास खेल संघों को मान्यता देने, निलंबित करने या रद्द करने की शक्ति होगी। बोर्ड निधियों के उपयोग की जांच भी कर सकेगा।
- राष्ट्रीय खेल पंचाट (National Sports Tribunal): खेलों से संबंधित विवादों (जैसे चयन या चुनाव विवाद) के त्वरित समाधान के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक निकाय का गठन किया जाएगा। इसके निर्णयों के विरुद्ध केवल उच्चतम न्यायालय में अपील की जा सकेगी।
- राष्ट्रीय खेल निर्वाचन पैनल (NSEP): यह पैनल खेल संघों के कार्यकारी निकायों और एथलीट समितियों के चुनाव पारदर्शी तरीके से आयोजित करने के लिए जिम्मेदार होगा।
- कार्यकाल और आयु सीमा: अधिनियम ने ‘स्पोर्ट्स कोड’ के आयु और कार्यकाल के नियमों को वैधानिक दर्जा दे दिया है। इसमें अध्यक्ष के लिए अधिकतम कार्यकाल 12 वर्ष (4 वर्ष के 3 कार्यकाल) तथा पदाधिकारियों के लिए अधिकतम आयु 70 वर्ष निर्धारित की गई है।
- खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व: प्रत्येक खेल संघ के प्रबंधन बोर्ड में कम से कम 25% सदस्य सक्रिय या पूर्व खिलाड़ी (Athletes) होने अनिवार्य हैं।
- कार्यकारी समिति: प्रत्येक राष्ट्रीय खेल संघ (NSF) की 15-सदस्यीय कार्यकारी समिति में कम से कम दो उत्कृष्ट खिलाड़ी (SOMs) और चार महिला सदस्य होना अनिवार्य है।
- समितियों का अनिवार्य गठन: प्रत्येक खेल निकाय में एक एथलीट समिति, एथिक्स समिति और आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र होना आवश्यक है।
- पारदर्शिता और सुशासन: अधिनियम के अनुसार, सभी खेल संघों को अब ‘सूचना का अधिकार’ (RTI) के दायरे में लाया गया है। उन्हें अपने वित्तीय विवरण, चयन प्रक्रिया और वार्षिक कैलेंडर अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर सार्वजनिक करने होंगे।
- सुरक्षित खेल नीति (Safe Sports Policy): महिला और नाबालिग खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए ‘सेफ स्पोर्ट्स पॉलिसी’ और यौन उत्पीड़न रोकथाम (POSH) मानकों का पालन अनिवार्य किया गया है।
जनवरी 2026 से लागू होने वाले प्रावधान:
केंद्र सरकार ने वर्तमान अधिसूचना के माध्यम से अधिनियम के प्रारंभिक खंडों को प्रभावी किया है, जिनमें शामिल हैं: नियामक निकायों के गठन की प्रक्रिया, संघों के पंजीकरण की नई शर्तें और अंतरिम अवधि के लिए प्रशासनिक ढांचा।
इसका महत्व:
- वैश्विक मानक: यह भारत के खेल प्रशासन को वैश्विक मानकों (जैसे ऑस्ट्रेलिया और यूके के स्पोर्ट्स एक्ट) के समकक्ष लाता है।
- जवाबदेही: सरकारी धन के उपयोग के लिए खेल संघों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा।
- राजनीतिक हस्तक्षेप में कमी: कार्यकाल और आयु सीमा के सख्त पालन से खेल संघों पर वर्षों तक काबिज रहने वाले राजनीतिक प्रभाव में कमी आएगी।

