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राष्ट्रीय युवा दिवस (National youth day) | Ankit Avasthi Sir

National youth day

National youth day

संदर्भ:

स्वामी विवेकानंद की जयंती (12 जनवरी) को भारत में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में उनकी 163वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

स्वामी विवेकानंद (1863-1902):

  • परिचय: स्वामी विवेकानंद आधुनिक भारत के उन महानतम आध्यात्मिक गुरुओं और समाज सुधारकों में से एक थे, जिन्होंने भारतीय वेदांत और योग के दर्शन को पश्चिमी जगत से परिचित कराया। 
  • जन्म: 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में (नरेन्द्रनाथ दत्त के रूप में)।
  • गुरु: वे रामकृष्ण परमहंस के परम शिष्य थे। उन्होंने अपने गुरु के नाम पर ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना की।
  • शिकागो धर्म संसद (1893): उन्होंने विश्व धर्म संसद में “अमेरिका के भाइयों और बहनों” के संबोधन से पूरी दुनिया को भारतीय संस्कृति की उदारता और सहिष्णुता से परिचित कराया।

स्वामी विवेकानंद के प्रमुख दार्शनिक विचार:

  • व्यावहारिक वेदांत (Practical Vedanta): विवेकानंद का मानना था कि वेदांत केवल गुफाओं या जंगलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने ‘दरिद्र नारायण’ (गरीबों में ईश्वर) की सेवा को ही असली धर्म बताया। उनके अनुसार, “यदि आप ईश्वर की सेवा करना चाहते हैं, तो मनुष्य की सेवा करें।”
  • राष्ट्रवाद और आध्यात्मिक शक्ति: विवेकानंद का राष्ट्रवाद धर्म पर आधारित था, लेकिन वह संकीर्ण नहीं था। उन्होंने भारतीयों में ‘आत्म-सम्मान’ और ‘शक्ति’ का संचार किया। उन्होंने कहा था, “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”
  • शिक्षा पर विचार: उनके अनुसार शिक्षा केवल सूचनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि “मनुष्य के भीतर निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति” है। वे ऐसी शिक्षा के पक्षधर थे जिससे चरित्र निर्माण हो और व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सके।
  • सार्वभौमिक सहिष्णुता (Universal Tolerance): उन्होंने सिखाया कि सभी धर्म एक ही सत्य की ओर ले जाने वाले अलग-अलग मार्ग हैं। उन्होंने ‘सहिष्णुता’ के बजाय ‘स्वीकार्यता’ (Acceptance) पर जोर दिया।
  • सामाजिक सुधार: 1897 में स्थापित रामकृष्ण मिशन आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर कार्य कर रहा है। विवेकानंद ने जातिवाद, छुआछूत और महिलाओं की अशिक्षा जैसी सामाजिक बुराइयों पर कड़ा प्रहार किया। 

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिकता:

  • विकसित भारत @ 2047: भारत सरकार के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में विवेकानंद के विचार आधार स्तंभ हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि युवाओं का कौशल विकास (Skill Development) स्वामी जी के “आत्मनिर्भर युवा” के सपने का विस्तार है।
  • विश्व बंधुत्व और G20 (वसुधैव कुटुंबकम): भारत की विदेश नीति में ‘विश्व गुरु’ की जो छवि उभर रही है, उसकी जड़ें विवेकानंद के शिकागो भाषण में हैं। आज का भारत संघर्षपूर्ण विश्व में शांति और एकता का संदेशवाहक बना हुआ है।
  • मानसिक स्वास्थ्य और योग: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में युवाओं के बीच बढ़ते तनाव को दूर करने के लिए विवेकानंद द्वारा प्रचारित राजयोग और ध्यान की पद्धति अत्यंत प्रासंगिक हो गई है।

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