NATO
संदर्भ:
हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने यूरोपीय नाटो सहयोगियों को 2027 तक नाटो के नियमित रक्षा कार्यों विशेषकर खुफिया संग्रह, मिसाइल रक्षा और सामूहिक रक्षा समन्वय का बड़ा हिस्सा संभालने की बात कही है। पेंटागन ने स्पष्ट किया कि रूस–यूक्रेन संघर्ष के बाद यूरोप द्वारा रक्षा व्यय में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। यदि यूरोप 2027 तक लक्ष्य नहीं पूरा करता है, तो अमेरिका नाटो में अपनी भागीदारी सीमित कर सकता है।
नाटो का परिचय:
- नाटो (North Atlantic Treaty Organization) एक राजनीतिक–सैन्य संगठन है जिसकी स्थापना 1949 की नॉर्थ अटलांटिक संधि के आधार पर हुई।
- यह 32 सदस्य देशों का गठबंधन है जो सामूहिक सुरक्षा, सहमति-आधारित निर्णय प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है।
- नाटो का मूल सिद्धांत अनुच्छेद 5 है जिसके अनुसार किसी एक सदस्य पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है। अनुच्छेद 5 अब तक केवल 9/11 (2001) के बाद एक बार लागू किया गया है।
नाटो के मूल सिद्धांत:
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सामूहिक सुरक्षा (Article 5): अनुच्छेद 5 नाटो का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा ढांचा है। इसके तहत किसी भी सदस्य देश पर सशस्त्र हमला होने पर अन्य सदस्य आवश्यक सैन्य या राजनीतिक कार्रवाई कर सकते हैं। यह सिद्धांत नाटो की सामूहिक प्रतिरोध क्षमता का आधार है।
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सहमति-आधारित निर्णय प्रक्रिया: नाटो में सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। इससे गठबंधन की एकता बनी रहती है और अलग-अलग रणनीतिक प्राथमिकताओं वाले देशों के बीच सामंजस्य सुनिश्चित होता है।
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लोकतांत्रिक मूल्य: नाटो का आधार लोकतंत्र, मानवाधिकार और विधि के शासन पर है। संधि का उद्देश्य संघर्षों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना और साझेदार देशों में संस्थागत सुधार को प्रोत्साहित करना है।
नाटो की मुख्य गतिविधियाँ:
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प्रतिरोध और रक्षा: नाटो धरती, समुद्र, वायु, साइबर और अंतरिक्ष सभी क्षेत्रों में मजबूत सैन्य क्षमता बनाए रखता है। इसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, उन्नत तकनीक, तथा रक्षा उद्योग सहयोग शामिल है। रूस–यूक्रेन संकट के बाद नाटो ने अपने पूर्वी मोर्चे को मजबूत किया है।
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संकट प्रबंधन: नाटो कूटनीति विफल होने पर संयुक्त राष्ट्र के अधीन या स्वतंत्र रूप से शांति मिशन चला सकता है। वर्तमान मिशनों में KFOR (कोसोवो) और NATO Mission Iraq शामिल हैं।
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सहकारी सुरक्षा: नाटो, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र के साथ भागीदारी कर वैश्विक स्थिरता को बढ़ावा देता है। इसमें क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, सूचना-साझाकरण और सुरक्षा सहयोग शामिल हैं।
आधुनिक चुनौतियाँ:
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रूस–यूक्रेन संघर्ष: 2022 के बाद रूस की आक्रामकता से यूरोप की सुरक्षा स्थिति अस्थिर हुई। नाटो ने जवाब में जमीनी सैनिकों की तैनाती, उन्नत हथियार प्रणालियों और 2% GDP रक्षा व्यय की स्थायी प्रतिबद्धता को मजबूत किया।
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तकनीकी चुनौतियाँ: AI, स्वायत्त प्रणालियाँ, साइबर आक्रमण, क्वांटम तकनीक जैसी उभरती तकनीकों ने आधुनिक युद्ध को जटिल बनाया है। नाटो इन तकनीकों के सैन्य और सुरक्षा प्रभावों का मूल्यांकन कर रहा है।
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हाइब्रिड खतरे: डिज़इन्फॉर्मेशन, साइबर हमले, महत्वपूर्ण अवसंरचना पर सबोटाज और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न सुरक्षा जोखिम नाटो के लिए चुनौतियाँ प्रस्तुत करते हैं।
अमेरिका की नई नीति:
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अमेरिकी दृष्टिकोण: अमेरिका मानता है कि नाटो में उसकी सैन्य भूमिका असमान रूप से अधिक है। पेंटागन के अनुसार यूरोप को रक्षा वित्त, मिसाइल रक्षा तंत्र और खुफिया तंत्र में आत्मनिर्भर बनना चाहिए।
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यूरोपीय प्रतिक्रिया: कुछ यूरोपीय देशों ने 2027 की समयसीमा को अव्यावहारिक बताया। उनका तर्क है कि इतनी कम अवधि में सैन्य अवसंरचना, साइबर सुरक्षा, और खुफिया नेटवर्क का विस्तार संभव नहीं।
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संभावित परिणाम: यदि यूरोप लक्ष्य पूरा नहीं करता, तो अमेरिका नाटो समन्वय भूमिकाओं—जैसे मिसाइल रक्षा प्रबंधन, खुफिया सूचना साझाकरण—से हट सकता है, जिससे गठबंधन का सुरक्षा संतुलन प्रभावित हो सकता है।

