NBFC License
संदर्भ:
फ्लिपकार्ट भारत की पहली ई–कॉमर्स कंपनी बन गई है जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से ग़ैर–बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) का लाइसेंस मिला है। इस लाइसेंस के जरिए अब फ्लिपकार्ट अपने ग्राहकों और विक्रेताओं को सीधे ऋण प्रदान कर सकेगी, जिससे उसकी वित्तीय सेवाओं में पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ेगी।
Flipkart को NBFC License मिलने का महत्व:
मुख्य तथ्य:
- Flipkart को NBFC (गैर–बैंकिंग वित्तीय कंपनी) का लाइसेंस प्राप्त हुआ है।
- अब यह अपनी फिनटेक ऐप ‘super.money’ और अपने प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से ग्राहकों को प्रत्यक्ष रूप से ऋण (Loan) दे सकेगा।
- Flipkart अब अपने पार्टनरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं ऋण दे सकेगा, जिससे उसकी लाभप्रदता (profitability) बढ़ सकती है।
- कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद विक्रेताओं (Sellers) को भी वित्तीय सहायता प्रदान कर सकेगी।
गैर–बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) क्या होती है?
परिभाषा:
- NBFC एक ऐसी गैर–बैंकिंग वित्तीय संस्था होती है जो Companies Act, 1956 के अंतर्गत पंजीकृत होती है।
- यह ऋण, पेंशन, बीमा जैसी वित्तीय सेवाएँ प्रदान करती है, लेकिन इसका कार्य बैंकों से अलग होता है।
NBFC क्या नहीं कर सकती:
- ये जनता से जमा (Deposit) नहीं ले सकतीं।
- ये चेक बुक जारी नहीं कर सकतीं और न ही बचत खाता (Savings Account) खोल सकती हैं।
NBFC क्षेत्र का महत्व:
- NBFCs ने MSME, रिटेल सेक्टर और वंचित वर्गों को औपचारिक ऋण प्रणाली से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- यह क्षेत्र देश की GDP में लगभग 12.5% का योगदान देता है।
- 2014 में NBFC का ऋण हिस्सा 15% था, जो 2024 में बढ़कर 22.5% हो गया है (Scheduled Commercial Bank Credit में)।
- इनकी वृद्धि को बैंक ऋण, वाणिज्यिक पत्र (Commercial Papers), डिबेंचर और अन्य ऋण साधनों से सहायता मिली है।
- इनमें से 75% फंडिंग टर्म लोन और डिबेंचर से होती है।
NBFCs का विनियमन (Regulation):
- NBFCs का संचालन और निगरानी भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा RBI अधिनियम, 1934 के अंतर्गत किया जाता है।
NBFCs के प्रकार:
- संपत्ति–देयता संरचना के आधार पर:
- डिपॉजिट लेने वाली NBFCs (NBFCs-D)
- डिपॉजिट न लेने वाली NBFCs (NBFCs-ND)
- प्रणालीगत महत्व के आधार पर: जिन NBFCs की संपत्ति ₹500 करोड़ या उससे अधिक है, उन्हें
NBFC-ND-SI (Non-Deposit Taking Systemically Important NBFCs) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
NBFCs और बैंकों के बीच मुख्य अंतर
- मांग जमा स्वीकार करने में असमर्थता:
NBFCs मांग जमा (Demand Deposits) स्वीकार नहीं कर सकतीं, जबकि बैंक यह सुविधा प्रदान करते हैं। - भुगतान और निपटान प्रणाली का हिस्सा नहीं: NBFCs, भुगतान और निपटान प्रणाली (Payment & Settlement System) का हिस्सा नहीं होतीं,
इसलिए वे चेक जारी (Cheque Issue) नहीं कर सकतीं। - जमा बीमा सुरक्षा का अभाव:
NBFC में पैसा जमा करने वालों को DICGC (जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम) के अंतर्गत कोई सुरक्षा नहीं मिलती,
जबकि बैंकों में जमाकर्ताओं को ₹5 लाख तक की बीमा सुरक्षा उपलब्ध होती है।