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इम्पेटीन्स नागोरम नामक नई पुष्प प्रजाति की खोज (New flower species Impatiens nagorum discovered) | UPSC

New flower species Impatiens nagorum discovered

New flower species Impatiens nagorum discovered

संदर्भ:

हाल ही में वनस्पति शास्त्रियों ने उत्तर-पूर्व भारत के नागालैंड राज्य से Impatiens nagorum नामक एक नई पुष्प प्रजाति की खोज की।

Impatiens nagorum के बारे में:

  • परिवार: यह नई प्रजाति ‘बालसम’ (Balsam) या ‘टच-मी-नॉट’ (Touch-me-not) परिवार से संबंधित है, जिन्हें उनके बीजों के स्पर्श मात्र से फटने के गुण के कारण जाना जाता है। 
  • खोज स्थल: यह प्रजाति नागालैंड के किफिरे जिले (Kiphire district) में स्थित फकिम वन्यजीव अभयारण्य (Fakim Wildlife Sanctuary) में खोजी गई है।
  • नामकरण: इसका नाम ‘nagorum’ क्षेत्र के स्थानीय नागा समुदायों के सम्मान में रखा गया है।
  • भौतिक विशेषताएं:
    • इसकी ऊंचाई लगभग 35 सेमी तक होती है।
    • इसके पुष्प बैंगनी (Purple) रंग के होते हैं जो इसे विशिष्ट बनाते हैं।
    • इसकी पत्तियां दांतेदार (Serrated) होती हैं और इसके बाह्य दल (sepals) थोड़े बालों वाले होते हैं।
  • आवास और पारिस्थितिकी: यह 2,336 मीटर की ऊंचाई पर नम शीतोष्ण चौड़ी पत्ती वाले वनों (moist temperate broadleaf forests) में पाया जाता है।

वनस्पति समूह बालसम:

  • परिचय: बल्सामिनेसी (Balsaminaceae), जिसे सामान्यतः ‘बालसम’ या ‘टच-मी-नॉट’ परिवार के रूप में जाना जाता है, वनस्पतियों का एक अनूठा समूह है। बल्सामिनेसी परिवार में मुख्य रूप से एकवर्षीय (annual) और बारहमासी (perennial) जड़ी-बूटियाँ शामिल हैं। 
  • प्रमुख वंश (Genera): इसमें मुख्य रूप से दो वंश पाए जाते हैं:
    • Impatiens: यह सबसे बड़ा वंश है जिसमें दुनिया भर में 1,000 से अधिक प्रजातियां शामिल हैं।
    • Hydrocera: यह एक मोनोटाइपिक (monotypic) वंश है, जिसका एकमात्र प्रतिनिधि Hydrocera triflora है, जो दक्षिण भारत और दक्षिण-पूर्वी एशिया में पाया जाता है।
  • विशेषता: Hydrocera में पांच मुक्त पंखुड़ियां और बेरी जैसा फल होता है, जबकि Impatiens में चार पंखुड़ियां जुड़ी होती हैं और 5-वाल्व वाला कैप्सूल फल होता है। 
  • विस्फोटक विखंडन (Explosive Dehiscence): इनका सबसे प्रमुख लक्षण इनका फल (कैप्सूल) है। परिपक्व होने पर स्पर्श मात्र से यह कैप्सूल झटके के साथ फट जाता है।
  • पुष्प संरचना (Floral Morphology): इनके पुष्प जाइगोमॉर्फिक (असममित) होते हैं और अक्सर 180° तक मुड़े (resupinate) होते हैं। पुष्प का निचला बाह्य दल (sepal) एक थैलीनुमा संरचना में विकसित होता है जिसे ‘स्पर’ (spur) कहते हैं।
  • पत्तियां और तना: इनके तने रसीले (succulent) और अक्सर पारभासी (translucent) होते हैं। पत्तियां आमतौर पर एकांतर (alternate) या चक्राकार (whorled) होती हैं। 
  • प्रमुख वितरण: भारत में इस वंश की 280 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं।
  • विविधता केंद्र:
    1. पूर्वी हिमालय और उत्तर-पूर्व भारत: यह क्षेत्र सबसे समृद्ध है (हालिया खोज: Impatiens nagorum)।
    2. पश्चिमी घाट: यह दूसरा सबसे बड़ा केंद्र है। यहाँ की लगभग 90% प्रजातियां स्थानिक (Endemic) हैं। अकेले केरल में ही लगभग 107 प्रजातियां दर्ज हैं।
  • संकट: पश्चिमी घाट में पाई जाने वाली लगभग 80% स्थानिक प्रजातियां अपने विशिष्ट आवास (Habitats) के प्रति संवेदनशील होने के कारण खतरे में या लुप्तप्राय (Endangered) श्रेणी में हैं। 

इनका महत्व:

  • बागवानी (Horticulture): जीवंत और विविध रंगों (गुलाबी, बैंगनी, लाल, सफेद) के कारण इन्हें सजावटी पौधों के रूप में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
  • औषधीय उपयोग: पारंपरिक चिकित्सा में इनका उपयोग त्वचा की सूजन, जलन, मस्सों और जोड़ों के दर्द के उपचार में किया जाता है। Impatiens balsamina के फूलों में एंटीफंगल और जीवाणुरोधी गुण होते हैं।
  • पारिस्थितिकी: ये पौधे मधुमक्खियों और तितलियों जैसे परागणकों के लिए भोजन का महत्वपूर्ण स्रोत हैं और मिट्टी के स्थिरीकरण में मदद करते हैं।

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