New micro-arthropod named Lepidocampa sikkimensis discovered
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India – ZSI) के वैज्ञानिकों ने पूर्वी हिमालय के सिक्किम क्षेत्र में एक अत्यंत प्राचीन और दुर्लभ सूक्ष्म-जीव की खोज की है, जिसे ‘लेपिडोकैम्पा सिक्किमेंसिस’ (Lepidocampa sikkimensis) नाम दिया गया है।
लेपिडोकैम्पा सिक्किमेंसिस के बारे में:
- परिचय: यह प्रजाति डिपलुरा नामक कीटों के एक आदिम समूह से संबंधित है। डिपलुरा छोटे, बिना पंख वाले और मिट्टी में रहने वाले जीव होते हैं।
- वर्ग: डिपलुरा सूक्ष्म, पंखहीन और बिना आंखों वाले संधिपाद हैं। ये एन्टोग्नेथा (Entognatha) वर्ग में आते हैं। इनके मुख के हिस्से सिर के अंदर धंसे होते हैं।
- खोज का स्थान: मुख्य रूप से दक्षिण सिक्किम के रवांगला और पश्चिम बंगाल के कर्सियांग में इसकी उपस्थिति दर्ज की गई।
- DNA बारकोडिंग: ZSI ने पहली बार किसी भारतीय लेपिडोकैम्पा प्रजाति का DNA बारकोड डेटा तैयार किया है।
- विशेषताएं:
- पंखहीन और अंधे: ये जीव विकास क्रम के उस चरण के हैं जहाँ पंखों का विकास नहीं हुआ था। मिट्टी की गहराई में रहने के कारण इनमें आँखों का अभाव होता है।
- दो पूंछ वाले: इन्हें सामान्यतः ‘टू-प्रोंग्ड ब्रिसलटेल’ कहा जाता है क्योंकि इनके शरीर के अंत में दो संवेदनशील रेशे (Cerci) होते हैं।
- विशिष्ट संरचना: इसकी पहचान इसके शरीर पर तराजू की अनूठी व्यवस्था, विशिष्ट ब्रिसल पैटर्न और विशेष उपांग संरचनाओं के आधार पर की गई है।
- आवास: ये अंधेरे और नम स्थानों, जैसे मिट्टी के नीचे, सड़ी-गली पत्तियों, गुफाओं और पत्थरों के नीचे पाए जाते हैं।
- पारिस्थितिक महत्व:
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- पोषक तत्व चक्र (Nutrient Cycling): ये मिट्टी में मौजूद कार्बनिक पदार्थों को तोड़कर पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में मदद करते हैं।
- मृदा संरचना: अपनी गतिविधियों से ये मिट्टी के वातन (Aeration) और जल धारण क्षमता को बनाए रखते हैं।
- जैव-सूचक (Bio-indicators): इनकी उपस्थिति मिट्टी की उर्वरता और पारिस्थितिक शुद्धता का संकेत देती है।
- विशेष: भारत में पहले से डिप्लूरा की 17 प्रजातियां दर्ज है, लेकिन वे सभी विदेशी शोधकर्ताओं द्वारा वर्णित की गई थीं। Lepidocampa sikkimensis पहली ऐसी प्रजाति है जिसे पूरी तरह से एक भारतीय शोध दल द्वारा वर्णित किया गया है।

