NHAI announces development of B Corridor
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने भारत के पहले समर्पित ‘बी कॉरिडोर’ (Bee Corridors) विकसित करने की घोषणा की है।
‘बी कॉरिडोर’ (Bee Corridor) क्या है?
- परिचय: ’बी कॉरिडोर’ राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे विकसित की जाने वाली परागणकर्ता-अनुकूल वनस्पतियों की एक निरंतर रेखीय श्रृंखला (Linear Stretch) है।
- उद्देश्य: इन गलियारों का उद्देश्य मधुमक्खियों और अन्य परागणकर्ताओं के लिए पूरे वर्ष पराग (Pollen) और मकरंद (Nectar) की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
- नोडल एजेंसी: NHAI के क्षेत्रीय कार्यालयों को 2026-27 के दौरान कम से कम तीन परागणकर्ता कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य दिया गया है।
- भूमि उपयोग: ये कॉरिडोर न केवल राजमार्गों के किनारों पर बल्कि NHAI के पास उपलब्ध रिक्त भूमि पार्सल पर भी विकसित किए जाएंगे।
विशेषताएं:
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- प्रजातियों का चयन: सजावटी पौधों के स्थान पर देशी प्रजातियों जैसे नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस को प्राथमिकता दी जाएगी।
- निरंतर पुष्पन चक्र: पौधों का चयन इस तरह किया जाएगा कि साल के विभिन्न महीनों में अलग-अलग प्रजातियां फूलें, जिससे मधुमक्खियों को भोजन की कभी कमी न हो।
- रणनीतिक अंतराल: फूलों के पौधों के झुरमुट हर 500 मीटर से 1 किलोमीटर के अंतराल पर लगाए जाएंगे, जो मधुमक्खियों की औसत चारा खोजने की दूरी के अनुरूप है।
- प्राकृतिक आवास का संरक्षण: इस कॉरिडोर में झाड़ियाँ, जड़ी-बूटियाँ और घास भी शामिल होंगी। साथ ही, मृत लकड़ियों और खोखले तनों को हटाया नहीं जाएगा।
- लक्ष्य: वर्ष 2026-27 के दौरान लगभग 40 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य है। कुल वृक्षारोपण का लगभग 60% (यानी 24 लाख पेड़) इसी ‘बी कॉरिडोर’ पहल के तहत लगाया जाएगा।
महत्व:
- कृषि और खाद्य सुरक्षा: मधुमक्खियाँ दुनिया की लगभग 75% खाद्य फसलों के परागण के लिए जिम्मेदार हैं। राजमार्गों के किनारे ये कॉरिडोर आस-पास के खेतों में ‘परागण सेवाओं’ को मजबूत करेंगे, जिससे फसल की पैदावार और गुणवत्ता में सुधार होगा।
- जलवायु-लचीला बुनियादी ढांचा: यह पहल NHAI की ‘ग्रीन हाईवे पॉलिसी’ का हिस्सा है। सजावटी पौधों के बजाय पारिस्थितिक महत्व के पौधों को प्राथमिकता देना कार्बन अवशोषण के साथ-साथ मृदा अपरदन को भी कम करता है।
- पारिस्थितिक तनाव का निवारण: शहरीकरण और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से परागणकर्ताओं की संख्या में वैश्विक स्तर पर गिरावट आई है। ये कॉरिडोर उनके लिए ‘सुरक्षित प्रवास मार्ग’ के रूप में कार्य करेंगे।

