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नीति आयोग की डीकार्बोनाइजेशन रोडमैप संबंधी रिपोर्ट (NITI Aayog Decarbonization Roadmap Report) | UPSC Preparation

NITI Aayog Decarbonization Roadmap Report

NITI Aayog Decarbonization Roadmap Report

संदर्भ:

हाल ही में नीति आयोग ने भारत के औद्योगिक परिदृश्य को हरित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए तीन प्रमुख क्षेत्रों—सीमेंट, एल्युमीनियम और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) के लिए कार्बन उत्सर्जन घटाने की कार्ययोजना (Decarbonisation Roadmaps) रिपोर्ट जारी की है।

रिपोर्ट के मुख्य स्तंभ:

नीति आयोग की इस रिपोर्ट में औद्योगिक उत्सर्जन को कम करने के लिए मुख्य रूप से चार तकनीकों पर जोर दिया गया है: ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और कार्बन कैप्चर (CCUS)। 

  1. सीमेंट क्षेत्र:
  • उत्पादन लक्ष्य: सीमेंट उत्पादन 2023 के 391 मिलियन टन से बढ़कर 2070 तक लगभग 2100 मिलियन टन (7 गुना) होने की संभावना है।
  • कार्बन तीव्रता में कमी: लक्ष्य यह है कि कार्बन तीव्रता को 0.63 tCO₂e प्रति टन से घटाकर 2070 तक 0.09-0.13 tCO₂e प्रति टन किया जाए।
  • रणनीति: इसके लिए ‘क्लिंकर विकल्प’, ‘अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन’ का उपयोग और कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) प्रौद्योगिकियों को बड़े पैमाने पर अपनाने का प्रस्ताव है। 
  1. एल्युमीनियम क्षेत्र:

एल्युमीनियम को भविष्य की धातु माना जाता है, लेकिन इसका उत्पादन बिजली की भारी खपत करता है।

  • उत्पादन अनुमान: एल्युमीनियम उत्पादन 2023 के 4 मिलियन टन से बढ़कर 2070 तक 37 मिलियन टन होने का अनुमान है।
  • तीन-चरणीय समाधान:
    • अल्पकालिक: नवीकरणीय ऊर्जा (RE-RTC) और ग्रिड कनेक्टिविटी बढ़ाना।
    • मध्यम अवधि: कैप्टिव संयंत्रों के लिए परमाणु ऊर्जा का उपयोग।
    • दीर्घकालिक: कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के लिए CCUS तकनीक का एकीकरण। 
  1. MSME क्षेत्र:

MSME क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन अक्सर स्वच्छ तकनीक के लिए वित्त की कमी का सामना करता है। 

  • प्रस्तावित संस्थान: रिपोर्ट में एक राष्ट्रीय परियोजना प्रबंधन एजेंसी (NPMA) स्थापित करने की सिफारिश की गई है जो MSMEs के हरित संक्रमण की निगरानी करेगी।
  • प्रमुख लेवर (Levers): ऊर्जा-कुशल उपकरणों की तैनाती, वैकल्पिक ईंधन को अपनाना और हरित बिजली का एकीकरण।
  • आर्थिक लाभ: अनुमान है कि अगले दशक में हरित बिजली के उपयोग से 30–35 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन कम होगा और लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का निजी निवेश आकर्षित होगा। 

महत्व:

  • CCUS तकनीक: नीति आयोग ने CCUS को ‘हार्ड-टू-अबेट’ (कठिन उत्सर्जन वाले) क्षेत्रों जैसे स्टील और सीमेंट के लिए अनिवार्य बताया है। CCUS क्षेत्र में 2050 तक लगभग 8-10 मिलियन पूर्णकालिक रोजगार पैदा करने की क्षमता है। 
  • कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS): सरकार ने जनवरी 2026 में 208 अतिरिक्त कार्बन-गहन उद्योगों (जैसे पेट्रोलियम रिफाइनरी और वस्त्र उद्योग) के लिए उत्सर्जन लक्ष्य अधिसूचित किए हैं, जो इस कार्ययोजना का पूरक है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: यूरोपीय संघ के CBAM (Carbon Border Adjustment Mechanism) जैसे नियमों को देखते हुए, भारतीय उद्योगों के लिए यह रोडमैप निर्यात प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • नेट-जीरो लक्ष्य: यह कार्ययोजना भारत के 2070 तक नेट-जीरो (Net Zero) उत्सर्जन लक्ष्य और 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के संकल्प के अनुरूप तैयार की गई है।

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